केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित 58 परिवहन सेवाओं में से 50 को ऑनलाइन लागू कर मप्र परिवहन विभाग देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। खास बात यह है कि 2024 में जब यह पहल शुरू हुई थी, तब मध्यप्रदेश अंतिम पायदान पर था। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय न
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अब वाहन पंजीयन, ड्राइविंग लाइसेंस और परमिट से जुड़ी अधिकांश सेवाएं एनआईसी द्वारा संचालित वाहन व सारथी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध हैं। हालांकि 8 सेवाएं लागू नहीं हो सकीं, जिनका कारण कानूनी अड़चनें या वर्तमान परिस्थितियों में उनका अप्रासंगिक होना बताया गया है। मप्र की आपत्ति के बाद 6 हटेंगी।
दिल्ली में पांच दिन पहले दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक हुई। परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा के अनुसार, इसमें फैसला लिया कि अब परिवहन सेवाओं की संख्या 58 से बढ़ाकर 100 की जाएगी।
इन सेवाओं पर थी आपत्ति
1. पुराने वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर सुरक्षित रखकर, उसे नए खरीदे गए वाहन पर लगाने की सुविधा को नंबर रिटेंशन सेवा कहते हैं। मप्र मोटरयान नियम-1994 में संशोधन किए जा रहे हैं। इसे नहीं हटाया है। 2. लोक परिवहन चालकों को दिया जाने वाला सरकारी प्रमाणपत्र पब्लिक सर्विस बैज (पीएसवी) मप्र में प्रासंगिक नहीं है। इसे हटा दिया गया है। 3. अस्थायी कंडक्टर लाइसेंस देना: मप्र में इसके लिए फिलहाल कानूनी प्रावधान मौजूद नहीं हैं। यह सेवा मप्र में प्रासंगिक नहीं है। इसे हटा दिया गया है। 4. ड्राइविंग लाइसेंस में फिंगर प्रिंट बदलना: लाइसेंस के दौरान आधार का वेरिफिकेशन किया जाता है, जिसमें पहले से ही फिंगर प्रिंट लिया जाता है। इसलिए इस सुविधा की भी जरूरत नहीं है। इसे हटा दिया गया है। 5. हिल रीजन: मॉर्थ की गाइडलाइन में मप्र के पहाड़ी क्षेत्रों को हिल रीजन की श्रेणी में नहीं रखा गया है। इसलिए हिल रीजन से जुड़ी विशेष परिवहन सेवाएं केवल हिमाचल, उत्तराखंड और नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में लागू हैं। इसे भी हटा दिया गया है।



