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भोपाल/नई दिल्ली4 मिनट पहले
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जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ की बेंच ने फैसला सुनाया। File
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश के न्यायिक अधिकारी निर्भय सिंह सुलिया की बर्खास्तगी रद्द कर दी।
कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा- सिर्फ गलत या त्रुटिपूर्ण न्यायिक आदेश पारित करने के आधार पर किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती। दरअसल सुलिया को वर्ष 2014 में सेवा से हटाया गया था। तब वे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश खरगोन के पद पर कार्यरत थे।
सुलिया पर भ्रष्टाचार और आबकारी अधिनियम से जुड़े मामलों में जमानत याचिकाओं पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप था। कहा गया था कि 50 बल्क लीटर से अधिक शराब की जब्ती वाले कुछ मामलों में उन्होंने जमानत दी, जबकि ऐसे अन्य मामलों में उसी आधार पर जमानत खारिज की। विभागीय जांच के बाद हाई कोर्ट ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था।
अब जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने आदेश दिया कि 27 साल तक बेदाग सेवा देने वाले जज को बिना ड्यू प्रोसेस अपनाए हटाया गया, जो न्यायसंगत नहीं है।

कोर्ट ने कहा- जजमेंट एरर और भ्रष्टाचार को एक नहीं मान सकते
- बिना सोचे कार्रवाई से बचने की सलाहसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई में हाई कोर्ट को अत्यधिक सतर्क रहना चाहिए। केवल गलत आदेश या निर्णय की त्रुटि पर यांत्रिक कार्रवाई न्यायिक स्वतंत्रता और विवेकाधिकार को कमजोर करती है।
- प्रशासनिक डर व जमानत आवेदनों की बढ़ोतरीसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई के भय से निचली अदालतें कई योग्य मामलों में जमानत देने से बचती हैं। इससे जमानत याचिकाएं उच्च अदालतों तक पहुंचती हैं। हाई कोर्ट को जिला न्यायाधीशों की दबावपूर्ण कार्य-परिस्थितियों को समझते हुए, बिना ठोस आधार कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।
- झूठी शिकायतों पर सख्तीपीठ ने न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ झूठी व निराधार शिकायतों पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि ऐसे शिकायतकर्ताओं पर सख्त कार्रवाई हो। यदि शिकायतकर्ता वकील हो, तो मामला बार काउंसिल को भेजा जाए।
- भ्रष्टाचार पर स्पष्ट संदेशसुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह फैसला भ्रष्टाचार को संरक्षण नहीं देता। यदि किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ कदाचार प्रथम दृष्टया साबित होता है, तो तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार असहनीय है।
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