पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: बल को परमात्मा से जोड़ें तो ऊंचाइयों पर ले जाएगा

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  बल को परमात्मा से जोड़ें तो ऊंचाइयों पर ले जाएगा

Hindi News Opinion Pandit Vijay Shankar Mehta Column: Connect Strength To Divine For Heights 6 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता जब बल आक्रमण में काम आता है, तो उसे शक्ति कहते हैं। और जब सुरक्षा में काम आता है तो उसे सहनशक्ति कहते हैं। मनुष्य को ईश्वर ने तीन तरह के बल दिए … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: क्या याददाश्त की समस्याएं हमारी युवा वर्कफोर्स को प्रभावित कर रही हैं?

एन. रघुरामन का कॉलम:  क्या याददाश्त की समस्याएं हमारी युवा वर्कफोर्स को प्रभावित कर रही हैं?

20 साल से एक ही परिवार के साथ काम कर रहे 39 वर्षीय ड्राइवर को तीन काम सौंपे गए। दोस्त के घर से पार्सल लेना, फिर किराने की तीन चीजें खरीदना और लौटते वक्त लॉन्ड्री से कपड़े ले आना। वह बिना कपड़े लिए लौट आया। पूछने पर सहज जवाब था कि ‘भूल गया, माफ कीजिए।’ … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: ईमानदारी ऐसी मुद्रा है, जिसका मूल्य कभी नहीं घटता

एन. रघुरामन का कॉलम:  ईमानदारी ऐसी मुद्रा है, जिसका मूल्य कभी नहीं घटता

जून 2019 में वह उस कंपनी में बिजनेस डेवलपमेंट एसोसिएट के रूप में जुड़ा। कॉलेज से निकलते ही वह सीधे ऐसी कंपनी में गया, जिसे हमारे देश के बच्चों वाले कई परिवार जानते हैं। सेल्स का काम आसान था। बैकएंड टीम बताती थी कि किसके यहां विजिट करनी है। जिसके पास भी कंपनी का एप … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: क्या हम जरूरत की खरीदारी छोड़ कर ‘मैन्युफैक्चर्ड क्रेविंग’ अपना रहे हैं?

एन. रघुरामन का कॉलम:  क्या हम जरूरत की खरीदारी छोड़ कर ‘मैन्युफैक्चर्ड क्रेविंग’ अपना रहे हैं?

Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column Are We Abandoning Necessities And Adopting ‘manufactured Cravings’? 6 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु दुनियाभर में, खासकर अमेरिका में सुबह के समय स्टारबक्स पर भीड़ बहुत रहती है। ग्राहक काउंटर तक पहुंचने से पहले ही मोबाइल एप से गरम कॉफी ऑर्डर करते हैं। झट से कप … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: विनर माइंडसेट वाले लोग ‘करो या मरो’ के कॉन्सेप्ट को बदलते हैं!

एन. रघुरामन का कॉलम:  विनर माइंडसेट वाले लोग ‘करो या मरो’ के कॉन्सेप्ट को बदलते हैं!

बचपन में टिम लिली ने अपने बेडरूम की दीवारों पर फ्लाइट मैग्जीनों से काटी गई तस्वीरें चिपका रखी थीं। 13 की आयु में उन्होंने अपना पहला फ्लाइट लेसन सीखा और 16 की आयु में उन्होंने अपनी पहली एकल उड़ान भरी। उन्होंने सेना में, कॉम्बैट मिशन पायलट-इन-कमांड के रूप में सेवा दी। उन्होंने एक विशेष रूट … Read more

डॉ. एडम रोडमैन का कॉलम: ‘डॉ. चैटजीपीटी’ से हेल्थ को लेकर इस तरह सलाह लें

डॉ. एडम रोडमैन का कॉलम:  ‘डॉ. चैटजीपीटी’ से हेल्थ को लेकर इस तरह सलाह लें

एक डॉक्टर के रूप में मुझे पता है कि मेरे मरीज चिकित्सकीय सलाह के लिए एआई का उपयोग करते हैं। कभी-कभी इसके संकेत सूक्ष्म होते हैं- जैसे जब वे सुझाए गए टेस्ट्स और संभावित इलाज की लंबी सूची लेकर चले आते हैं। लेकिन अधिकतर तो वे सीधे ही बता देते हैं कि मुझसे मिलने से … Read more

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: हम अपने बच्चों को तभी बचा पाएंगे जब खुद सावधान होंगे

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  हम अपने बच्चों को तभी बचा पाएंगे जब खुद सावधान होंगे

Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column: AIs Impact On Children & Family Safety 6 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता दुनियाभर के बाजार आज एआई में जमकर निवेश कर रहे हैं। दीवानों ने दर्द को ही दवा बना लिया है। हर बात का निदान एआई में ढूंढा जा रहा है। हमारे यहां दो … Read more

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: सुख को शांति से जोड़ने की कला ही अध्यात्म है

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  सुख को शांति से जोड़ने की कला ही अध्यात्म है

Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column: Spirituality Is Connecting Happiness With Peace 6 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता भाग्य का सबसे हठीला ढंग यही है कि वह समय पर बदल ही जाता है। अच्छे-अच्छे लोगों के जीवन में दुर्भाग्य जब प्रवेश करता है तो समझ नहीं पाते यह क्या हो गया? इस … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: ‘एफडीपी’ अपनाने से बच्चों की सफलता पक्की है

एन. रघुरामन का कॉलम:  ‘एफडीपी’ अपनाने से बच्चों की सफलता पक्की है

परीक्षाएं हों या गर्मियों की छुट्टियां, स्कूल के दिन हों या वीकेंड, चाहे बाहर बारिश हो रही हो या अचानक बिजली चली जाए, लेकिन शाम 7.30 बजे हमारा डिनर टाइम तय था। हम उस फैमिली गैदरिंग में न आने का कोई बहाना नहीं बना सकते थे। नियम सिर्फ दो मौकों पर टूटता था- जब किसी … Read more

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: श्रोता बनने की बारी आए तो अच्छे श्रोता बनिए

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  श्रोता बनने की बारी आए तो अच्छे श्रोता बनिए

अच्छा सुनने के लिए अच्छा होना ही पड़ेगा। पक्षीराज गरुड़ ने जब काकभुशुंडि जी से निवेदन किया कि कथा सुनाइए तो तुलसीदास जी ने गरुड़ जी की वाणी का वर्णन किया है- सुनत गरुड़ कै गिरा बिनीता, सरल सुप्रेम सुखद सुपुनीता। गरुड़ जी की विनम्र, सरल, सुंदर, प्रेम युक्त, सुखप्रद और अत्यंत पवित्र वाणी सुनते … Read more