एन. रघुरामन का कॉलम: परिपक्व संगठन हमेशा पूछते हैं कि ‘क्या हो सकता है’, न कि ‘क्या हुआ’

एन. रघुरामन का कॉलम:  परिपक्व संगठन हमेशा पूछते हैं कि ‘क्या हो सकता है’, न कि ‘क्या हुआ’

जो गुड़ी पड़वा उत्सव का दिन होना था, वह इंदौर शहर के लिए शोक का दिन बन गया। बुधवार को एक घर में लगी आग में मारे गए सात लोगों की चिताएं जब एक साथ जलीं तो इसकी पीड़ा पूरे शहर को सामूहिक तौर पर महसूस हुई। मृतकों में एक मासूम भी था। इस दर्दनाक … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: आजकल के स्कूली बच्चे इकोनॉमिक्स की जगह पर्सनल फाइनेंस चुन रहे हैं

एन. रघुरामन का कॉलम:  आजकल के स्कूली बच्चे इकोनॉमिक्स की जगह पर्सनल फाइनेंस चुन रहे हैं

Hindi News Opinion School Kids Choose Personal Finance Over Economics: N Raghuraman Column 7 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु स्कूल अपने विद्यार्थियों को असल दुनिया के लिए कैसे तैयार कर सकते हैं? यहां एक तरीका है। हालांकि, मैं यह नहीं कह रहा कि यही एकमात्र तरीका है। चलिए शुरू करें। क्लासरूम में … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: मेंटल स्पेस की जरूरत हो तो लोगों को ‘शशिंग’ से चुप कराने में हर्ज नहीं

एन. रघुरामन का कॉलम:  मेंटल स्पेस की जरूरत हो तो लोगों को ‘शशिंग’ से चुप कराने में हर्ज नहीं

7 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु एक “गरीब स्कूल’ (जिसकी फीस 1960 के दशक में 2 रुपए थी) में पढ़ने के बावजूद मुझे बचपन से ही सख्ती से सिखाया गया था कि अगर मैं किसी साझा या सार्वजनिक जगह पर शोर कर रहा हूं, तो मुझे या तो अपनी आवाज को कम … Read more

एन. रघुरामन कॉलम: ‘क्विक सर्विस’ एक नशा है, जो रिटेलर्स मुफ्त में देकर आदत लगा रहे हैं

एन. रघुरामन कॉलम:  ‘क्विक सर्विस’ एक नशा है, जो रिटेलर्स मुफ्त में देकर आदत लगा रहे हैं

Hindi News Opinion Quick Service Addiction: Retailers Hooking Customers For Free | Raghuraman Column 7 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु ‘क्या आप देख सकते हैं कि दरवाजे पर कौन है?’ वॉशरूम से पत्नी का यह फरमान सुन कर मैं अपने कंप्यूटर से उठा और फ्रंट डोर की ओर चल पड़ा। डिलीवरी बॉय … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: ऑल-इन-वन प्रजाति यानी स्त्रियों से मैंने दो शानदार सबक सीखे हैं!

एन. रघुरामन का कॉलम:  ऑल-इन-वन प्रजाति यानी स्त्रियों से मैंने दो शानदार सबक सीखे हैं!

Hindi News Opinion N Raghuraman Column: 2 Lessons Learned From All in One Species Women 7 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु 1. बाहर तापमान एक अंक में हो या मूसलधार बारिश हो रही हो- उनका एक नियम अटल था : सुबह 5 बजे से बहुत पहले जब अलार्म घड़ी बज उठे तो … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: जब लोहा गर्म है तो मार दो हथौड़ा

एन. रघुरामन का कॉलम:  जब लोहा गर्म है तो मार दो हथौड़ा

एक पुरानी मोरल स्टोरी याद करें, जिसमें कई प्रशिक्षित मैकेनिकों के विफल होने के बाद एक बड़ी-सी मशीन ठीक करने के लिए साधारण-से आदमी को बुलाया जाता है। लगभग एक घंटे तक मशीन की जांच-परख करने के बाद वह एक जगह पर एक बार हथौड़ा मारता है और मशीन चल पड़ती है। वह मशीन चालू … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: अनुशासन फैशन से बाहर हो सकता है, चलन से नहीं

एन. रघुरामन का कॉलम:  अनुशासन फैशन से बाहर हो सकता है, चलन से नहीं

Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column Discipline May Go Out Of Fashion, But Not Trend 7 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु ‘मैं सिर्फ सैटरडे, संडे और वीकडेज में नहीं पीता, बाकी दिन मैं कुछ भी पी लेता हूं।’ जब से मैंने शराब वाली पार्टियों में जाना शुरू किया तो दशकों से मेरा … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: पार्टी की चर्चाओं में गर्मजोशी लानी है तो अपने पास हैरतअंगेज जानकारी रखिए

एन. रघुरामन का कॉलम:  पार्टी की चर्चाओं में गर्मजोशी लानी है तो अपने पास हैरतअंगेज जानकारी रखिए

आपने कई ईवनिंग पार्टियों में देखा होगा कि कुछ लोग सबका ध्यान खींचते हैं। ऐसा नहीं कि वे सेलेब्रिटी या बहुत अमीर लोग हों, जो अपना फैशन दिखा रहे हों, बल्कि वे वहां इकट्‌ठे लोगों को कुछ अनसुनी कहानियां सुना रहे होते हैं और इसीलिए पार्टी की जान बन जाते हैं। दूसरों के बारे में … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: क्या याददाश्त की समस्याएं हमारी युवा वर्कफोर्स को प्रभावित कर रही हैं?

एन. रघुरामन का कॉलम:  क्या याददाश्त की समस्याएं हमारी युवा वर्कफोर्स को प्रभावित कर रही हैं?

20 साल से एक ही परिवार के साथ काम कर रहे 39 वर्षीय ड्राइवर को तीन काम सौंपे गए। दोस्त के घर से पार्सल लेना, फिर किराने की तीन चीजें खरीदना और लौटते वक्त लॉन्ड्री से कपड़े ले आना। वह बिना कपड़े लिए लौट आया। पूछने पर सहज जवाब था कि ‘भूल गया, माफ कीजिए।’ … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: ईमानदारी ऐसी मुद्रा है, जिसका मूल्य कभी नहीं घटता

एन. रघुरामन का कॉलम:  ईमानदारी ऐसी मुद्रा है, जिसका मूल्य कभी नहीं घटता

जून 2019 में वह उस कंपनी में बिजनेस डेवलपमेंट एसोसिएट के रूप में जुड़ा। कॉलेज से निकलते ही वह सीधे ऐसी कंपनी में गया, जिसे हमारे देश के बच्चों वाले कई परिवार जानते हैं। सेल्स का काम आसान था। बैकएंड टीम बताती थी कि किसके यहां विजिट करनी है। जिसके पास भी कंपनी का एप … Read more