जो किसान मर गए,उनके नाम से उठा ली बीमा राशि: सरसों को गेहूं बताकर करोड़ों का क्लेम लिया, पटवारी-बीमा कंपनी एजेंटों ने बनाई फर्जी रिपोर्ट – Rajasthan News


प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को मिलने वाले फसलों के क्लेम में ठगी गिरोह सेंध लगा रहे हैं। पूरे प्रदेश में सैकड़ों किसानों की जमीन पर फर्जी बंटाईदार बनाकर उनका बीमा किया गया। फिर वहां फसलों को नुकसान (फसल खराबा) दिखाकर करोड़ों रुपए के क्ल

.

चौंकाने वाली बात यह है कि जमीन के असली मालिकों (किसान) को इसकी भनक तक नहीं लगी। कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की मानें तो ठगी का ये आंकड़ा 122 करोड़ से ज्यादा का है।

किसानों के साथ इतने बड़े स्तर पर ठगी को कैसे अंजाम दिया गया?

भास्कर ने इसकी पड़ताल की। सामने आया कि इसके पीछे गिरोह है, जिसने योजना के ‘लूपहोल’ का फायदा उठाया। जनसेवा केंद्रों से लेकर कृषि विभाग, राजस्व विभाग और बीमा कंपनी की बिना मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर ठगी संभव नहीं है।

भास्कर ने जिम्मेदारों से बात की। राजस्व विभाग, कृषि विभाग से लेकर बीमा कंपनी के प्रतिनिधि एक-दूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं।

इस रिपोर्ट में पढ़िए- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कैसे सेंध लगाई गई? योजना के कौन से लूपहोल का फायदा उठाया गया? किस तरह क्लेम का पैसा ठगों की जेब में गया?

सबसे पहले 2 मामलों से जानते हैं किसान कैसे ठगे गए?

केस नंबर-1 : बिरानी जमीन पर उठाया गेहूं का क्लेम जोधपुर के बावड़ी में किसान डूंगरराम की 4.45760 हेक्टेयर जमीन है। डूंगरराम के खाते में एक रुपया भी नहीं पहुंचा। बीमा क्लेम लवेरा कलां निवासी मंजू भीयाराम ने उठाया। चौंकाने वाली बात ये है कि क्लेम गेहूं की फसल पर उठाया गया, जबकि पूरी जमीन असिंचित है। यहां गेहूं की फसल उगती ही नहीं।

केस नंबर 2 : किसान की मौत हो चुकी, फिर भी उठा क्लेम बावड़ी के ही किसान रामदीन की खसरा नंबर-141 में 5.1372 हेक्टेयर जमीन है। यहां सोयला निवासी सोनू ढाका ने खुद को बंटाईदार बताते हुए गेहूं की फसल का बीमा क्लेम उठा लिया।

चौंकाने वाली बात ये है कि जमीन के मालिक रामदीन की कई साल पहले मौत हो चुकी है। उनके फर्जी अंगूठे और हस्ताक्षर लगाकर तिल की फसल को नुकसान दिखाया गया और लाखों रुपए का क्लेम उठा लिया गया। इस खेत में कभी तिल बोए ही नहीं गए थे।

ऐसे सामने आया फर्जीवाड़ा? जिन किसानों ने फसल पर लोन ले रखा है, उनका बीमा बैंक खुद ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत कर देते हैं। हालांकि यह स्वैच्छिक है। वहीं, जिन किसानों ने लोन नहीं ले रखा, उनमें अधिकांश किसान खुद जन सेवा केंद्र (Common Service Centre) पर जाकर ऑनलाइन PMFBY पोर्टल के जरिए बीमा करवा सकते हैं।

इस बार बारिश ज्यादा होने से ज्यादातर इलाकों में किसानों की फसलें बर्बाद हुईं। ऐसे में किसान ऑनलाइन पोर्टल पर बीमा करवाने जन सेवा केंद्रों पर पहुंचें तो उन्हें पता चला कि उनकी जमीन पर तो पहले से ही बीमा हो रखा है। इतना ही नहीं, पिछले 3 साल से बीमा का क्लेम भी उठाया जा रहा है।

जोधपुर, बीकानेर, पाली, नागौर, झालावाड़, श्रीगंगानगर सहित अन्य जिलों में ऐसे सैकड़ों मामले सामने आए हैं। जोधपुर, बीकानेर में दो FIR दर्ज कराई गई है। कुछ मौखिक शिकायतें भी हुई हैं।

