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- Pt. Vijayshankar Mehta’s Column Bangladesh Is The Third Angle In The Axis Of China And Pakistan
3 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
वैसे तो भाषा का संबंध शब्दों से है, लेकिन इन दिनों भाषा को आवाज से जोड़ दिया गया है। जिसकी आवाज में जोर है, शोर है-लोग उसी की भाषा सुनते और समझते हैं। मोबाइल के युग में भाषा अलग रूप ले चुकी है। नई पीढ़ी बिल्कुल मोबाइल की भाषा बोलती भी है और समझती भी है। इसलिए समझदारों ने उनसे उन्हीं की भाषा में बात करना शुरू कर दिया है।
शिव जी ने गरुड़ जी को जब काकभुशुंडि के पास भेजा तो पार्वती जी के मन में प्रश्न आया कि रामकथा तो आप भी सुना सकते थे। फिर काकभुशुंडि जी के पास पक्षीराज को क्यों भेजा ? तब शिवजी ने कहा- कछु तेहि ते पुनि मैं नहिं राखा, समुझइ खग खगही कै भाषा।
शिवजी का यह जो सोच है, आज हमारे बड़े काम का है। भले ही हमारी भाषा आवाज से ना जुड़ी हो, लेकिन कम से कम जिन लोगों से हम बात कर रहे हैं, उनको उसका अर्थ समझ आए और जो हम चाहते हैं, वो काम हो जाए। वहीं भाषा अंतर्तम तक प्रभाव देने वाली होनी चाहिए।



