एन. रघुरामन का कॉलम: ‘प्लेटफॉर्म इकोनॉमी’ हमारे रोजगार मॉडल को बदल रही है


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9 घंटे पहले

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एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु

चीन के झेजियांग प्रांत के वेनझोउ में रहने वाले लेन लू की नई शादी हुई थी और वे कुछ अतिरिक्त कमाई तलाश रहे थे। तभी उन्हें ‘शियानयू’ (चीनी भाषा में अनुपयोगी मछली) नाम की एक वेबसाइट का पता चला। यह चीन का सबसे बड़ा कंज्यूमर-टु-कंज्यूमर सेकंड हैंड मार्केटप्लेस है।

अलीबाबा ग्रुप का यह प्लेटफॉर्म मुख्यत: एक एप के तौर पर संचालित होता है, जो ताओबाओ और अलीपे जैसे पेमेंट एप्स से लिंक्ड है। यूजर्स इस पर कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर दुर्लभ कलेक्टर आइटम जैसी पुरानी चीजें खरीद और बेच सकते हैं। लू ने अनायास इस पर एक लिस्ट पोस्ट कर दी और फिर जो हुआ, उसने उन्हें चौंका दिया।

देशभर से बहुत लोगों ने उनसे संपर्क किया। इसी दौरान उनका एक हजार युआन का फिलिप्स इलेक्ट्रिक टूथब्रश खराब हो गया। उसे बेचकर नया लेने के बजाय उन्होंने उसे खोलकर देखा और लगा कि इसे ठीक करना आसान है। इसी पल ने उनका नजरिया बदल दिया। उन्होंने औपचारिक रूप से खुद को शियानयू पर ‘स्मॉल एप्लायंस रिपेयर’ सेवा के रूप में लिस्ट कर दिया।

महज एक स्मार्टफोन और चीजें ठीक करने की इच्छा- बस उनका स्टोर खुल गया, वो भी बिना किसी डिपॉजिट और कर्मचारियों के। गैजेट्स के साथ छेड़छाड़ के शौकीन लू ने मांग आधारित गिग जॉब शुरू कर दी। उन्हें यकीन नहीं हुआ कि इससे सालाना 2 लाख युआन (करीब 27,80,650 रुपए) से ज्यादा कमाई हो सकती है। घर में खराब हुई हर चीज अब उनके पास आने लगी।

उन्होंने काम दो हिस्सों में बांट लिया। पहले, वो वृद्धाश्रम में कंसल्टेंट की सेवा देते थे और फिर घर पर रात दो बजे तक काम करना उनकी दिनचर्या बन गया। इसके बाद बड़े बदलाव हुए। इस साइड बिजनेस ने उनके करियर को लेकर परिजनों का नजरिया बदल दिया। उनके पैरेंट्स पहले स्थायी नौकरी के पक्ष में थे, लेकिन फिर बदल गए। पिता को लगता है कि बेटा शानदार काम कर रहा है और उसकी खूब डिमांड है।

अंतत: लू को भी लगा कि उन्हें परिवार को अपनी कीमत दिखाने का जरिया मिल गया। और जब भी वे कोई चीज सुधारते हैं तो व्यक्तिगत तौर पर उन्हें उपलब्धि का एहसास होता है और बोरियत नहीं होती। इससे भी बढ़कर, आज वे और उनका परिवार इस काम को दार्शनिक नजरिए से देखते हैं। उन्हें लगता है कि लू का काम ‘डिस्पोजेबल कंजम्पशन’ का जवाब है।

यानी, जिन डिवाइसेज को लोग फेंक देते, उनकी उम्र बढ़ाकर वे पृथ्वी को बचा रहे हैं। मसलन, एक वॉटर फ्लॉसर, जो कुछ युआन में रिपेयर होकर कई साल चल सकता है। यह सिर्फ लू या उनके जैसे चंद लोगों की कहानी नहीं, बल्कि यह उस उभरते ट्रेंड को दिखाता है कि युवा रोजगार के अवसरों को किस नजरिये से देखते हैं।

युवाओं द्वारा रोजगार अवसरों को प्राथमिकता देने के तरीकों की पड़ताल करने वाली ‘चाइना न्यू एम्प्लॉयमेंट रिसर्च सेंटर’ की ताजा रिपोर्ट भी कहती है कि चीन के युवा स्थायी और दीर्घकालीन नौकरियों के बजाय ‘विविध भूमिकाओं और पहचान’ वाले लचीले मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं। तो अब सवाल है कि लोग सेकंड हैंड सामान क्यों खरीदेंगे?

इसकी वजह है कि लोगों के खर्च करने का तरीका अब महज चीजें खरीदने से हटकर अनुभव लेने और व्यक्तिगत विकास की ओर बढ़ रहा है। इसी से वो डिजिटल सेवाएं पनपी हैं, जो उसी सामान को आधी कीमत पर देती हैं।

कल्पना कीजिए कि आप जा रहे हैं और सामने से गांव के चाचा दातुन के बदले इलेक्ट्रिक टूथब्रश लेकर आ रहे हैं। वे कहते हैं कि ‘बेटा रुक जावा, ब्रश को बंद कर दूं’, फिर वे जवाब देने से पहले ब्रश स्विच-ऑफ करते हैं। लेकिन, जिस दिन ऐसा होगा, तब तक हमारे युवा टास्क-बेस्ड रोजगार मॉडल का फायदा उठाने में बहुत लेट हो चुके होंगे।

फंडा यह है कि युवाओं में उभरती गिग वर्क कल्चर और बढ़ती प्लेटफॉर्म इकॉनोमी आपस में मिलकर उस तरीके को बदल रही हैं, जिससे पहले युवा रोजगार बाजार में प्रवेश करते थे। हमारे युवाओं को दुनिया के कुछ हिस्सों में सामने आ रहे इस बदलाव के दौर से चूकना नहीं चाहिए।

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