दुनिया की शीर्ष 10 अरबपति महिलाओं में शामिल और पिवोटल की प्रमुख मेलिंडा फ्रेंच ने युवाओं से कहा है,‘डिग्री लेना ही असली बदलाव नहीं है। असली बदलाव तो तब शुरू होता है जब आप अगले दिन सोकर उठते हैं और खुद से पूछते हैं- क्या मैं वाकई उस रास्ते पर हूं जहां पहुंचना चाहता हूं…? एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा, ‘अगर आप आज अपनी राह को लेकर संशय में हैं, तो रुकिए, सीखिए और आगे बढ़िए।’ पढ़िए खास अंश… आज की युवा पीढ़ी के लिए जॉब मार्केट भूलभुलैया से कम नहीं है। एक ओर एआई काम के पुराने तरीकों को निगलने को तैयार है, तो दूसरी तरफ करियर की अनिश्चितता डराती है। मुझे लगता है कि यही असल में विकास की सबसे उपजाऊ जमीन है। बदलाव सीखने का अवसर करियर के शुरुआती दौर में जब चीजें योजना के मुताबिक नहीं होतीं, तो घबराने के बजाय रुकें। चाहे बदलाव कठिन हो या आसान, अगर हम खुद को सीखने का समय देते हैं, तो ऐसे दौर में हमारी प्रगति सबसे ज्यादा होती है। अनिश्चितता से भागें नहीं, उसे आत्मसात करें। ट्रांजिशन को समझने की प्रक्रिया अक्सर डिग्री के बाद शुरू होती है। वहीं से आप अपनी स्थिति को प्रोसेस करते हैं। यही लीडरशिप का भी केंद्र है। व्यक्तिगत मूल्यों को अहमियत दें माइक्रोसॉफ्ट में रहते हुए शुरुआत में मुझे लगा कि मैं ऑफिस के ‘गेम’ जीतने के चक्कर में ऐसी इंसान बनती जा रही हूं, जिसे मैं खुद पसंद नहीं करती। तब तत्काल राह बदलने का फैसला लिया। कंपनी की संस्कृति मूल्यों से मेल नहीं खाती, तो वहां कितनी भी तरक्की मिल जाए, वह कभी भी संतुष्ट नहीं करेगी। अपनी असल पहचान के साथ नेतृत्व करियर के शुरुआती दो वर्षों में मैंने यह सबक सीखा कि दूसरों की तरह ‘रफ-एंड-टफ’ बनने की जरूरत नहीं है। अपनी सच्ची पहचान के साथ मैंने काम करना शुरू किया और सफल रही। युवाओं के लिए संदेश साफ है….आपको सफल होने के लिए अपनी शख्सियत बदलने की जरूरत नहीं है; जो आप हैं, वही आपकी सबसे बड़ी ताकत है। मुश्किल प्रोजेक्ट चुनें कठिन समस्याओं की ओर टहलकर नहीं, बल्कि दौड़कर जाइए। वहीं आपको सबसे बड़े अवसर मिलेंगे। अगर आपके सपने आपको डराते नहीं हैं, तो वे बड़े नहीं हैं। इसलिए दोबारा सोचने की जरूरत है। करियर की शुरुआत में मुश्किल प्रोजेक्ट्स लेना ही आपको दूसरों से अलग खड़ा करेगा।’ – मेलिंडा
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युवाओं को मेलिंडा का मंत्र: कामयाबी के लिए खुद को न बदलें, चुनौतियों की ओर दौड़कर जाएं, बड़े मौके वहीं; संशय हो तो रुकें, सीखें… फिर बढ़ें
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