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नई दिल्ली2 मिनट पहले
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3 जनवरी को अमेरिका ने हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है। वेनेजुएला कभी दुनिया के सबसे अमीर देशों में शामिल था। आज कंगाल हो चुका है।
यह कहानी एक ऐसे देश की है जिसके पास सऊदी अरब से भी ज्यादा तेल है, लेकिन पिछले एक दशक में उसने अपनी 80% जीडीपी गंवा दी। कभी दुनिया के सबसे अमीर देशों में शामिल इस देश ने अपनी दौलत का ऐसा मिसमैनेजमेंट किया कि आज वहां के लोग देश छोड़ रहे हैं।
बात हो रही है ‘वेनेजुएला’ की, जिस पर शनिवार 3 जनवरी को अमेरिका ने हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है। हजारों किलोमीटर दूर दक्षिण अमेरिका में हो रही इस हलचल का असर भारत में आम आदमी पर भी पड़ सकता है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ये तस्वीर पोस्ट की है। इस फोटो में निकोलस मादुरो अमेरिकी हिरासत में दिखाई दे रहे हैं।
इस रिपोर्ट में वेनेजुएला की बर्बादी की इनसाइड स्टोरी और भारत पर इसका असर जानेंगे…
1950 का दशक: जब चमक रही थी वेनेजुएला की किस्मत
1950 के दशक में जब आधी दुनिया दूसरे विश्व युद्ध के नुकसान से उबर रही थी, तब वेनेजुएला की किस्मत जमीन के नीचे से निकलने वाले काले सोने यानी तेल ने बदल दी थी।
1952 में वेनेजुएला दुनिया का चौथा सबसे अमीर देश बन चुका था। राजधानी कराकस की सड़कों पर उस समय लग्जरी कारें दौड़ती थीं और गगनचुंबी इमारतें खड़ी थीं।
1960 के दशक तक वेनेजुएला सिर्फ तेल बेचने वाला देश नहीं रहा। वेनेजुएला की ही पहल पर सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों ने हाथ मिलाया और ‘ओपेक’ की नींव रखी।
1970 के दशक में जब पूरी दुनिया में तेल संकट आया और कीमतें आसमान छूने लगीं, तो वेनेजुएला के घरों में डॉलर की बारिश होने लगी। उस दौर के किस्से आज भी मशहूर हैं…
- लोग वीकेंड पर शॉपिंग करने के लिए सीधे मियामी उड़कर जाते थे। वेनेजुएला दुनिया के सबसे महंगे स्कॉच व्हिस्की और शैंपेन के सबसे बड़े खरीदार में से एक था।
- जनता को लगने लगा था कि अब मेहनत करने की जरूरत नहीं है। इसकी प्रति व्यक्ति आय स्पेन, ग्रीस और इजराइल जैसे विकसित देशों से भी कहीं ज्यादा थी।
- 1976 में सरकार ने तेल इंडस्ट्री का राष्ट्रीयकरण कर दिया और सरकारी कंपनी PDVSA बनाई। यह दुनिया की सबसे मुनाफे वाली तेल कंपनियों में से एक थी।

1960 के दशक की शुरुआत में, वेनेजुएला को एक अमीर देश माना जाता था। 1958 में लोकतंत्र की वापसी के बाद, राष्ट्र विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा था।

