एन. रघुरामन का कॉलम:  डिजिटल लाइफ से ‘लॉक्ड ऑउट’ होने को कैसे रोकें?

एन. रघुरामन का कॉलम: डिजिटल लाइफ से ‘लॉक्ड ऑउट’ होने को कैसे रोकें?


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4 घंटे पहले

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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

मुंबई के हीरानंदानी कॉम्प्लेक्स के पुलिस स्टेशन में पिछले शुक्रवार एक घंटे से भी कम समय में चोरी की नौ शिकायतें दर्ज हुईं। चोरों के गिरोह ने वहां खड़ी सैकड़ों कारों में से नौ के शीशे तोड़े और उनमें रखी कीमती चीजें चुरा ले गए। उन्होंने सिर्फ उन्हीं कारों के शीशे तोड़े, जिनमें लैपटॉप बैग दिखाई दे रहे थे।

कार मालिक पास के ग्रॉसरी स्टोर में वीकेंड की खरीदारी करने गए थे और अपना बैग कार में ही छोड़ गए। लोगों ने लैपटॉप ही नहीं, बल्कि उस बैग में रखे मोबाइल फोन, एयरपॉड्स समेत तमाम डिजिटल चीजें गंवा दीं। यह घटना महज लूट को नहीं, बल्कि इसके बाद उन लोगों को हुई परेशानी को बताती है।

ये सभी लोग अपनी डिजिटल लाइफ से अचानक ‘लॉक्ड ऑउट’ हो गए। उनके फोन और लैपटॉप चले गए, पासवर्ड याद नहीं रहे। उन्हें चिंता सताने लगी कि अगर वे अपने एपल, माइक्रोसॉफ्ट या गूगल अकाउंट एक्सेस नहीं कर पाए तो क्या होगा?

चूंकि उनकी डिजिटल जिंदगी का बड़ा हिस्सा कुछ ही अकाउंट्स में सिमटा था, इसलिए इन महत्वपूर्ण अकाउंट से कुछ घंटों के लिए भी बाहर होना किसी को उसके ऑफिस संबंधी जरूरी ईमेल, दस्तावेज और कैलेंडर से दूर कर सकता है।

पासवर्ड का बैकअप लेना और अपना अकाउंट एक्सेस करने के दूसरे तरीके सेट करना, ऐसी मुसीबतों से बचने का सबसे अच्छा तरीका हो सकता है। एपल, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियां इसके लिए कई टूल्स भी देती हैं। यहां कुछ सुझाव पेश हैं।

पासवर्ड मैनेजर इस्तेमाल करें : पासवर्ड मैनेजर सेट करना आज अकाउंट से लॉक्ड आउट होने से बचने का बेहतरीन तरीका है। यह आपके ब्राउजर, जैसे क्रोम में गूगल पासवर्ड मैनेजर या फिर डिवाइस के ऑपरेटिंग सिस्टम में फ्री टूल के तौर पर हो सकता है।

पेड पासवर्ड मैनेजर अलग-अलग वेब ब्राउजर्स और ऑपरेटिंग सिस्टम्स पर बेहतरीन तरीके से काम करते हैं। ये मैनेजर खुद मजबूत पासवर्ड बनाते हैं और सुरक्षित रखते हैं। जब भी आप लॉगिन करना चाहें तो ये यूजरनेम समेत आपके पासवर्ड अपने आप भर देते हैं।

इसका मतलब हुआ कि अगर आपका गैजेट खो भी जाएं तो आप किसी दूसरे के डिवाइस से पासवर्ड मैनेजर में साइन-इन करके भी सभी अकाउंट्स के बैक्ड-अप पासवर्ड एक्सेस कर सकते हैं। बस आपको अपने पासवर्ड मैनेजर का मास्टर पासवर्ड याद रखना होगा।

दूसरों को डेजिग्नेट करें : अगर कोई साइट या ऐप आपको किसी वयस्क मित्र या परिजन को भरोसेमंद रिकवरी कॉन्टैक्ट के तौर पर जोड़ने की सुविधा देता है, तो जरूर करें। इन लोगों को आपके अकाउंट का सीधा एक्सेस नहीं मिलेगा, लेकिन लॉक्ड आउट होने पर वे आपकी पहचान सत्यापित करने में मदद करेंगे।

मसलन, गूगल इस काम के लिए गूगल अकाउंट रखने वाले अधिकतम 10 लोगों को डेजिग्नेट कर सकता है। यह आपके किसी एक कॉन्टैक्ट को तीन और आपको एक कोड भेजता है। आप अपना कोड रिकवरी कॉन्टैक्ट को बताते हैं और वह आपका अकाउंट अनलॉक करने के लिए अपने पास आए तीन कोड में से सही कोड चुनता है।

एपल में भी ऐसा ही सिस्टम है, जिसमें पांच कॉन्टैक्ट जोड़े जा सकते हैं। लेकिन रिकवरी कोड जनरेट करने के लिए उनके पास भी एपल डिवाइस होनी चाहिए। माइक्रोसॉफ्ट भी ऐसा सिस्टम बनाने पर विचार कर रहा है।

पास-की सेट करें : पास-की पासवर्ड से ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक होती हैं। इनमें फेस स्कैन, फिंगरप्रिंट रीडर की सुविधा होती है। अगर आपका डिवाइस बायोमेट्रिक विकल्प को सपोर्ट नहीं करता तो उसमें पिन कोड की सुविधा होती है।

यदि आप फेस स्कैन या फिंगरप्रिंट से लॉगिन करते हैं तो दूसरे स्तर का आइडेंटिटी वेरिफिकेशन नहीं मांगा जाता- जैसे फोन पर भेजा गया टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन कोड। यह तब बहुत काम आता है, जब आप लैपटॉप और मोबाइल, दोनों खो बैठते हो और किसी नए डिवाइस से लॉगिन करते हो।

फंडा यह है कि ज्यादातर लोग अपनी डिजिटल लाइफ लैपटॉप और मोबाइल जैसी दो डिवाइस में ही सहेजकर चलते हैं। एक अतिरिक्त डिवाइस रखना ऐसे संकटों से बचाव का सर्वश्रेष्ठ तरीका हो सकता है- चाहे वह घर पर रखा डेस्कटॉप हो या कोई एक्स्ट्रा फोन।

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