4 घंटे पहलेलेखक: अमित कर्ण
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धरम जी का जाना भारतीय सिनेमा के लिए सबसे दुखद दिनों में से एक है। यह सिर्फ भारतीय सिनेमा का नुकसान नहीं है। यह देओल परिवार के लिए, और मेरे जैसे लोगों के लिए भी व्यक्तिगत क्षति है, जो उस परिवार का हिस्सा रहे हैं। धरम पाजी हमेशा मुझे एक बच्चे की तरह मानते थे। देओल परिवार हमेशा हर अच्छे-बुरे व्यक्त में मेरे साथ रहा है। धरम पाजी तो बस, क्या कहूं, उनकी महानता का बखान करने के लिए मेरे पास कोई शब्द नहीं हैं। यह कहकर डायरेक्टर समीर कार्णिक भावुक हो जाते हैं।

समीर कार्णिक ने धर्मेंद्र की फिल्म ‘यमला पगला दीवाना’ डायरेक्टर की थी।
समीर कार्णिक ने धर्मेंद्र की फिल्म ‘यमला पगला दीवाना’ डायरेक्टर की थी। इस फिल्म में सनी देओल और बॉबी देओल भी अहम किरदार में थे। समीर कार्णिक कहते हैं- धरम जी एक लीजेंड हैं, और हमेशा एक लीजेंड रहेंगे। यह इंडस्ट्री का नहीं, पूरे भारतीय सिनेमा का बड़ा नुकसान है। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूं कि ‘यमला पगला दीवाना’ में मुझे उनके साथ काम करने का अवसर मिला।
दिल के बादशाह
समीर कहते हैं- मैंने धरम पाजी जैसा इंसान अपनी जिंदगी में कम ही देखा है। वह कभी किसी को जज नहीं करते थे। नया है, पुराना है, क्या है,कोई मतलब नहीं। वह बहुत ही नेकदिल इंसान थे और वह हमेशा हमारी यादों में वैसे ही रहेंगे।
उनका दिल इतना बड़ा था कि अगर किसी ने कोई गलती भी की होती, तो भी वह कभी उसे गलत नहीं समझते। उनका दिल इतना विशाल था कि उसमें सबको जगह थी, सबको अलाउड था। वह उन महान लोगों में से एक थे, जिनसे मुझे अपने जीवन में मिलने का सौभाग्य मिला।

यमला पगला दीवाना 14 जनवरी 2011 को रिलीज हुई थी।
सेट पर एक दोस्त और पिता
हमारी फिल्म ‘यमला पगला दीवाना’ में उन्होंने अपने दोनों बेटों (सनी और बॉबी) के साथ काम किया। उनका किरदार एक सीनियर से ज्यादा , एक दोस्त की तरह था।
वह सबको कम्फर्टेबल महसूस कराते थे। मैंने कहा न, वह कभी खुद को ‘धर्मेंद्र’ नहीं मानते थे। इतना बड़ा एक्टर, स्टार, सुपरस्टार,नहीं! वह सबको इक्वल ट्रीट करते थे, सबको इतना प्यार देते थे। यह सिर्फ प्यार था, हमेशा।
जब आपको एक पिता की जरूरत होती थी, वह वहां होते थे। जब आपको एक दोस्त की जरूरत होती थी, वह वहां होते थे। जब आपको अपने लिए खड़े होने की जरूरत होती थी, तो वह वहां होते थे। वो धर्मेन्द्र थे । धरम पाजी वही थे ।
मैं उन्हें बहुत मिस करूंगा, और वह हमेशा मेरे साथ रहेंगे। वह एक ऐसी ऊर्जा हैं, ऐसी शक्ति हैं कि अगर आप गिर जाओ, तो वह आपको मोटीवेट करते थे, “उठो बच्चे, अभी तो कुछ नहीं है, उठो, लड़ना है।” उनमें इतनी शक्ति है।
संक्रामक ऊर्जा
उनके बारे में कहा जाता है कि कैमरा ऑन होते ही उनकी एनर्जी एक अलग स्तर पर चली जाती है। मैं कहूंगा- कैमरा ऑन हो या ऑफ हो, उनकी एनर्जी हमेशा ऑन रहती थी।
उनकी एनर्जी संक्रामक थी। अगर आप कभी उदास या डाउन भी हों, तो उनसे मिलकर आप भी अप हो जाते थे। वह आते ही पूरे सेट को रोशन कर देते थे। ऐसा कोई आदमी नहीं था- मेरी यूनिट में, या मैंने जितनी यूनिटों में काम किया- जो उनकी एनर्जी से प्रभावित न हुआ हो।
सनी और बॉबी थोड़े शर्मीले हैं, लेकिन धरम सर हमेशा एनर्जी से भरपूर रहते थे। अगर आपका दिन खराब चल रहा हो, तो उनसे मिल लो, आपका दिल खुश हो जाएगा, आपकी एनर्जी वापस आ जाएगी।

अनटचेबल सहजता
अब इन सब चीजों के बारे में क्या ही बोलूं! वह भारतीय सिनेमा के सबसे उत्कृष्ट अभिनेताओं में से एक थे। उनकी सहजता, उनकी ऊर्जा अनटचेबल है।
कभी-कभी एक राइटर या डायरेक्टर के तौर पर, मैं या कोई और भी हो सकता है, अगर कहीं फंस जाए, तो हम उनसे पूछते थे, “धरम जी, ऐसा करना है।” वह मुस्कुराते थे और कहते थे, “बच्चे, शॉट रेडी कर, कर लूंगा मैं।”
यही अनुभव था, यही सहजता थी जो एक एक्टर के रूप में उनमें थी।
आज यह सिर्फ भारतीय सिनेमा का नहीं, मेरे लिए एक बहुत बड़ा व्यक्तिगत नुकसान है। मैं उन्हें हमेशा याद रखूंगा।



