एन. रघुरामन का कॉलम:  2026 शायद हमें भूत और भविष्य, दोनों की सैर कराएगा

एन. रघुरामन का कॉलम: 2026 शायद हमें भूत और भविष्य, दोनों की सैर कराएगा


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4 घंटे पहले

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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

हममें से किसी ने भी बॉलीवुड या हॉलीवुड की किसी फिल्म में शायद ऐसा नहीं देखा होगा कि किसी कैदी को ड्रोन के जरिए सेल से उठाकर बाहर निकाल लिया गया हो। हां, कुछ एक्शन मूवीज में जरूर ड्रोन्स को भाग निकलने या रेस्क्यू ऑपरेशन का अहम हिस्सा बताया गया है।

2026 में यह हकीकत बन सकता है। यूके के प्रिजन गवर्नर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष टॉम व्हीटली ने इसी हफ्ते चेतावनी दी है कि सच में जल्द ही ऐसा हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि 100 किलोग्राम तक वजन उठा सकने वाले कृषि कार्यों के लिए बने ड्रोन्स किसी इंसान का वजन उठा सकते हैं। इनके जरिए कैदी जेल से भाग सकते हैं।

डीजेआई का एग्रास टी100 ड्रोन ट्रांसपोर्ट करने के लिए आसानी से तोड़ा जा सकता है, फिर दोबारा जोड़कर जल्दी चार्ज भी किया जा सकता है। व्हीटली के मुताबिक चूंकि बड़े गिरोहों के पास काफी पैसा होता है, इसलिए संगठित गिरोह 20 हजार पाउंड खर्च कर ऐसे ड्रोन ले सकते हैं।

उन्होंने चेताया कि ‘लॉजिस्टिक तौर पर यह खतरा अब सामने है।’ वजह है कि जेलों में ड्रोन डिलीवरी तकनीकी तौर पर इतनी एडवांस हो गई है कि अब यह लगभग ‘उबर ईट्स’ जैसी ही है। जेल अधिकारी भी मानते हैं कि कैदी केन्द्रीकृत स्रोत पर ऑर्डर देता है और लोकल ड्रोन ऑपरेटर डिलीवरी कर देता है।

2024 और 2025 के आंकड़े बताते हैं कि दुनियाभर में जेलों के आसपास ड्रोन दिखने और प्रतिबंधित सामान गिराने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। सुरक्षा विशेषज्ञ अब ड्रोन को जेलों की सुरक्षा के लिए प्राथमिक खतरा मान रहे हैं। मार्च 2025 में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में इंग्लैंड और वेल्स की जेलों में ड्रोन से जुड़ी 1,712 घटनाएं दर्ज हुईं।

यह पिछले साल के मुकाबले 43% ज्यादा और 2021 से करीब 1000% की भारी बढ़ोतरी है। अमेरिका में भी 479 ड्रोन घटनाएं दर्ज की गईं। जेल अधिकारियों का कहना है कि ‘जेलों में ड्रोन डिलीवरी का पूरा इकोसिस्टम बेहद एडवांस्ड है, जो यूके में कमर्शियल ड्रोन गतिविधियों से कहीं आगे निकल चुका है।’

जब तकनीक हमें आगे ले जाने और ऐसा कुछ दिखाने की कोशिश कर रही है, जो आज मौजूद ही नहीं है- उसी वक्त फूड इन्फ्लुएंसर्स हमें जानबूझकर 150 साल पीछे ले जाकर दिखा रहे हैं कि उस दौर के प्रभावशाली लोग क्या खाते थे। उन्हें क्या पसंद था, वो डिशेज कैसे बनती थीं और आज हम कैसे उनका स्वाद ले सकते हैं। वे इन डिशेज को सिर्फ हेल्दी ही नहीं, बल्कि संजोने लायक इतिहास बता रहे हैं।

डॉनी डॉडसन ऐसे ही लोगों में से एक हैं, जिन्होंने करीब 18 महीने पहले 1776 की डिश ‘होकेक्स’ बनाना शुरू किया। यह शहद और मक्खन में लिपटा कॉर्नमील पैनकेक होता है। अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन को यह काफी पसंद था।

डॉडसन के वीडियो को 1.6 मिलियन व्यूज मिले और आज डॉडसन के पास उस दौर के करीब 200 वीडियो हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपतियों पर अपनी सीरीज पूरी की और फिर प्राचीन मिस्र से लेकर विक्टोरियन इंग्लैंड तक की ऐतिहासिक रेसिपीज बनाने लगे।

मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फास्ट फूड प्रेम पर उन्होंने कहा कि ‘यह हमारे सांस्कृतिक पतन का संकेत है।’ वे रेस्टोरेंट्स और किचन में काम करने वाले उस छोटे समूह का हिस्सा हैं, जो भूली-बिसरी रेसिपीज को दोबारा जिंदा कर रहा है। क्योंकि हमारी जिंदगी में कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जो पीढ़ियों तक नहीं बदलतीं। उनमें से एक है खाना। इसीलिए यह आपके और मेरे जैसे लोगों को आकर्षित करता है।

मेरे पास मीनाक्षी अम्मल की ‘कुक एंड सी’ शीर्षक वाली किताबों के कुछ वॉल्यूम हैं। 1951 में जब ये किताबें प्रकाशित हुईं तो उनकी उम्र 45 साल थी। इसमें उन्होंने 1900 से पहले हमारे दादा-पड़दादा के जमाने में बनाई जाने वाली रेसिपीज लिखी थीं। अचंभे की बात नहीं कि उनकी किताब न सिर्फ 2000 के बाद लोकप्रिय हुई, बल्कि आज भी अमेरिकी विश्वविद्यालयों में गाइड के तौर पर इस्तेमाल की जाती है।

फंडा यह है कि अगर आप लोकप्रियता पाना चाहते हैं तो या तो भविष्य की सोच के साथ कदम बढ़ाइए या सदियों पुराने दौर को साकार कीजिए। इन दोनों में ही लोगों का ध्यान खींचने की चुम्बकीय ताकत होती है।

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