एक डॉक्टर के रूप में मुझे पता है कि मेरे मरीज चिकित्सकीय सलाह के लिए एआई का उपयोग करते हैं। कभी-कभी इसके संकेत सूक्ष्म होते हैं- जैसे जब वे सुझाए गए टेस्ट्स और संभावित इलाज की लंबी सूची लेकर चले आते हैं। लेकिन अधिकतर तो वे सीधे ही बता देते हैं कि मुझसे मिलने से पहले उन्होंने ‘डॉ. चैटजीपीटी’ से परामर्श लिया था। आंकड़े बताते हैं कि एक-तिहाई से अधिक अमेरिकी स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए लार्ज लैंग्वेज मॉडलों का उपयोग करते हैं। एक एआई शोधकर्ता के रूप में मेरा मानना है कि अगर ठीक से उपयोग किया जाए, तो ये लार्ज लैंग्वेज मॉडल, इंटरनेट के आविष्कार के बाद मरीजों को सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी साधन हैं। लेकिन इनके साथ कुछ नए और अभी तक पूरी तरह न समझे गए जोखिम भी जुड़े हैं- जैसे डॉक्टर और मरीज के संबंधों में दूरी आना या लोगों का चैटबॉट से लगातार प्रश्न पूछते-पूछते एंग्जाइटी के दुष्चक्र में फंस जाना। हेल्थकेयर के इस नए रोमांचक चरण में प्रवेश करते हुए, मैं अपने मरीजों को उनके स्वास्थ्य के लिए एआई के उपयोग के बारे में कुछ बातें बताना चाहता हूं। मरीज डॉक्टर से मुलाकात के लिए बेहतर तैयारी करने को लेकर एआई का उपयोग कर सकते हैं। औसतन एक मरीज को साल भर में अपने डॉक्टर के साथ आमने-सामने की बातचीत के केवल 18 मिनट मिलते हैं। चिकित्सा अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि मरीजों को अपने मेडिकल नोट्स तक पहुंच मिले, लेकिन अधिकांश उन्हें कभी देखते ही नहीं। जो देखते हैं, उन्हें भी प्रायः मेडिकल शब्दावली समझने या यह तय करने में कठिनाई होती है कि क्या महत्वपूर्ण है। इससे भी गंभीर समस्या यह है कि गलत निदान या खारिज की जा चुकी किसी आशंका से जुड़ी त्रुटिपूर्ण जानकारी भी नोट्स में बनी रह सकती है। एआई इस जटिलता से निकलने में मरीजों की मदद कर सकता है। मान लीजिए आप लगातार परेशान करने वाली खांसी के कारण डॉक्टर के पास जा रहे हैं। तब अपने मेडिकल नोट्स खोलें। फिर उन्हें किसी एआई उपकरण में कॉपी करें और अपने वर्तमान स्वास्थ्य तथा खांसी से जुड़ी चिंताओं के अपडेट्स जोड़ दें। इसके बाद चैटबॉट से कहें कि वह इस समस्त जानकारी का संक्षिप्त सार प्रस्तुत करे। अंत में उससे पूछें कि मेरे स्वास्थ्य की इस पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए, आगामी मुलाकात में मुझे अपनी खांसी के बारे में डॉक्टर से कौन-से तीन प्रश्न पूछने चाहिए? एआई उपकरण विशेषज्ञ-स्तर की चिकित्सकीय सलाह देने में सक्षम हैं, लेकिन उनका प्रदर्शन लगभग पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें आपके स्वास्थ्य की संपूर्ण तस्वीर मिले- जैसे आपकी पुरानी बीमारियां, ली जा रही दवाएं और आपकी दिनचर्या। डॉक्टर मेडिकल स्कूल में यह सीखते हैं कि मरीजों द्वारा बताए गए किन लक्षणों और विवरणों पर विशेष ध्यान केंद्रित करना है। यदि आप अपने लक्षणों को अधिक प्रभावी ढंग से व्यक्त करना चाहते हैं, तो किसी चैटबॉट से कह सकते हैं : मेरा इंटरव्यू ऐसे लें जैसे आप डॉक्टर हों। यह प्रश्न-उत्तर प्रक्रिया न केवल आपके विवरणों को अधिक स्पष्ट बना सकती है, बल्कि उन अन्य संभावित स्थितियों को भी अलग करने में मदद कर सकती है, जो अनावश्यक घबराहट पैदा कर सकती हैं। हालांकि लैंग्वेज मॉडल्स की अपने यूजर्स को संतुष्ट करने की प्रवृत्ति, स्वास्थ्य संबंधी प्रश्नों में चिंताजनक है। ‘साइबरकॉन्ड्रिया’ वह स्थिति है, जिसमें सामान्य लक्षणों के बारे में इंटरनेट पर खोज करते-करते व्यक्ति अचानक भयावह संभावनाओं की सुरंग में प्रवेश कर जाता है। चूंकि लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स आपकी अवचेतन की इच्छाओं के अनुरूप ढलने की कोशिश करते हैं, इसलिए वे यह पहचान सकते हैं कि कौन-सी जानकारी आप पर सबसे अधिक प्रभाव डाल रही है और अनजाने में उसी दिशा में अधिक सामग्री प्रस्तुत करने लगते हैं। उदाहरण के लिए, वे तनाव से उत्पन्न साधारण सिरदर्द पर चल रही बातचीत को मस्तिष्क कैंसर की विस्तृत चर्चा की ओर मोड़ सकते हैं! यह कुछ-कुछ वैसा ही है, जैसे सोशल मीडिया के एल्गोरिदम लोगों को निरंतर भयावह सामग्री देखते रहने की आदत की ओर धकेल देते हैं। मैं अपने मरीजों को चैटबॉट्स से सेकंड ओपिनियन लेने में सावधानी बरतने की सलाह देता हूं। यह बीमारी को समझने में मददगार जरूर हो सकता है, लेकिन इलाज को लेकर इस पर अभी पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।
(द न्यूयॉर्क टाइम्स)
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