बर्बादी की शुरुआत: 3 मुख्य वजहों से डूबी इकोनॉमी
यह इतिहास में बिना किसी युद्ध के किसी देश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा कोलैप्स है। पिछले एक दशक में इस देश ने वह सब खो दिया जो उसने 70 सालों में कमाया था।
- डच डिजीज: वेनेजुएला ने अपनी पूरी ताकत सिर्फ तेल निकालने में लगा दी। उन्होंने खेती, फैक्ट्री और दूसरे बिजनेस पर ध्यान ही नहीं दिया। नतीजा ये हुआ कि सुई से लेकर खाने तक के लिए वे दूसरे देशों पर निर्भर हो गए और तेल के बदले सामान खरीदने लगे।
- पॉपुलिस्ट नीतियां: 1999 के बाद सरकार ने देश के भविष्य के लिए निवेश करने के बजाय मुफ्त योजनाओं में पैसा उड़ा दिया। जब तक तेल महंगा था, सब ठीक रहा, लेकिन जैसे ही तेल की कीमतें गिरीं, सरकार के पास सैलरी देने तक के पैसे नहीं बचे।
- भ्रष्टाचार और ब्रेन ड्रेन: सरकारी तेल कंपनी (PDVSA) में काबिल इंजीनियरों को हटाकर राजनीतिक वफादारों को भर दिया गया। इससे तेल उत्पादन की तकनीक खराब हो गई और देश के 60 लाख से ज्यादा पढ़े-लिखे लोग (डॉक्टर, इंजीनियर) देश छोड़कर चले गए।
आज की स्थिति: 80% GDP खत्म, महंगाई आसमान पर
2018 के आते-आते यहां महंगाई की रफ्तार 1,30,000% के पार चली गई। वहां के लोग एक दर्जन अंडे खरीदने के लिए भी नोटों से भरा झोला ले जाने को मजबूर थे। नोट गिने नहीं जाते थे, बल्कि तराजू के एक पलड़े पर सामान और दूसरे पर नोटों की गड्डियां रखी जाती थीं।
1990 के दशक के आखिर में जो देश रोजाना 35 लाख बैरल तेल निकालकर दुनिया पर राज करता था, वह आज 2026 की शुरुआत तक बमुश्किल 8 से 11 लाख बैरल पर सिमट गया है। सरकारी तेल कंपनी मेंटेनेंस के अभाव में सब कबाड़ हो गई। पेट्रोल विदेशों से मंगाया जा रहा है।
वेनेजुएला अपनी 80% जीडीपी गंवा चुका है। यानी, अगर 2012 में देश की अर्थव्यवस्था 100 रुपए की थी, तो आज वह सिर्फ 20 रुपए की बची है। इस बर्बादी का सबसे डरावना चेहरा बनकर उभरी वहां की महंगाई, जिसे अर्थशास्त्र की भाषा में ‘हाइपरइन्फ्लेशन’ कहते हैं।
- वेनेजुएला की GDP 2012 में 372.59 बिलियन डॉलर के उच्चतम स्तर पर थी।
- स्थिति बिगड़ती गई और 2020 में GDP गिरकर 43.79 बिलियन डॉलर रह गई।
- अभी इसमें थोड़ा सुधार आया है और ये 101 बिलियन डॉलर के करीब है।

अपने दो महीने के कुपोषित बेटे के साथ महिला। वेनेजुएला के बारक्विसिमेटो के एक क्लिनिक में बच्चे का ब्लड टेस्ट किया जा रहा है। फोटो: 14 अगस्त 2019

वेनेजुएला में हाइपरइन्फ्लेशन का आलम यह था कि लोगों ने विरोध में नोटों को खंभों पर चिपका दिया था। यहां एक दर्जन अंडे खरीदने के लिए भी लोगों को नोटों से भरा झोला लेकर जाना पड़ता था।
आज का संकट: क्या अमेरिका बदल पाएगा किस्मत?
ट्रम्प सरकार का दावा है कि इस सैन्य ऑपरेशन के बाद अब अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में अरबों डॉलर का निवेश करेंगी और वहां के टूटे हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करेंगी। हलांकि, वहां बदलाव आएगा या नहीं यह वहां बनने वाली नई सरकार पर निर्भर करेगा।
यदि वहां अमेरिका समर्थित एक स्थिर व्यवस्था आती है, तो सालों से लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंध हटेंगे और वेनेजुएला का तेल दोबारा बड़ी मात्रा में ग्लोबल मार्केट में आने लगेगा।
इससे न सिर्फ वहां की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटेगी बल्कि भारत जैसे देशों को भी सस्ता कच्चा तेल मिल सकेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा सोशल प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट की गई इस फोटो में वेनेजुएला पर हुए हमले के सैन्य ऑपरेशन्स (कार्यवाही) की झलक दिखाई दे रही है।
भारत पर असर: सस्ता क्रूड ऑयल मिल सकता है
वेनेजुएला भारत से करीब 15 हजार किमी दूर है, लेकिन वहां की सत्ता में हुआ बदलाव भारत के लिए फायदेमंद हो सकता है…
1. पेट्रोल-डीजल: रूस जैसा ‘डिस्काउंट’ मिलने की उम्मीद
भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा भंडार है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से भारत वहां से तेल नहीं खरीद पा रहा था।
- क्या होगा असर: अब जब वहां अमेरिका समर्थित व्यवस्था आएगी, तो प्रतिबंध हटेंगे। भारत को रूस की तरह वेनेजुएला से भी भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल मिल सकता है।
- जेब पर राहत: अगर वेनेजुएला का तेल बड़ी मात्रा में भारतीय रिफाइनरियों में आने लगेगा, तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती संभव है।
2. रिलायंस और ONGC को भी फायदे की उम्मीद
भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास ऐसी रिफाइनरी है जो वेनेजुएला के ‘भारी और गाढ़े’ तेल को साफ करने के लिए दुनिया में बेस्ट मानी जाती है।
प्रतिबंधों की वजह से रिलायंस को वेनेजुएला से तेल लेना बंद करना पड़ा था। अब रिलायंस और सरकारी कंपनी ONGC (जिसने वेनेजुएला के तेल कुओं में करोड़ों निवेश किए हैं) का अटका हुआ पैसा और बिजनेस वापस शुरू होने की उम्मीद है।