पाली जिले के रोहट क्षेत्र के किसानों ने 25 अक्टूबर को एसडीएम ऑफिस पहुंचकर फर्जी क्लेम उठाने की शिकायत दी है।

पाली जिले के रोहट क्षेत्र के किसानों ने 25 अक्टूबर को एसडीएम ऑफिस पहुंचकर फर्जी क्लेम उठाने की शिकायत दी है।

किसान ने बताई हकीकत : 3 साल से बीमा उठ रहा, पता तक नहीं जोधपुर के मोरनावड़ा निवासी किसान कंचन सिंह बताते हैं- इस बार ज्यादा बारिश के कारण उनकी पूरी फसल बर्बाद हो गई थी। कुछ क्लेम मिल जाएगा, इसलिए जुलाई-अगस्त 2025 की फसलों का बीमा करवाने मैं बावड़ी में स्थित जनसेवा केंद्र पर गया था। वहां पता चला कि मेरी जमीन पर पहले से ही किसी का बीमा हो रखा है। पिछले 3 साल से फसलों पर क्लेम भी उठाया जा रहा है।

मेरी दो खसरों पर कुल 28 हेक्टेयर जमीन है। दोनों पर मैंने कभी बीमा नहीं करवाया। खरीफ की फसलों की खुद बुवाई करता हूं। पिछले 8 साल से रबी की फसल नहीं बोई, क्योंकि उस क्षेत्र में पानी नहीं हैं। मुझे मालूम चला कि 3 वर्षों से रबी और खरीफ दोनों फसलों का बीमा है और क्लेम भी उठाया जा रहा है।

कृषि रक्षक पोर्टल की हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर जानकारी ली, तब हकीकत सामने आई कि मेरी जमीन पर सोयला के रहने वाले प्रकाश, उसकी पत्नी नीतू और रवि दैय्या के नाम से बीमा पॉलिसी जारी हो रखी है। इन तीनों को मैं जानता तक नहीं।

2024 में रबी फसल में गेंहूं का क्लेम करीब 3 लाख से अधिक का उठाया गया, जबकि गेहूं की फसल मेरे खेत में होती ही नहीं है। अभी फिर से तिल की फसल पर बीमा क्लेम का आवेदन किया गया है, जबकि तिल की बुवाई भी नहीं की गई। ऐसे में खेड़ापा थाने में इन तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है।

करोड़ों के बीमा उठा चुके माफिया, आगे भी तैयारी जोधपुर के बावड़ी ब्लॉक के भारतीय किसान संघ अध्यक्ष मुकनाराम छापरिया ने बताया- यह पूरा खेल फसल बीमा गिरोह का है। वर्ष 2024 में बावड़ी ब्लॉक में रबी फसल में 1 करोड़ 63 लाख रुपए गेहूं की फसल का क्लेम उठाया गया, जबकि पूरे ब्लॉक में गेहूं की उपज नहीं होती।

खरीफ 2024 में 93 लाख रुपए मोठ का बीमा उठाया गया, जबकि यहां मोठ की खेती नहीं होती। यहां मूंग, बाजरा, कपास की खेती होती है। इन फसलों पर पहले से बैंक बीमा करती है। इसलिए गिरोह इन फसलों पर क्लेम नहीं करते।

मुकनाराम ने दावा किया कि 2025 में माफियाओं ने तिल की फसल पर क्लेम किया है, जिसका बहुत बड़ा क्लेम उठने वाले हैं, जबकि यहां तिल की फसल होती ही नहीं। यह सभी फर्जी बीमे जन सेवा केंद्रों से हुए।

रामूराम को बाबूराम ने अपने खेत का बंटाईदार बना रखा है। बाबूराम ने अपने खेत की गिरदावरी रिपोर्ट में फसल जीरा बताई थी, लेकिन रामू राम ने गेहूं की फसल का क्लेम लिया है।

रामूराम को बाबूराम ने अपने खेत का बंटाईदार बना रखा है। बाबूराम ने अपने खेत की गिरदावरी रिपोर्ट में फसल जीरा बताई थी, लेकिन रामू राम ने गेहूं की फसल का क्लेम लिया है।

जनसेवा केंद्रों के जरिए हुआ पूरा फर्जीवाड़ा भास्कर पड़ताल में सामने आया कि फसलों पर बीमा क्लेम उठाने का पूरा फर्जीवाड़ा जनसेवा केंद्रों से शुरू हुआ। इसे कृषि विभाग, राजस्व विभाग के अफसरों की बीमा कंपनी के साथ मिलीभगत से अंजाम दिया गया। इस फर्जीवाड़े में पूरा रैकेट है, जिसने उन किसानों को टारगेट बनाया जिनके पास ज्यादा जमीन है और उसने बैंक से कृषि लोन नहीं ले रखा हो या जिसे कभी लोन की जरूरत ही नहीं पड़ी हो। उन किसानों की जमीन पर दूसरे काश्तकारों को बंटाईदार बताकर फर्जी इकरारनामा के स्टांप पेपर पेश किए गए।

यह फर्जीवाड़ा कैसे किया गया?

