पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  जो रिश्ते आपके पास उपलब्ध हों, उनको बचाए रखिए

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: जो रिश्ते आपके पास उपलब्ध हों, उनको बचाए रखिए


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  • Pt. Vijayshankar Mehta’s Column Preserve The Relationships You Have Available.

4 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता

अत्यधिक व्यस्त लोगों को एक युद्ध प्रतिदिन अपने ही समय से लड़ना पड़ता है। हम जितने व्यस्त होंगे, समय उतना कम पड़ेगा। जो कुछ भी समय आपके पास है और जो समय ईश्वर ने दिया है, उसमें टकराहट होगी। कहते हैं कि समय और जमाना तेजी से बदल रहा है, लेकिन कम या ज्यादा नहीं हो रहा।

समय 24 घंटे ही रहेंगे। तो हम जमाने के साथ बदल नहीं पाएंगे। और जो भी 24 घंटे हैं, उनका सदुपयोग नहीं कर पाएंगे। बहुत सारे प्रयोग लोग करते हैं, अपनी व्यस्तता के साथ। जब आप समय के साथ दौड़ रहे हों तो उसको व्यस्तता कहेंगे। जब आप समय से आगे दौड़ने की कोशिश करेंगे, उसको अति-व्यस्तता कहेंगे।

ऐसे समय एक प्रयोग कर सकते हैं और वो है रिश्तों को थाम लेना। रिश्ते इस दौड़ में आपकी ताकत बनेंगे। क्योंकि जो भी दौड़ेगा, वो थकेगा। और जो भी थकेगा, उसको कोई न कोई सहारा चाहिए। अपनेपन का एहसास बहुत बड़ा सहारा होता है। तो समय का संतुलन बैठाने में रिश्ते बहुत मददगार होंगे।

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