सुपरफूड कही जाने वाली ब्लूबेरी अब ग्वालियर एवं चंबल के बीहड़ों में उग सकेगी। हालाँकि, यह फल ठंडे इलाकों में पैदा होता है, लेकिन चंबल की तपती गर्मी में भी इसे उगाया जा सकेगा। इसको लेकर राजमाता विजयाराजे सिंधिया एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की ओर से पहल की ग
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इन्हें विवि कैंपस में रोपकर खेती की जा रही है। इसके बाद किसानों को इसकी खेती और मार्केटिंग की मुफ्त ट्रेनिंग देगा। ट्रेनिंग के बाद, विवि ट्रेंड लोगों को पौधे भी देगा। ब्लूबेरी की विदेशों में काफ़ी मांग है। ऐसे में इसकी पैदावार कर किसान निर्यात कर अच्छी कमाई कर सकेंगे।
2 चुनौतियाँ, जिनका वैज्ञानिकों ने निकाला समाधान
- तापमान: यह फसल ठंडी जलवायु वाले देशों में होती है, जहाँ तापमान औसतन 15 से 24 डिग्री के बीच रहता है। समाधान: नेट हाउस में तापमान को नियंत्रित किया जाएगा। सरकारी योजना का लाभ भी दिलाया जाएगा।
- पीएच: इस फसल के लिए 4-5 पीएच वाली अम्लीय मिट्टी ज़रूरी है, जबकि अंचल की मिट्टी क्षारीय है। पीएच लेवल 7.5 से 8.5 है। समाधान: पीएच स्तर मेंटेन करने के लिए मिट्टी में कोकोपिट, रेत, जैविक पदार्थ मिलाएँगे।
खूबी-पैदावार
ब्लूबेरी में एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं। इसकी रोपाई दिसंबर से होती है। फल मार्च से मई के बीच रहता है। ब्लूबेरी का पौधा शुरुआत में 2 साल कम फल देता है। तीसरे साल से 1 पौधे से औसतन 2 किलो फल मिलते हैं। बाजार में इसकी कीमत 600 से 1200 रु. प्रति किलो तक है।
राष्ट्रीय स्तर पर बनेगी ग्वालियर की पहचान
विवि की पहल पर किसानों और छात्रों को इसकी पैदावार और बाजार से जुड़ी जानकारी देने के लिए मुफ्त ट्रेनिंग दी जाएगी। यह प्रयोग सफल रहता है तो ग्वालियर अंचल के किसान ब्लूबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली फसल उगा सकते हैं। इससे राष्ट्रीय स्तर पर शहर की पहचान बनेगी। -डॉ. अरविंद शुक्ला, कुलपति राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विवि