  • जो किसान बैंक से लोन नहीं लेते, उनमें ज्यादातर अपनी फसल का नुकसान होने पर जन सेवा केंद्रों पर जाकर ऑनलाइन पोर्टल पर ही बीमा करवाते हैं।
  • ई-मित्र की तर्ज पर गांव में किसानों की सहायता के लिए जन सेवा केंद्र खोले गए हैं।
  • पीएम फसल बीमा योजना के लिए किसान को अपना आधार कार्ड या जनाधार कार्ड देना होता है।
  • पोर्टल पर आधार कार्ड संख्या डालते ही यह पता चल जाता है कि किसान के पास कितनी जमीन है।
  • किसान को प्रति हेक्टेयर के हिसाब से अपनी फसल के बीमा की प्रीमियम राशि चुकानी होती है।
  • अगर किसान ने अपनी जमीन किसी काश्तकार को बंटाई (किराए) पर दी है तो वह भी क्लेम का हकदार माना जाता है।
  • इसके लिए जमीन मालिक के साथ स्टैंप पेपर पर इकरारनामा तैयार कर पोर्टल पर अपलोड करना होता है।
  • बीमा माफियाओं ने इसी लूपहोल का इस्तेमाल फर्जी क्लेम उठाने में किया।
  • फर्जी इकरारनामा बनाकर स्टैंप पेपर तैयार कर बंटाईदार बनाए गए।
  • किसी भी इकरारनामे का फिजिकल वेरिफिकेशन नहीं किया गया।
  • उन फसलों का क्लेम उठाया गया, जो उस क्षेत्र में उगती तक नहीं।
5 सितंबर को भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ताओं को बावड़ी कस्बे के एक खेत में कुछ स्टैंप पेपर पड़े मिले थे। बताया जा रहा है ये क्लेम उठाने के लिए फर्जी बंटाईदार के पेपर हैं।

5 सितंबर को भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ताओं को बावड़ी कस्बे के एक खेत में कुछ स्टैंप पेपर पड़े मिले थे। बताया जा रहा है ये क्लेम उठाने के लिए फर्जी बंटाईदार के पेपर हैं।

गिरदावरी रिपोर्ट किसने वेरिफाई की? जनसेवा केंद्रों पर फर्जीवाड़ा होने के बाद क्लेम उठाने में भी मिलीभगत की आशंका है। बीमा होने के बाद फसल खराब होने पर उसकी गिरदावरी रिपोर्ट बनती है। उस गिरदावरी रिपोर्ट को राजस्व विभाग के अधिकारी (पटवारी) और उसके बाद क्लेम देने वाली कंपनी द्वारा मौके पर जाकर इंस्पेक्शन करना होता है। इसके बाद वेरिफिकेशन रिपोर्ट ओके होती है। यह फर्जीवाड़ा कैसे हुआ इस प्रोसेस से समझा जा सकता है…

  • किसान अपनी फसल की गिरदावरी ऑनलाइन फसल गिरदावरी ऐप पर जाकर खुद कर सकता है।
  • इसमें किसान अपना आधार कार्ड नंबर डालता है तो खसरा और जमीन की डिटेल आ जाती है। किसान को जीपीएस लोकेशन के अनुसार, उस समय अपने खसरे पर मौजूद रहना पड़ता है, जिससे लोकेशन ट्रेस होती है।
  • गिरदावरी ऐप में किसान अपने खसरे पर एक या उससे अधिक फसलों की डिटेल मेंशन करता है। बताता है कि कितने प्रतिशत फसल खराब हुआ है।
  • इस गिरदावरी रिपोर्ट को नियमानुसार हलका पटवारी मौके पर जाकर चेक करने के बाद वेरिफाई करता है।
  • पटवारी की तरफ से रिपोर्ट ओके होने के बाद 72 घंटे के अंदर बीमा कंपनी का कोऑर्डिनेटर या एजेंट उसे वेरिफाई करते हैं।
  • एजेंट को उसी लोकेशन पर जाकर नोट केम (NoteCam) से फोटो लेकर अपलोड करनी होती है। उस पर कृषि पर्यवेक्षक के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।

