एन. रघुरामन का कॉलम:  खुद को अनदेखा महसूस करते बच्चे की मदद करें और परिणाम देखें

एन. रघुरामन का कॉलम: खुद को अनदेखा महसूस करते बच्चे की मदद करें और परिणाम देखें


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3 घंटे पहले

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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

69 साल की हेलेन स्कूल क्रॉसिंग गार्ड के तौर पर पार्ट-टाइम काम करती थीं। वे सुबह 7.45 से दोपहर 3 बजे के बीच ट्रैफिक रोककर बच्चों को सुरक्षित सड़क पार करवातीं। एक दिन उन्होंने 7 साल के टॉमी को देखा, जो हमेशा सबसे आखिर में सड़क पार करता था। वह तब तक इंतजार करता, जब तक कि बाकी बच्चे चले नहीं जाते। फिर वह ऐसे दौड़ लगाता, मानो कोई उसका पीछा कर रहा हो।

एक बार हेलेन ने उसे रोककर पूछा- “टॉमी, तुम हमेशा सबके चले जाने का इंतजार क्यों करते हो?’ टॉमी ने कहा- “दोस्त कहते हैं मैं बहुत धीमा हूं। वे मेरे साथ नहीं चलना चाहते।’ हेलेन को बुरा लगा। उन्होंने कहा- “मुझे तो लगता है कि तुम्हारी स्पीड बिल्कुल सही है।

कैसा हो अगर आज से तुम और मैं साथ में सड़क क्रॉस करें?’ टॉमी का चेहरा खिल उठा। तब से वो हर दिन हेलेन का इंतजार करता और वे साथ में ही सड़क पार करते। हेलेन उससे उसके दिन के बारे में पूछतीं। वह डायनासोर के बारे में बताता और एस्ट्रोनॉट बनने के अपने सपने शेयर करता।

फिर एक हफ्ते तक टॉमी दिखाई नहीं दिया। हेलेन ने उसकी टीचर से पूछा। उन्होंने बताया कि टॉमी हॉस्पिटल में है। और फिर धीरे से कहा- “ल्यूकेमिया। उसकी हालत ठीक नहीं है, हेलेन।’ स्कूल के बाद वे हॉस्पिटल गईं। उसका कमरा ढूंढा। उसकी मां वहां थीं।

“मिस हेलेन, आप यहां!’- टॉमी अपने बिस्तर से ही कह बैठा। हेलेन ने उसका हाथ पकड़ा। “हां, मैं आई हूं, दोस्त।’ फिर उन्होंने उसके कानों में फुसफुसाते हुए कहा- “तुम और मैं- हम अभी भी साथ-साथ सड़क पार करते हैं। बस रास्ते अलग-अलग हैं।’ कमरे के बाहर, उसकी मां फूट पड़ीं। “वो लगातार आपके बारे में बात करता है। कहता है कि आप उसकी सबसे अच्छी दोस्त हो।’ उसके बाद हेलेन रोज टॉमी से मिलने जातीं। उसे किताबें पढ़कर सुनातीं, कहानियां सुनातीं।

तीन महीने बाद टॉमी ठीक होने लगा। डॉक्टरों ने इसे अद्भुत बताया। जब वो स्कूल वापस आया, तो पूरा क्रॉसिंग-रोड खुशी से गूंज उठा। जो दोस्त पहले उसे इग्नोर करते थे, वे ही अब अचानक उसके साथ चलना चाहते थे। लेकिन पता है टॉमी ने क्या किया? उसने हेलेन का इंतजार किया। हमेशा की तरह। “हम हमेशा साथ में सड़क पार करते हैं, मिस हेलेन, यही हमारा नियम है।’ अबकी हेलेन फूट पड़ीं। लेकिन कहानी तो असल में यहीं से शुरू होती है।

अब टॉमी की मां जेनिफर ने भी क्रॉसिंग पर वॉलंटियरिंग करना शुरू कर दिया। उन्होंने हेलेन से कहा, “आपने मेरे बेटे को तब हौसला ​दिया, जब मैं भी वैसा नहीं कर पाई थी। अब मैं आपकी मदद करना चाहती हूं ताकि हम दूसरे ऐसे बच्चों को देखें, जिन्हें इसकी जरूरत है।’

दोनों ने साथ में चीजों को नोटिस करना शुरू किया। फटे जूतों वाली कोई लड़की; वह लड़का जिसके पास कभी लंच के पैसे नहीं होते थे या वह बच्चा जिसके शरीर पर चोटों के निशान थे। उन्होंने एक प्रोग्राम शुरू किया- “द क्रॉसिंग कनेक्शन’।

इसके लिए कई लोगों ने जूते, कोट, स्कूल का सामान और खाने के डिब्बे दान में दिए। वे बस बच्चों से इतना ही पूछते कि कुछ चाहिए? और फिर उन्हें उनकी जरूरत का सामान दे देते। बात तेजी से फैली। अब किसी डेंटिस्ट ने मुफ्त चेकअप का प्रस्ताव रखा, नाइयों ने बिना पैसे लिए बाल काटे और मोचियों ने जूतों की मरम्मत की।

फिर एक दिन शहर ने क्रॉसिंग गार्ड्स को इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल से बदलने की कोशिश की। बजट में कटौती के लिए। 48 घंटों के भीतर कई लोगों ने याचिका पर दस्तखत किए और बच्चों ने चिट्ठियां लिखीं। टॉमी- जो अब 11 साल का है- ने सिटी काउंसिल की मीटिंग में कांपती हुई आवाज में कहा- “मिस हेलेन सिर्फ कारें नहीं रोकतीं, वे बच्चों को अनदेखा महसूस करने से भी रोकती हैं।

जब मुझे कैंसर था तो उन्होंने मुझे हार मानने से रोका। वे महज एक क्रॉसिंग गार्ड नहीं हैं। वे वो इंसान हैं, जिन्होंने मुझे सिखाया कि मैं मायने रखता हूं।’ तब कमरे में किसी की आंखें सूखी नहीं थीं। उन्होंने सभी क्रॉसिंग गार्ड्स को रहने दिया। आज “द क्रॉसिंग कनेक्शन’ अमेरिका के एक ​जिले के 23 स्कूलों में संचा​लित होता है। हेलेन रिटायर हो चुकी हैं, लेकिन उस क्रॉसिंग का नाम आज “हेलेन क्रॉसिंग’ है।

फंडा यह है कि जब कोई बच्चा खुद को अनदेखा महसूस करता है और आप उसकी मदद करते हैं तो आप दुनिया को किसी सितारे की तरह दिखाई देने लगते हैं। एक बार कोशिश करें।

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