गुमला के रोशन महतो टमाटर की खेती कर बने मिसाल‎:  छत्तीसगढ़ से लाए ग्राफ्टिंग टमाटर के पौधे, अब दूसरे किसानों को दे रहे जानकारी – Basia News

गुमला के रोशन महतो टमाटर की खेती कर बने मिसाल‎: छत्तीसगढ़ से लाए ग्राफ्टिंग टमाटर के पौधे, अब दूसरे किसानों को दे रहे जानकारी – Basia News




कृषि के क्षेत्र में पारंपरिक खेती से हटकर नए प्रयोग करने वाले किसान न केवल अपनी किस्मत बदल‎ रहे हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। बसिया प्रखंड के बर्रई गांव में इन दिनों एक ऐसी ही सफलता की कहानी चर्चा का‎ केंद्र बनी हुई है। किरिंगलोया निवासी रोशन महतो उर्फ छोटू महतो ने ढाई एकड़ भूमि पर ग्राफ्टिंग टमाटर (कलमी टमाटर) की खेती‎ कर पूरे प्रखंड में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने ढाई एकड़ जमीन लीज पर ली और लगभग ढाई लाख रुपए की पूंजी‎ निवेश की। उन्होंने छत्तीसगढ़ से ग्राफ्टिंग टमाटर के पौधे 14 रुपए प्रति पीस की दर से मंगाए और अक्टूबर माह में इसकी रोपाई की।‎ इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पौधे का निचला हिस्सा बैंगन का है और ऊपरी हिस्सा टमाटर का। ग्राफ्टिंग की वजह‎ से यह पौधा बीमारियों के प्रति अधिक सहनशील है और लंबे समय तक फल देने की क्षमता रखता है। आकर्षण का केंद्र है ग्राफ्टिंग खेती ​ यह खेती कुम्हारी-गुमला मुख्य‎ सड़क के किनारे होने के कारण आकर्षण का केंद्र बन गई है। वहां से गुजरने वाले लोग अक्सर अपने वाहन रोककर इस आधुनिक‎ खेती को निहारते हैं। इतना ही नहीं, रोज दस किसान रोशन महतो से ग्राफ्टिंग की विधि, खाद-पानी के प्रबंधन और लागत की‎ जानकारी ले रहे हैं। वे सहर्ष साथी किसानों को यह तकनीक सीखा रहे हैं।‎ कम लागत में बंपर मुनाफे की उम्मीद मुनाफे के गणित पर बात करते हुए रोशन महतो बताया कि पौधे, खाद, मजदूरी और जमीन का‎ किराया मिलाकर ₹2.5 लाख खर्च हुए जबकि ​अनुमानित आय ₹8 लाख तक होने की संभावना है। यह पौधा लगभग छह महीने तक‎ लगातार फल देगा। वर्तमान में टमाटर ₹50 प्रति किलो की दर से बिक रहा है, जिससे अच्छे लाभ की उम्मीद है। सही तकनीक और‎ दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो किसान कम मेहनत और सीमित संसाधनों में भी बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।‎ अन्य किसान आत्मनिर्भर बने इस के लिए मिलकर करेंगे खेती‎ रोशन महतो का लक्ष्य सिर्फ खुद मुनाफा कमाना नहीं है, बल्कि वे अन्य किसानों को भी आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। उन्होंने बताया‎ कि अगले वर्ष निनई, बनतरिया, लुंगटु और बर्रई के कई किसान उनके साथ मिलकर इस तकनीक से खेती शुरू करेंगे। वे इन किसानों को तकनीकी सहयोग भी प्रदान करेंगे। ​बसिया प्रखंड के किसानों के लिए रोशन महतो का यह प्रयास गौरव की बात है।‎ जानिए… कौन हैं रोशन महतो‎ बसिया के रोशन महतो के पास अधिक जमीन नहीं है लेकिन अपनी जिजीविषा और इच्छाशक्ति के कारण किसानों के लिए‎ उदाहरण बने हैं। मि​डिल स्कूल तक पढ़े रोशन अपने पिता के साथ पारंपरिक खेती ही करते थे लेकिन अब वे व्यवसायिक अंदाज‎ में खेती करते हैं। उनकी तीन बेटियां हैं। चार अनाथ भगीने का भी लालन पालन उनके कंधों पर है। छत्तीसगढ़ घूमने के दौरान‎ उन्होंने ग्राफ्टिंग खेती की जानकारी ली। वहां के किसानों से बीज लिए और अपने यहां आकर टमाटर की खेती की। खूब मुनाफा‎ कमाया।‎



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