विराग गुप्ता का कॉलम:  वॉट्सएप की डेटा चोरी पर हम कब सख्त रवैया अपनाएंगे?

विराग गुप्ता का कॉलम: वॉट्सएप की डेटा चोरी पर हम कब सख्त रवैया अपनाएंगे?


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6 घंटे पहले

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विराग गुप्ता सुप्रीम कोर्ट के वकील

सीजेआई सूर्यकांत ने वॉट्सएप को फटकार लगाते हुए कहा है कि डेटा चोरी से ग्राहकों को टारगेट करके विज्ञापन भेजे जा रहे हैं। तीन जजों की पीठ ने कहा कि लोगों के निजी डेटा के व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकने का जब तक हलफनामा नहीं मिलेगा, तब तक वॉट्सएप की अपील पर सुनवाई नहीं होगी। वॉट्सएप मामले पर सुनवाई और फैसला डिजिटल भारत की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल सकता है। इससे जुड़े 6 पहलुओं को समझना हमारे लिए जरूरी है।

1. भारत में मेटा की तीन कंपनियों फेसबुक के 58 करोड़, इंस्टाग्राम के 48 करोड़ और वॉट्सएप के लगभग 85 करोड़ ग्राहक हैं। देश में 92% कारोबारी और 89% स्मार्टफोन यूजर्स वॉट्सएप्प का इस्तेमाल कर रहे हैं। 2016 के बाद मेटा की तीनों कंपनियां करोड़ों ग्राहकों के डेटा को परस्पर साझा करने के साथ व्यावसायिक इस्तेमाल से खासा मुनाफा कमा रही हैं। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने 2021-22 में दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दिया था कि वॉट्सएप मामले पर सुनवाई कॉम्पीटिशन कानून के अनुसार हो रही है, जिसका संविधान के अनुच्छेद 21 और निजता के अधिकार से कोई वास्ता नहीं है।

2. सीसीआई और केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि निःशुल्क सेवा देने वाले वॉट्सएप की कमाई विज्ञापन से होती है और यूजर्स ही उनका प्रोडक्ट हैं। अमेरिका में दायर क्लास एक्शन स्यूट मुकदमे के अनुसार वॉट्सएप में चैट और डेटा सुरक्षित नहीं होने की वजह से टारगेटेड विज्ञापन आते हैं। भारत का डेटा विदेश ले जाने की वजह से पब्जी और टिकटॉक जैसे कई चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा था। अमेरिकी टेक कंपनियां हमारे डेटा को खुलेआम देश-विदेश में बेच रही हैं, उसके बावजूद केंद्र सरकार संसद से 2023 में पारित डेटा सुरक्षा कानून को लागू नहीं कर रही।

3. मेटा ने 2025 में दुनिया में 200 अरब डॉलर की आमदनी की थी। इसमें से लगभग 196 अरब डॉलर की आमदनी सिर्फ विज्ञापन से थी। मेटा की प्रति ग्राहक औसत आमदनी 57 डॉलर है। यूजर्स की संख्या के अनुसार वॉट्सएप को भारत से लगभग चार लाख करोड़ रु. की आमदनी होती है। लेकिन दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजार भारत में मेटा इंडिया ने पिछले साल सिर्फ 3792 करोड़ की आमदनी दिखाई।

भारत में लगभग 44 लाख करोड़ की आमदनी टैक्स से होती है, जो जीडीपी की 11.2% है। जबकि विकसित देशों के संगठन ओईसीडी में जीडीपी का 34% टैक्स आमदनी से आता है। मेटा से डेटा कारोबार पर जीएसटी और अन्य टैक्सों की वसूली हो तो बजट घाटा कम होने के साथ स्वदेशी अर्थव्यवस्था का विकास होगा।

4. बेशुमार डेटा के दम पर मेटा व्यापार, डिजिटल विज्ञापन, यूपीआई, पेमेंट बैंकिंग और एआई के क्षेत्र में भी वर्चस्व स्थापित कर रही है। वॉट्सएप से 60 फीसदी से ज्यादा फ्री वॉइस कॉल की वजह से टेलीकॉम कंपनियों की माली हालत बिगड़ रही है। वॉट्सएप कॉल में केवाईसी नहीं होने से साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। लेकिन मोबाइल कंपनियों की अनेक मांगों और संसदीय समिति की रिपोर्ट के बावजूद वॉट्सएप को टेलीकॉम कानून 2023 के दायरे में नहीं लाया गया।

5. मेटा की कंपनियों पर यूरोप में जीडीआर के सख्त डेटा सुरक्षा कानून के उल्लंघन पर 12000 करोड़, डिजिटल मार्केटिंग एक्ट के उल्लंघन पर 2000 करोड़ और नाबालिग बच्चों के डेटा के गलत इस्तेमाल पर 4000 करोड़ रु. का जुर्मानालगा था। अमेरिका में फेडरल ट्रेड कमीशन ने कैम्ब्रिज मामले में 2019 में मेटा पर 5 अरब डॉलर यानी 50 हजार करोड़ का जुर्माना लगाया था लेकिन भारत में सीसीआई ने मेटा पर 213 करोड़ का मामूली जुर्माना लगाया, जिसे वापस हासिल करने पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है।

6. जजों ने कहा है कि नियमों का पालन नहीं करने पर वॉट्सएप को भारत से चले जाना चाहिए। लेकिन मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भरता के दावों के बावजूद जनता, कारोबार, अदालतें और सरकार पूरी तरह से वॉट्सएप पर निर्भर हैं। डेटा चोरी रोकने और कारोबार पर पूरा टैक्स वसूलने के लिए सुप्रीम कोर्ट से सख्त आदेश पारित हों तो संविधान के शासन की शान बढ़ने के साथ साइबर अपराधों में भारी कमी आएगी।

जजों ने कहा है कि नियमों का पालन नहीं करने पर वॉट्सएप को भारत से चले जाना चाहिए। लेकिन मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भरता के दावों के बावजूद जनता, कारोबार, अदालतें और सरकार वॉट्सएप पर निर्भर हैं।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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