भागीरथपुरा में हुई दूषित पेयजल त्रासदी के बाद जिले के इंदौर, महू, देपालपुर और सांवेर ब्लॉक में पानी के 566 सैंपलों की जांच हुई है। 1 से 28 जनवरी तक लिए गए इन सैंपलों में 51 फेल हुए हैं। यानी कुल सैंपल से 9 प्रतिशत सोर्स ऐसे हैं, जिनका पानी पीने योग्य नहीं मिला। खास बात यह है कि भागीरथपुरा मामले के बाद 13 जनवरी से हर मंगलवार को जिले में जलसुनवाई हो रही है। इसमें दूषित पानी सहित अन्य दिक्कतों की अब तक 1851 शिकायतें आई हैं। देपालपुर की स्थिति सबसे खराब
सैंपलों की जांच में सबसे ज्यादा दूषित पानी देपालपुर ब्लॉक में 32% मिला है। सांवेर में 11.49%, महू में 5.77% और इंदौर ब्लॉक में यह 4.14% रहा। आंकड़ों के मुताबिक जिले में जो सर्वे हुआ है, उसमें 42 नल-जल योजनाएं बंद हैं। इसमें राऊ विधानसभा क्षेत्र में 4, सांवेर में 20, देपालपुर में 8, महू में 10 योजनाएं शामिल हैं। 20 साल पुरानी लाइनें सुधारेंगे
प्रदेश भर में स्वच्छ जल अभियान का पहला चरण चल रहा है जो 28 फरवरी तक चलेगा। इसमें सर्वे सहित जल स्रोत की पहचान करना है। 1 मार्च से दूसरा चरण शुरू होगा जो 31 मई तक चलेगा। एसओपी के तहत 20 साल से अधिक पुरानी लाइनों को चिह्नित कर 48 घंटे में लीकेज की मरम्मत करेंगे। स्वच्छ जल अभियान में इन पर ध्यान
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इंदौर में चार ब्लॉक में हुआ पानी का सर्वे: 9% जल स्रोत दूषित, 20 दिन में गंदे पानी की 1851 शिकायतें आईं – Indore News
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