द्वारका में होगा हेड़ा–माहेश्वरी समाज का चर्तुथ महासम्मेलन: 31 जनवरी और 1 फरवरी को दुनियाभर से हेड़ा बंधु पहुंचेंगे गुजरात – Gujarat News


माहेश्चरी समाज की प्रमुख हेड़ा खांप की कार्यकारिणी मीटिंग और चर्तुथ महासम्मलेन चारधाम में एक भगवान कृष्ण की पवित्र नगरी द्वारिका में होगा। 31 जनवरी और 1 फरवरी को दो दिन का अखिल भारतीय हेड़ा (माहेश्वरी) संगठन का कार्यक्रम पहली बार भव्य और विराट स्तर पर

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संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रहलाद हेड़ा और महासचिव डॉ जी.एल हेड़ा के नेतृत्व में होने वाले इस आयोजन में समाज को संगठित करके देशहित में कार्य करने और सभी बंधुओं की साथ लेकर चलने का संकल्प लिया जाएगा।

इससे पूर्व संगठन के नेतृत्व में अब तक 3 महासम्मेलन पूरी भव्यता और अनुशासन के साथ राजस्थान के पुष्कर में एक बार, महाराष्ट्र के शिरडी धाम और गुजरात के वड़ताल-नाडियाद धाम में संपन्न हो चुके हैं।

चौथे महासम्मेलन की तैयारियां शुरू

देश-विदेश मे बसे हेड़ा परिवारों का ये हर तीसरे वर्ष होने वाला महासम्मेलन है। इस समारोह में गुजरात, राजस्थान, मप्र, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, गोवा, दिल्ली से 1000 से अधिक हेडा बंधु सपरिवार तथा 100 से अधिक मार्गदर्शक, पदाधिकारी तथा कार्यकारिणी सदस्यगण और उनके परिवारों की बहन–बेटियां भी उपस्थित होंगी।

महासचिव डॉ. जीएल हेड़ा ने बताया कि 30 दिसम्बर 2025 तक प्राप्त हुए पंजीकरण वालों को आवास व्यवस्था ( 31 जनवरी प्रात 8 बजे से 2 फरवरी प्रात: 8 बजे तक की ) संगठन की ओर से की जाएगी। इसके लिए न्यूनतम शुल्क मात्र 500 रुपए रखा गया है।

डॉ. हेड़ा ने बताया कि अपनी स्थापना के 8वर्ष में प्रवेश कर चुका हेड़ा संगठन एक विशाल रूप ले चुका है। संगठन के माध्यम से कई सहायता और परोपकार के काम किए जा रहे हैं। समाज के सदस्य अपने हर मंगल कार्य के मौके पर सहयोग राशि देकर अमृत कलश निधि संचय कर रहे हैं। अब संगठन अपना ट्रस्ट भी शुरू हो गया है जिसके माध्यम से हेड़ा संगठन और माहेश्वरी समाज को और ज्यादा मजबूती मिलेगी।

द्वारका नगरी में ही सम्मेलन क्यों

हेड़ा महासम्मेलन के लिए चुनी गई द्वारिका नगरी भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बसाई गई एक प्राचीन और पवित्र भूमि है, जो गुजरात के पश्चिमी तट पर अरब सागर के किनारे स्थित है। यह हिंदू धर्म के चार धामों और सप्त पुरियों में से एक है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने अपने यादव बंधुओं की सुरक्षा के लिए मथुरा छोड़कर विश्वकर्मा से इस भव्य नगरी का निर्माण करवाया था। इसे ‘स्वर्ण द्वारिका’ भी कहा जाता था। यहां द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर) स्थित है।

यह भगवान कृष्ण के वैभव और राजत्व का प्रतीक है। हालांकि, श्रीकृष्ण के देह त्याग के बाद यह नगरी समुद्र में डूब गई थी, जिसके प्रमाण आज भी मिलते हैं। द्वारका भक्तों को मोक्ष प्रदान करने वाली नगरी मानी जाती है।

भगवान श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका की फाइल फोटो।

भगवान श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका की फाइल फोटो।

कार्यकारिणी सभा के निर्णय

द्वारिका महासम्मलेन के लिए तैयारियाें को अंतिम रूप देने के लिए हेड़ा संगठन की कार्यकारिणी सभा का विधिवत आयोजन 12 दिसंबर को किया गया। सभा की अध्यक्षता अध्यक्ष प्रहलाद जी ने की तथा संचालन महासचिव द्वारा किया गया। इस बैठक में हेडा रत्न कालुराम जी और हेडा गौरव सहषकरण जी सहित लगभग 16 सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इस बैठक में संगठन द्वारा आगामी सम्मेलन में ‘हेडा रत्न’ और ‘हेडा गौरव’ सम्मान से दो बंधुओं को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। सभी कार्यकारिणी सदस्य आगामी एक सप्ताह के भीतर नामित व्यक्ति की उपलब्धियों सहित नाम महासचिव को प्रस्तावित करेंगे। नामांकन पर अंतिम निर्णय 18 दिसंबर को होने वाली अगली कार्यकारिणी सभा में बहुमत से लिया जाएगा।

संपर्क प्रमुख स्थान संपर्क नंबर
प्रहलाद राय जी हेड़ा चित्तौड़गढ़ 94143 96081
केदार मल जी हेड़ा भीलवाड़ा 94142 67007
मनोज कुमार जी हेड़ा जलगांव 98509 90369
संजय कुमार जी हेड़ा अकोला 94229 59400
एडवोकेट मुकेश कुमार जी हेड़ा भीलवाड़ा 92145 01892

अब तक प्राप्त दानदाताओं की सूची

सहयोगकर्ता – स्थान
स्व. रामदयाल जी हेडा परिवार, नडियाड (हेडा रत्न कालुराम हेडा, अध्यक्ष प्रहलाद हेडा, मार्गदर्शक अक्षय हेडा द्वारा)
हेडा गौरव सहषकरण जी हेडा, किशनगढ़
कोषाध्यक्ष तुलसीराम जी हेडा, सूरत एवं दामोदर जी हेडा व धनराज जी हेडा परिवार, इचलकरंजी
हेडा रत्न डॉ. प्रकाश जी हेडा, नैराबी, केन्या
माननीय मार्गदर्शक शंकरलाल जी हेडा, गोवा
प्रहलादराय जी हेडा, चित्तौड़गढ़
डॉ जी एल हेडा, दिल्ली
सुनील जी हेडा, हैदराबाद

पिछले महासम्मेलन की यादगार तस्वीरें…



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