एन. रघुरामन का कॉलम: इस गणतंत्र दिवस सफाई की सामूहिक जिम्मेदारी उठाने का संकल्प करें

एन. रघुरामन का कॉलम:  इस गणतंत्र दिवस सफाई की सामूहिक जिम्मेदारी उठाने का संकल्प करें

Hindi News Opinion N Raghuraman Column This Republic Day, Let Us Resolve To Take Collective Responsibility For Cleanliness. 5 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु जब आप किसी पर्यटक के रूप में वहां जाते हैं तो आपको लोकल फूड चखने को कहा जाता है। जाहिर है आप उसे पसंद भी करेंगे। लेकिन डिश … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: आप रिटायरमेंट का लुत्फ उठाना तो नहीं भूल रहे हैं?

एन. रघुरामन का कॉलम:  आप रिटायरमेंट का लुत्फ उठाना तो नहीं भूल रहे हैं?

मैं एक ऐसे शख्स को जानता था, जिन्होंने अपनी सर्विस के दौरान राजसी जीवन जिया। अपनी तीन बेटियों की शादी करवाई और उन्हें अच्छी तरह से बसाया। कुछ ही सालों में उनकी बेटियां उनसे भी ज्यादा धनवान हो गईं। 27 साल पहले रिटायर होने के बाद वे बेहद संयमी खर्च करने लगे। जो हर साल … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: सफल होने के लिए लीडर, पैरेंट्स और शिक्षक- सभी एक टेलर से भी सीखें!

एन. रघुरामन का कॉलम:  सफल होने के लिए लीडर, पैरेंट्स और शिक्षक- सभी एक टेलर से भी सीखें!

Hindi News Opinion N Raghuraman Column Leaders, Parents, And Teachers All Learn From A Tailor To Succeed! 2 दिन पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु वसंत पंचमी के दिन- जब मैं अपने टेलर के पास जाने ही वाला था- मेरी पत्नी नाराज हो गईं। वे बोलीं, मुझे समझ नहीं आता तुम एक ही शर्ट … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: ऐसा पछतावा ना हो कि ‘एक बार पूछ लेता तो अच्छा होता’

एन. रघुरामन का कॉलम:  ऐसा पछतावा ना हो कि ‘एक बार पूछ लेता तो अच्छा होता’

कैंसर पीड़ित एक युवक ने घर और अस्पताल में कई महीने गुजारने के बाद एक दिन बाहर निकलने का फैसला किया। वह एक म्यूजिक स्टोर पर सीडी खरीदने रुका और वहां मौजूद सेल्स गर्ल उसे अच्छी लग गई। जैसे ही वह अंदर गया, उसे पहली ही नजर में प्यार हो गया। वह काउंटर तक गया … Read more

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: ईश्वर से मिलने के लिए कुछ समय भीतर जाना ही पड़ेगा

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  ईश्वर से मिलने के लिए कुछ समय भीतर जाना ही पड़ेगा

जो हर जगह गूंज रहा है, उस दिव्य शक्ति, परमात्मा को समेटना ही भजन बन जाता है। भजन का सच्चा अर्थ यही है कि इसको करने वाला और सुनने वाला ध्वनि बन जाता है, मनुष्य नहीं रह जाता। जब ऐसा होता है तभी भजन का असली आनंद है। सच्चे भजन के लिए किसी ऑर्केस्ट्रा की … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: डायबिटीज और ऑटिज्म वाले खिलौने भी बिजनेस खड़ा कर सकते हैं

एन. रघुरामन का कॉलम:  डायबिटीज और ऑटिज्म वाले खिलौने भी बिजनेस खड़ा कर सकते हैं

Hindi News Opinion Raghuraman Column: Diabetes & Autism Toys Create Business Opportunities 5 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु वो दिन याद करें, जब बच्चे रसोई के सामान से खेलते थे, क्योंकि गिलास, प्लेट और चूल्हे जैसी छोटी एक्सेसरीज उन्हें असल जिंदगी की ऐसी परिस्थितियों से परिचित कराती थीं- जिनका सामना उन्हें जीवन … Read more

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: सामने वाले की आस्था से जोड़कर अपने कार्य करें

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  सामने वाले की आस्था से जोड़कर अपने कार्य करें

हम कोई अच्छा काम करें और फिर उसी काम को बार-बार और अच्छे से करते जाएं, इसके पीछे दो बातें काम करती हैं। एक तो उसमें हमें लाभ दिख रहा हो या हमारी लगन गहरी हो। आजकल कोई भी आपके काम को पसंद करे, तो उसके पीछे सामने वाले की रुचि के अलावा एक बात … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: जब प्रतिस्पर्धी आपको हरा दे तो उससे हाथ मिलाना ‘अक्लमंदी’ है

एन. रघुरामन का कॉलम:  जब प्रतिस्पर्धी आपको हरा दे तो उससे हाथ मिलाना ‘अक्लमंदी’ है

‘सर, मेरे पास एयरपोर्ट परिसर की कुछ दुकानें लीज पर हैं। एयरपोर्ट के इस अत्याधुनिक ट्रैवलर्स सीटिंग एरिया में लेदर प्रोडक्ट्स का एक भी एग्जीबिटर नहीं है। क्या आप मुझे अपने किसी लेदर मैन्युफैक्चरर दोस्त से मिलवा सकते हैं, ताकि मैं उनसे हाथ मिलाकर एयरपोर्ट पर ऐसा आउटलेट शुरू कर सकूं?’ मित्र सुधांशु की फोन … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: कभी सोचा है कि रिटायरमेंट के बाद कैसे दिखेंगे, आपकी अहमियत क्या होगी?

एन. रघुरामन का कॉलम:  कभी सोचा है कि रिटायरमेंट के बाद कैसे दिखेंगे, आपकी अहमियत क्या होगी?

मैंने कल उन्हें फोन किया था। फोन नहीं उठा। तभी मुझे याद आया कि रविवार के दिन उनसे बात करना आसान नहीं होता। मैं हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के प्रोफेशनल केवी साइमन को जानता हूं, जो 35 साल से ज्यादा समय तक भारत में अमेरिकन होटल-मोटल एसोसिएशन और कई अमेरिकन हॉस्पिटैलिटी एजुकेटर्स के प्रतिनिधि रहे हैं। वे … Read more

एन. रघुरामन का कॉलम: कम पढ़ी-लिखी नानी-दादी और मां पैसे को लेकर इतनी समझदार कैसे थीं?

एन. रघुरामन का कॉलम:  कम पढ़ी-लिखी नानी-दादी और मां पैसे को लेकर इतनी समझदार कैसे थीं?

मुझे आज भी याद है कि कैसे मेरी नानी उड़द दाल के कंटेनर में कुछ ‘चवन्नी’, तुअर दाल कंटेनर के नीचे ‘अठन्नी’ और चावल के डिब्बे में पांच, तीन, दो और एक पैसे के छोटे सिक्के रखती थीं। एक रुपए का सिक्का अकसर पल्लू की गांठ में बांधती थीं। अगर एसएसएलसी परीक्षा की दो रुपए … Read more