एन. रघुरामन का कॉलम: परिपक्व संगठन हमेशा पूछते हैं कि ‘क्या हो सकता है’, न कि ‘क्या हुआ’
जो गुड़ी पड़वा उत्सव का दिन होना था, वह इंदौर शहर के लिए शोक का दिन बन गया। बुधवार को एक घर में लगी आग में मारे गए सात लोगों की चिताएं जब एक साथ जलीं तो इसकी पीड़ा पूरे शहर को सामूहिक तौर पर महसूस हुई। मृतकों में एक मासूम भी था। इस दर्दनाक … Read more