ब्यावर में सवर्ण समाज ने UGC के नए नियमों के विरोध में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में समाजजनों और 50 से ज्यादा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर जिलाधीश को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने इस विनियम को तत्काल निरस्त करने की मांग की। प्रदर्शन की शुरुआत हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ से हुई। इसके बाद समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि UGC विनियम 2026 शिक्षा के क्षेत्र में समानता के सिद्धांत पर सीधा प्रहार है। यह विनियम समाज को वर्गों में बांटने, वैमनस्य फैलाने और शैक्षणिक संस्थानों में असंतोष उत्पन्न करने वाला है। ‘शिक्षा अधिकार है, दया नहीं’
प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “शिक्षा अधिकार है, दया नहीं।” उन्होंने तर्क दिया कि शिक्षा में किसी भी प्रकार का भेदभाव संविधान की आत्मा के विरुद्ध है। देश को सशक्त बनाने के लिए समरस समाज की आवश्यकता है, न कि कानूनों के माध्यम से समाज को विभाजित करने की साजिश। आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सवर्ण समाज के पदाधिकारियों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि समय रहते UGC विनियम 2026 को वापस नहीं लिया गया, तो आगामी दिनों में आंदोलन को और अधिक तीव्र, व्यापक एवं निर्णायक रूप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन केवल सवर्ण समाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समान शिक्षा और समान अधिकारों में विश्वास रखने वाला सर्व समाज इससे जुड़ेगा।
इस जन-जागरण प्रदर्शन में ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत, कायस्थ और सिंधी समाज सहित सवर्ण समाज के सभी प्रमुख घटकों की प्रभावी भागीदारी रही। कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, किंतु समाज का संकल्प, आक्रोश और चेतावनी स्पष्ट रूप से सामने आई। प्रदर्शन के अंत में सवर्ण समाज प्रतिनिधि सभा ने कहा कि देश को बांटने वाले कानून नहीं, बल्कि देश को जोड़ने वाली नीतियों की आवश्यकता है। उन्होंने समान शिक्षा, समान अवसर और समान कानून को ही राष्ट्रहित का एकमात्र मार्ग बताया।
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ब्यावर कलेक्ट्रेट पर किया हनुमान चालीसा का पाठ: सवर्ण समाज ने घेराव कर यूजीसी के नए नियमों के विरोध में किया प्रदर्शन – Beawar News
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