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- Pandit Vijay Shankar Mehta Column: Focus On Speed & Dynamism In Life
5 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
जीवन में कुछ निर्णय बिना गलती किए तुरंत लिए जाने चाहिए। विलम्ब कुछ मौकों पर बहुत घातक साबित हो सकता है। जैसे युद्ध में गलती और विलम्ब सीधे मौत है। कितना सोचें, कब तक सोचें, कितना करें और कब करें- यह अक्ल हर महान योद्धा को थी और जो हमारे भीतर भी उतरनी चाहिए- क्योंकि अब जीवन धीरे-धीरे और कठिनता की ओर चल रहा है।
कभी-कभी तो लगता है कि हर गतिविधि एक युद्ध बन गई है। नेपोलियन से जब पूछा गया कि आप एक पंक्ति में अपनी विशेषता बताएं तो उसने कहा था मैं सोचने और करने में पर्याप्त समय लेता हूं। बिना सोचे कोई काम करता नहीं और जब करने भिड़ जाता हूं तो फिर सोचता नहीं। इसलिए हमें अपनी गति और गतिशीलता पर जोर देना चाहिए।
आज के दौर में सोचने की प्रक्रिया भी मशीनों के गलियारे से निकलती है। चिंतन को मानवीय स्पर्श कठिनाई से मिल रहा है। इसीलिए जो कोई भी कुछ करता दिख रहा है, वह तनावग्रस्त भी होता जा रहा है। जबकि सफलता शांति के साथ आनी चाहिए।



