कंचनप्रीत कौर को कोर्ट ने रिहा कर दिया है। कोर्ट ने देर रात सुनवाई के बाद गिरफ्तारी पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए यह बड़ा फैसला सुनाया। कंचनप्रीत, जो तरनतारन उपचुनाव में अकाली उम्मीदवार प्रिंसिपल सुखविंदर कौर रंधावा की बेटी हैं, की गिरफ्तारी पर अदालत न
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हाईकोर्ट ने कहा था कि जब कोई व्यक्ति स्वयं जांच में शामिल हो रहा हो, तो उसे अचानक गिरफ्तार कैसे किया जा सकता है? अदालत ने इस कार्रवाई को पारदर्शिता के खिलाफ बताया और तुरंत कंचनप्रीत की कस्टडी पुलिस से लेकर जज को सौंप दी। साथ ही आदेश दिया गया कि जब तक उनके वकील अदालत में नहीं पहुंचते, तब तक उन्हें रिमांड के लिए पेश न किया जाए।
इसके बाद पुलिस कंचनप्रीत को तरनतारन कोर्ट लेकर पहुंची। हाईकोर्ट के निर्देश साफ थे—उनके वकील अर्शदीप कलेर और दमनप्रीत सोबती के पहुंचने से पहले कोई कार्यवाही शुरू नहीं होगी।
तरनतारन कोर्ट में रात 8 बजे सुनवाई की शुरुआत हुई और दोनों पक्षों के बीच कानूनी बहस का दौर शुरू हो गया। रात 10 बजे बहस और तेज हो गई, जिसमें बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया, जबकि पुलिस ने अपने कदम को सही ठहराने का प्रयास किया।
रात भर चलती सुनवाई के बीच समर्थक अदालत के बाहर इंतजार में खड़े रहे। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लाइव अपडेट्स शेयर किए, और इस केस ने राजनीतिक हलचल भी तेज कर दी।
आखिरकार, लंबी कानूनी बहस के बाद, सुबह 4 बजे अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया—कंचनप्रीत कौर को रिहा करने का आदेश दिया गया। फैसले के साथ ही तरनतारन में समर्थकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई। इसे कई नेताओं और नागरिकों ने न्याय की जीत करार दिया।