फसल बीमा के जॉइंट डायरेक्टर बोले- बंटाईदार गलत तो बीमा कंपनी की गलती फसल बीमा के जॉइंट डायरेक्टर जगदेव सिंह ने कहते हैं- 1 साल में पौने चार करोड़ पॉलिसी बनती हैं। इसमें साढ़े तीन करोड़ पॉलिसी बैंक के द्वारा बनती हैं। बाकी बचे बीमा उन किसानों के हैं, जिनके ऊपर बैंक का कोई लोन नहीं है। इनमें भी बंटाईदार की संख्या काफी कम है। 2 से 3 लाख बंटाईदारों में कितने सही हैं या कितने गलत, यह काम बीमा कंपनी के वेरिफिकेशन में होता है। बीमा कंपनी ही वेरिफाई कर उसे अप्रूव करती हैं। अगर इसमें गलती हुई है तो बीमा कंपनी जिम्मेदार है।

जिन किसानों ने एफआईआर करवाई है, उन मामलों की जांच होगी। गलत करने वालों के साथ कार्रवाई होनी चाहिए। हम इसमें पूरा सहयोग करते हैं।

बीमा कंपनी के प्रतिनिधि बोले- हम बस कागज देखते हैं पूरे है या नहीं भास्कर ने फसलों का बीमा करने वाली एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी (AIC) के जोधपुर और फलोदी जिला कोऑर्डिनेटर वीपी सिंह से बात की। उन्होंने कहा- राजस्थान के 23 जिलों में इसी कंपनी से अऋणी किसानों (बिना किसी बैंक लोन वाले किसान) का बीमा हो रहा है।

तहसील स्तर पर कंपनी ने कोऑर्डिनेटर नियुक्त कर रखे हैं। हमारे पास किसी तरह का कोई टारगेट नहीं होता, क्योंकि फसल बीमा स्वैच्छिक है। किसान इसे जनसेवा केंद्रों पर जाकर राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (एनसीआईपी पोर्टल) पर ऑनलाइन करवाते हैं।

वीपी सिंह ने बताया- हम तो पोर्टल पर अपलोड दस्तावेजों में यह देखते हैं कि आधार कार्ड है या नहीं और बंटाईदार के कागज पूरे हैं या नहीं। बटाईदार फर्जी है या सही है, इसकी जांच नहीं होती है।

किसी सेंटर पर गलत दस्तावेज अपलोड हुए हैं तो उसका पता हम नहीं लगा सकते। हमारे पास भी कई मौखिक शिकायतें आई हैं कि सीएससी सेंटर पर ही गड़बड़ी हो रही है। जांच होगी तब सामने आ जाएगा।

कृषि विभाग के अधिकारी का बेतुका बयान- हम कहां-कहां ध्यान रखें इस मामले में हमने जॉइंट डायरेक्टर एग्रीकल्चर जोधपुर एसएन गढ़वाल से बात की। उन्होंने बताया कि किसानों से खुद को अवेयर रहने की जरूरत है। आजकल सभी कार्य ऑनलाइन होते हैं। हम कहां-कहां ध्यान रखें। किसानों की जो भी शिकायत आती है कलेक्टर के साथ मीटिंग कर उसका निपटारा किया जाता है।

भारतीय किसान संघ बोला- कृषि विभाग के अधिकारी भी शामिल, SOG से हो जांच भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष तुलसाराम सिवर कहते हैं- कृषि मंत्री से इस फर्जीवाड़े की जांच एसओजी से करवाने की मांग है।

पिछले दो वर्षों में किसानों ने बीमा कंपनियों को 10 हजार करोड़ का प्रीमियम जमा करवाया। इसमें से 400 करोड़ का क्लेम किसानों को मिला है, जबकि पिछले 2 साल में बड़े पैमाने में किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है। जिन किसानों ने अपनी फसलों का बीमा करवाया, उनमें कम नुकसान दिखाया गया। बिचौलियों ने जिनके फर्जी दस्तावेज तैयार किए, उसमें 80 से 90 प्रतिशत नुकसान दिखाकर क्लेम उठाया गया।



Source link