एन. रघुरामन का कॉलम: प्रकृति से जुड़ने पर हमारा खुद से संबंध बेहतर होता है

एन. रघुरामन का कॉलम:  प्रकृति से जुड़ने पर हमारा खुद से संबंध बेहतर होता है

“यह मेरा बेटा है, और मैं इसे आपकी देखरेख में छोड़ रही हूं, इसका ख्याल रखिएगा।’ मेरी मां इसी तरह से मेरा, हमारे बचपन के घर के बाहर खड़े उस बड़े-से गूलर के पेड़ से परिचय कराती थीं। वे मुझे उसकी दो मजबूत शाखाओं से बंधे साड़ी के एक झूले में लिटाया करती थीं। पेड़ … Read more