सुप्रीम कोर्ट बोला- हम एक देश हैं:  हिंदी बोलने को मजबूर करना, लुंगी का मजाक उड़ाना बर्दाश्त नहीं; केरल के छात्रों से मारपीट मामला

सुप्रीम कोर्ट बोला- हम एक देश हैं: हिंदी बोलने को मजबूर करना, लुंगी का मजाक उड़ाना बर्दाश्त नहीं; केरल के छात्रों से मारपीट मामला


  • Hindi News
  • National
  • Supreme Court Voices Concern Over Targeting Of People For Cultural Differences We Are One Country

नई दिल्ली3 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली में केरल के दो छात्रों से मारपीट की घटना पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा, हम एक देश हैं। हिंदी बोलने को मजबूर करना , लुंगी का मजाक उड़ाना बर्दाश्त नहीं है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली में एक व्यक्ति के साथ हुई उस घटना का जिक्र किया, जिसमें छात्रों को हिंदी बोलने के लिए मजबूर किया गया। पारंपरिक पोशाक लुंगी पहनने पर उनका मजाक उड़ाया गया। यह घटना लाल किले के पास हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को ऐसे सांस्कृतिक और नस्लीय भेदभाव के मामलों को लेकर गंभीर होना चाहिए। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा, देश में सांस्कृतिक और नस्लीय भेदभाव से लोगों को निशाना बनाना दुखद है।

पीड़ित छात्र दिल्ली यूनिवर्सिटी के

दोनों छात्र दिल्ली यूनिवर्सिटी के जाकिर हुसैन कॉलेज के प्रथम वर्ष के छात्र हैं। उन्हें पुलिस और स्थानीय लोगों ने पीटा। कोर्ट 2015 में दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। यह याचिका अरुणाचल प्रदेश के छात्र नीडो तानिया की दिल्ली में मौत के बाद दायर की गई थी। कोर्ट ने तब केंद्र को एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया था। कमेटी को नस्लीय भेदभाव, अत्याचार और हिंसा पर सख्त कार्रवाई करने के अधिकार दिए गए थे। साथ ही, इस तरह मामलों को रोकने के उपाय सुझाने को कहा गया था।

सांस्कृतिक भिन्नता के आधार पर निशाना न बनाएं

मंगलवार को सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा, निगरानी कमेटी बन चुकी है। अब याचिका में कुछ नहीं बचा। याचिकाकर्ता के वकील गैचांगपाउ गांगमेई ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा, पूर्वोत्तर के लोगों के साथ भेदभाव और बहिष्कार की घटनाएं अब भी हो रही हैं। बेंच ने कहा, ‘हमने अखबार में पढ़ा कि दिल्ली में एक केरल निवासी को लुंगी पहनने पर मजाक का सामना करना पड़ा। यह अस्वीकार्य है। हम मिल-जुलकर रहते हैं। सांस्कृतिक भिन्नता के आधार पर निशाना किसी को निशाना नहीं बनाना चाहिए।

केंद्र को दिया था रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश

कोर्ट ने इस याचिका में पहले भी कई आदेश पारित किए हैं। 1 मई 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि 2016 में गठित मॉनिटरिंग कमेटी के कार्यों पर एक अपडेटेड स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जाए। यह कमेटी इसलिए बनाई गई थी, ​ताकि नस्लीय भेदभाव और अपमान की शिकायतों की निगरानी की जा सके।

——————————-

ये खबर भी पढ़ें…

सुप्रीम कोर्ट बोला- मां और सौतेली मां में अंतर गलत:बच्चे के जीवन में भूमिका देखें, एयरफोर्स ने सौतेली मां को पेंशन नहीं दी थी

भारतीय वायुसेना के सौतेली मां को पेंशन लाभ देने से इनकार करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने कहा- पेंशन योजनाओं में ‘मां’ और ‘जैविक मां’ में अंतर नहीं किया जाना चाहिए। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)

Related Post

आज का मौषम
Live Cricket
आज का राशिफल
लाइव शेयर मार्केट