अलवर में रियासतकालीन परंपरा के तहत गणगौर की शाही सवारी शनिवार शाम 5 बजे से जनानी ड्योढी से निकलेगी। पालकी में प्रतिमाएं महल चौक, मंसा माता मार्ग व सागर मार्ग से होते हुए पुनः जनानी ड्योढ़ी पहुंचेंगी। सवारी को गार्ड ऑफ ऑनर देकर रवाना किया जाता है। एक दिन पहले सिंजारा पर्व पर महिलाओं ने मेहंदी रचाई। शाम को पूजा के बाद गणगौर की प्रतिमाओं को तालाबों और कुओं में विसर्जित जा रहा है। इसी के साथ 3 मार्च से चल रही गणगौर पूजा संपन्न होगी। अलवर में गणगौर पर्व की धूम, 16 दिन तक श्रद्धा हुआ पूजन अलवर शहर में गणगौर का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। शहर के विभिन्न मोहल्लों और घरों में महिलाएं और युवतियां सज-धज पूजन में शामिल हुई। लोकगीतों की गूंज से भक्तिमय माहौल रहा।
मेहताब सिंह का नोहरा क्षेत्र में आयोजित गणगौर पूजन के दौरान बुजुर्ग महिला भोरी देवी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह पर्व लगातार 16 दिनों तक मनाया जाता है। महिलाएं माता गणगौर और भगवान ईशर की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे जीवनसाथी और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
गणगौर पर्व राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जिसे आज भी बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया जा रहा है।
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गणगौर की शाही सवारी जनानी ड्योढी से निकलेगी: घरों में ईशर-गणगौर की पूजा-अर्चना, लोक गीतों से भक्तिमय माहौल – Alwar News
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