देश के प्रमुख टेक्सटाइल और निटवियर हब लुधियाना की इंडस्ट्री इन दिनों भारी वित्तीय दबाव से गुजर रही है। केंद्र सरकार की संशोधित टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम (ATUFS) के तहत मिलने वाली 250 करोड़ रुपए से ज्यादा की सब्सिडी पिछले कई वर्षों से अटकी हुई है। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि इम्पोर्टेड मशीनरी से जुड़े दस्तावेजों पर आपत्तियां है।
इस देरी का सबसे ज्यादा असर MSME इकाइयों पर पड़ा है, जिन्होंने बैंक लोन लेकर आधुनिक मशीनें खरीदी थीं। सब्सिडी न मिलने से उनकी वर्किंग कैपिटल बुरी तरह प्रभावित हो रही है। 150 से ज्यादा उद्यमियों ने दर्ज कराई शिकायत
टेक्सटाइल मंत्रालय द्वारा दिसंबर 2025 में लॉन्च किए गए i-TUFS पोर्टल पर लुधियाना के 150 से अधिक टेक्सटाइल मिल मालिकों ने अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं। देशभर में अब तक कुल 564 आवेदन पोर्टल पर दाखिल हो चुके हैं, जिससे समस्या की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। 6 साल से फाइलें अटकीं, स्पष्ट जवाब नहीं
निटवियर एंड टेक्सटाइल एसोसिएशन लुधियाना के टेक्निकल कंसल्टेंट सीए राज मित्तल ने मीडिया को बताया कि ATUFS योजना फरवरी 2016 में शुरू हुई थी और 31 मार्च 2022 तक लागू रही। योजना के तहत बैंक लोन पर खरीदी गई इम्पोर्टेड मशीनरी पर सब्सिडी का प्रावधान था। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि बड़ी संख्या में आवेदन टेक्सटाइल कमिश्नर कार्यालय द्वारा तकनीकी कारणों से खारिज कर दिए गए, लेकिन कमियों को स्पष्ट नहीं किया गया। कई फाइलें 6 साल से ज्यादा समय से लंबित हैं, जिससे उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। टेक्सटाइल कमिश्नर से मुलाकात, समाधान का भरोसा
समस्या के समाधान के लिए एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने हाल ही में मुंबई में टेक्सटाइल कमिश्नर वृंदा मनोहर देसाई से मुलाकात की। बैठक में लंबित मामलों, रिजेक्टेड क्लेम्स और प्रक्रियागत अड़चनों को विस्तार से रखा गया। सीए मित्तल के अनुसार कमिश्नर ने उद्योग की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उन्हें जायज माना। जल्द समाधान का आश्वासन
निटवियर क्लब के चेयरमैन विनोद थापर ने मीडिया को बताया कि टेक्सटाइल कमिश्नर ने स्पष्ट और सकारात्मक आश्वासन दिया है कि लंबित ATUFS मामलों का शीघ्र निपटारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पात्र उद्योगों को सब्सिडी दिलाने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। उद्योग को कार्रवाई का इंतजार
उद्योगपतियों को उम्मीद है कि यह आश्वासन जल्द ज़मीन पर उतरेगा, क्योंकि सब्सिडी में देरी से उत्पादन, रोजगार और भविष्य के निवेश पर पहले ही नकारात्मक असर पड़ चुका है। लुधियाना की टेक्सटाइल इंडस्ट्री अब सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी नजरें लगाए बैठी है।
Source link
लुधियाना टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर सब्सिडी संकट: ATUFS के 250 करोड़ से ज्यादा फंसे, MSME इकाइयों पर पड़ रहा असर – Ludhiana News
- Share



