एन. रघुरामन का कॉलम: कला में डूबे रहें, ये आपकी उम्र बढ़ने की रफ्तार घटाएगा
क्या आपको दादाजी-नानाजी का दौर याद है? वे हर शाम कहां जाते थे- किसी मंदिर में, स्कूल या सामुदायिक सांस्कृतिक मीटिंग में। हमारी दादी-नानी अकसर रसोई में कहती रहती थीं- ‘पता नहीं उन जगहों पर ऐसा क्या है कि दिनभर के काम से लौटने के बाद 15 मिनट भी घर नहीं रुकते।’ दूसरों के बारे … Read more