सीवेज टैंक हादसा… पुलिस ने ठेकेदार पर दर्ज किया केस:  रामकृष्ण अस्पताल में बने सीवेज टैंक में हुई थी तीन श्रमिकों की मौत, खुद प्रार्थी बने अफसर; जांच ठेकेदार तक ही सीमित – Raipur News

सीवेज टैंक हादसा… पुलिस ने ठेकेदार पर दर्ज किया केस: रामकृष्ण अस्पताल में बने सीवेज टैंक में हुई थी तीन श्रमिकों की मौत, खुद प्रार्थी बने अफसर; जांच ठेकेदार तक ही सीमित – Raipur News




राजधानी के रामकृष्ण केयर अस्पताल में हुए दर्दनाक सीवेज टैंक हादसे में पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। पचपेड़ी नाका स्थित अस्पताल के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान तीन श्रमिकों की मौत के मामले में टिकरापारा थाना पुलिस ने शासन की ओर से खुद प्रार्थी बनकर ठेकेदार के खिलाफ जुर्म दर्ज किया है। ठेकेदार का नाम पुलिस द्वारा किशन सोनी बताया जा रहा है। आरोपी ठेकेदार के खिलाफ आगे की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। अब पढ़े क्या है पूरा मामला मंगलवार 17 मार्च को भाठागांव स्थित BSUP कॉलोनी के तीन श्रमिक प्रशांत कुमार (32), अनमोल मचकन (25) और गोविंद सेंद्रे (35) अस्पताल के जहरीले सेप्टिक टैंक की सफाई करने उतरे थे। सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी के कारण तीनों श्रमिक जहरीली गैस की चपेट में आ गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। श्रमिकों की मौत के बाद परिजनो ने अस्पताल परिसर में रात तीन बजे तक हंगामा किया। परिजनों के प्रदर्शन के बाद मंगलवार देर शाम पुलिस ने मामले में ठेकेदार को दोषी मानते हुए एफआईआर दर्ज की है। ठेकेदार ने सुरक्षा का नहीं रखा ध्यान पुलिस की जांच में सामने आया है, कि ठेकेदार ने अस्पताल प्रबंधन से सफाई का ठेका तो लिया, लेकिन श्रमिकों को ऑक्सीजन मास्क, बेल्ट या सुरक्षा किट उपलब्ध नहीं कराए। बिना किसी तकनीकी पर्यवेक्षण और सुरक्षा उपकरणों के श्रमिकों को ‘डेथ ट्रैप’ (मौत के जाल) में धकेल दिया गया। पुलिस की जांच से प्रबंधन बाहर फिलहाल पुलिस की जांच मुख्य रूप से ठेकेदार किशन सोनी तक ही सीमित नजर आ रही है। हालांकि, चर्चा इस बात की भी है कि क्या इतने बड़े अस्पताल परिसर में बिना सुरक्षा मानकों के काम होने देना प्रबंधन की चूक नहीं है? राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि जांच का दायरा बढ़ सकता है। 30 फीट गहरे टैंक में उतारा गया था मजदूरों को जिस सेप्टिक टैंक में इन मजदूरों को उतारा गया था, उसमें गैस निकासी के लिए कोई पाइप ही नहीं थी। यही नहीं ढाई फिट गोलाई के रास्ते उन्हें करीब 30 फीट गहरे टैंक में उतारा गया। इसके लिए उन्हें कोई सुरक्षा उपकरण भी नहीं दिए गए। सफाई करने वाले युवकों के पास न ही मास्क था और न ही उन्हें रस्सी बांधकर नीचे उतारा गया। इसके चलते नीचे जाने पर उनका दम घुट गया। वे ऊपर किसी को सिग्नल भी नहीं दे पाए और तीनों की मौत हो गई।



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