अब खाद की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे किसान:  एमपी के सवा करोड़ किसानों की पोर्टल पर मैपिंग, अगले महीने से होम डिलेवरी की तैयारी – Bhopal News

अब खाद की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे किसान: एमपी के सवा करोड़ किसानों की पोर्टल पर मैपिंग, अगले महीने से होम डिलेवरी की तैयारी – Bhopal News




एमपी में बुआई के हर मौसम में किसानों की खाद लेने के लिए लगी कतारें सरकार और पब्लिक दोनों को परेशान करती हैं। अब सरकार किसानों को खाद की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा देने जा रही है। यही नहीं खाद की होम डिलेवरी सेवा पर भी काम चल रहा है। मप्र के कृषि विभाग ने एग्रीस्टेक पोर्टल पर सवा करोड़ किसानों की पूरी डिटेल दर्ज कराई है। इसमें किसान की खेती की भूमि का रकबा और उसमें बोई जाने वाली फसलों के साथ ही लगने वाली खाद की भी अनुमानित खपत दी है। दैनिक भास्कर ने एमपी के कृषि विभाग द्वारा ऑनलाइन खाद की बुकिंग और होम डिलेवरी को लेकर एग्रीस्टेक पोर्टल तैयार करने वाले क्रिस्प के ई-विकास पोर्टल के प्रोजेक्ट मैनेजर कुलदीप सिंह से बातचीत की… सिलसिलेवार पढ़ें: किसान अब कैसे कर सकेंगे खाद की ऑनलाइन बुकिंग… भास्कर: किसान खाद की बुकिंग कैसे कर पाएंगे?
कुलदीप सिंह: इसके लिए कृषि विभाग ने एक पोर्टल बनाया है। एग्रीस्टेक पोर्टल में आधार नंबर के जरिए किसान का रकबा मोबाइल पर आ जाएगा। उस रकबे के आधार पर फसल का चुनाव करने के बाद आईसीएआर की गाइडलाइन के तहत उस रकबे में किस रिकमंडेशन का डोज दिया है उसका किसान चुनाव कर सकते हैं। उसके बाद किसान को खाद किस रिटेलर के जरिए प्राप्त करना है। उसके लिए पोर्टल पर सरकारी खाद वितरण सोसाइटी और प्रायवेट रिटेलर दिखेंगे। किसान अपनी इच्छा के अनुसार सहकारी सोसाईटी या प्रायवेट रिटेलर का चयन करके वहां से खाद ले सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में किसानों को क्यूआर कोड की तरह ई-टोकन जनरेट होगा। उस ई-टोकन को लेकर किसान चयनित रिटेलर के पास जाएगा और वहां से ई-टोकन के जरिए खाद उठा सकते हैं। भास्कर: किसान क्या सिर्फ सरकारी दुकानों से खाद खरीदेंगे या प्रायवेट से भी?
कुलदीप सिंह: हमने किसानों को दो ऑप्शन दिए हैं। अगर किसान सहकारी समितियों के सदस्य हैं तो अपनी समिति से खाद ले सकते हैं। अगर सदस्य नहीं हैं तो प्रायवेट रिटेलर का चुनाव करके वहां से खाद उठा सकते हैं। भास्कर: कितने किसानों की जानकारी इस पोर्टल पर दर्ज की है?
कुलदीप सिंह: हमने तीन जिलों में पायलेट प्रोजेक्ट लॉन्च किया था। इस पायलेट के तहत 4 लाख 12 हजार 572 किसानों ने इसका लाभ लिया है। इस पोर्टल के जरिए 1.52 लाख मीट्रिक टन उर्वरक किसानों ने लिया है।
भास्कर: क्या इससे खाद की होम या खेत तक डिलेवरी भी कराई जाएगी?
कुलदीप सिंह: हमने होम डिलेवरी का पायलेट प्रोजेक्ट विदिशा जिले में सफलता पूर्वक कर लिया है। कुछ वित्तीय नियमों के कारण रिटेलर्स के सीधे खातों में पैसा न जाए उस पर हम वर्कआउट कर रहे हैं। संभवत: अगले महीने से पूरे प्रदेश में होम डिलेवरी की सुविधा शुरु हो सकती है। भास्कर: किसान प्रायवेट दुकान से खाद लेने जा रहा है तो फर्टिलाइजर के रेट क्या एप बताएगा?
कुलदीप सिंह: शासन ने हर फर्टिलाइजर का रेट निर्धारण किया है। तो पोर्टल और एप दोनों में तय रेट दिए गए हैं। नियमित रेट से ज्यादा रिटेलर पैसे नहीं ले सकता। भास्कर: पोर्टल बता रहा है कि किसान को यूरिया के चार बैग लगेंगे और किसान 6 बैग चाहता है? इसका क्या समाधान होगा?
कुलदीप सिंह: अभी शासन ने इसकी पूर्ति के लिए जमीन के रकबा के हिसाब से 10 बोरियों का निर्धारण किया गया है। अगर पहले फेस के टोकन से किसान ने दस बोरियां ले लीं हैं। तो वह दूसरी बार में एक्सेस फर्टिलाइजर की डिमांड करके अतिरिक्त खाद ले सकता है। भास्कर: पूरे मध्य प्रदेश में कितने किसानों का डेटा इस पोर्टल से जोड़ा है
कुलदीप सिंह: हमने अभी एग्रीस्टेक के जरिए करीब सवा करोड़ किसानों को मैप किया है। ये सभी किसान इस सुविधा का उपयोग कर सकते हैं। भास्कर: मप्र में फर्टिलाइजर की डिमांड कितनी रहती है?



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