इसरो PSLV-C62 रॉकेट से अन्वेषा सैटेलाइट लॉन्च करेगा:  ये 600km ऊंचाई से झाड़ी में छिपे दुश्मन की फोटो ले सकेगा; 2026 का पहला मिशन

इसरो PSLV-C62 रॉकेट से अन्वेषा सैटेलाइट लॉन्च करेगा: ये 600km ऊंचाई से झाड़ी में छिपे दुश्मन की फोटो ले सकेगा; 2026 का पहला मिशन


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श्रीहरिकोटा13 मिनट पहले

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इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) आज सुबह 10.18 बजे श्रीहरिकोटा से PSLV-C62 रॉकेट से अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट अन्वेषा (EOS-N1) को लॉन्च करेगा। यह इस साल भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी का पहला लॉन्च मिशन है।

अन्वेषा सैटेलाइट को भारत की ‘सुपर विजन’ वाली आंख कहा जा रहा है, जिसे DRDO ने बनाया है। इसकी तैनाती धरती से करीब 600 किलोमीटर ऊपर सन-सिंक्रोनस पोलर आर्बिट (SSO) में होगी। यानी पृथ्वी के चारों तरह की ऐसी ऑर्बिट, जहां से सूरज हमेशा एक ही एंगल पर रहता है।

ये अंतरिक्ष से धरती की बारीक से बारीक चीजों की तस्वीर खींच सकता है। फिर चाहे बॉर्डर पर झाड़ियों में छिपा कोई दुश्मन सेना का जवान हो या आर्मी टैंक के रास्ते में छिपी लैडमाइंस।

इसरो ने बताया कि घरेलू और विदेशी कस्टमर्स के लिए बनाए गए बाकी 14 को-पैसेंजर सैटेलाइट्स को भी 260 टन वजनी PSLV-C62 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा।

अन्वेषा सैटेलाइट HRS तकनीक पर काम करता है

अन्वेषा सैटेलाइट, ‘हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग’ यानी HRS तकनीक पर काम करता है, जो रोशनी के ज्यादा स्पेक्ट्रम को डिटेक्ट करता है। यानी ये कुछ ही रंगों के बजाय रोशनी के सैकड़ों बारीक रंग पकड़ सकता है।

ये सैटेलाइट जो बारीक कलर डिटेक्ट करता है, उससे यह पता चल जाता है कि तस्वीर असल में किस चीज की है। यह एक ऐसे स्कैनर की तरह है, जो अलग-अलग तरह की मिट्टी, पौधे, इंसानी एक्टिविटी या किसी भी चीज को उसकी अलग चमक से पहचान सकता है।

डिफेंस सेक्टर के लिए फायदेमंद…

  • सैटेलाइट का इस्तेमाल जंगल, माइनिंग की निगरानी, ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को मापने जैसे कामों में होता है। असल में ये सेनाओं के लिए एक सीक्रेट वेपन की तरह काम करता है।
  • सेना का टैंक किसी इलाके से गुजर सकता है या नहीं, ये जानने के लिए HRS के जरिए उस इलाके की मिट्टी का टाइप डिटेक्ट किया जा सकता है। अगर कहीं रेगिस्तानी या चिपचिपी मिट्टी है, तो यह पहले से बता देगी।
  • अक्सर जंगली इलाकों में पेड़-पौधे के पीछे छिपना आसान होता है। किसी झाड़ी में दुश्मन सेना का कोई जवान या नदी के पानी के नीचे कोई हथियार छिपा है, तो HRS तकनीक इसका पता लगा सकती है।
  • 3D इमेज के जरिए जंग के दौरान HRS के डेटा और तस्वीरों का इस्तेमाल करके सिमुलेशन बनाए जा सकते हैं। सेना के लिए सही रूट्स, दुश्मन सेना का फॉर्मेशन समझा जा सकता है। सीमाई इलाकों में दुश्मन की मूवमेंट पर नजर रखी जा सकती है।

अब तक 6 देश HySIS सैटेलाइट लॉन्च कर चुके

भारत के अलावा अमेरिका, चीन, जर्मनी, जापान, इटली और पाकिस्तान भी हाइपरस्पेक्ट्रल लॉन्च कर चुके हैं। भारत ने इससे पहले 29 नवंबर 2018 को अपनी पहली हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट लॉन्च की थी।

HySIS नाम के इस सैटेलाइट का वजन 380 किलो था। हालांकि ये 55 स्पेक्ट्रल बैंड्स में रोशनी को डिटेक्ट कर सकता था। अन्वेषा, HySIS का अपग्रेडेड वर्जन है और इसकी हाइपरस्पेक्ट्रल क्षमता भी ज्यादा है।

ये PSLV की 64वीं उड़ान

PSLV अब तक 63 सफल उड़ानें पूरी कर चुका है। इसके जरिए चंद्रयान-1, मार्स ऑर्बिटर मिशन (MOM) और आदित्य-L1 जैसे अहम मिशन लॉन्च किए जा चुके हैं।

PSLV का पिछला मिशन PSLV-C61 था, जिसमें 18 मई 2025 को EOS-09 सैटेलाइट लॉन्च किया गया था। हालांकि तीसरे स्टेज में आई तकनीकी समस्या के कारण वह मिशन पूरी तरह सफल नहीं हो सका।

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