लुधियाना कांग्रेस के ‘ऑपरेशन यूनिटी’ से पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु को किनारे कर दिया गया है। यहां शहरी कांग्रेस के दूसरी बार प्रधान बने संजय तलवाड़ ने न तो आशु से मुलाकात की और न ही उनके घर गए।
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यहां तक कि तलवाड़ ने शहर के 5 व गिल विधानसभा क्षेत्र के हलका इंचार्जों के साथ जॉइंट मीटिंग की। खास बात यह है कि इस मीटिंग में आशु के विकल्प के तौर पर पवन दीवान नजर आए।
पवन दीवान चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी के करीबियों में शामिल हैं। तलवाड़ न केवल दीवान के घर गए बल्कि मीटिंग में भी सक्रिय तौर पर नजर आए।
पवन दीवान पहले भी 2 बार लुधियाना वेस्ट से टिकट की दावेदारी कर चुके हैं। हाल ही में हुए उपचुनाव के दौरान भी उन्होंने पार्टी से टिकट की डिमांड की थी।
संजय तलवाड़ के दफ्तर में बैठक में शामिल सुरिंदर डावर, बलविंदर सिंह बैंस, पवन दीवान, राकेश पांडे, कुलदीप सिंह वैद।
संजय तलवाड़ के साथ बैठक में ये नेता हुए शामिल लुधियाना में कांग्रेस पार्टी का दफ्तर टूट चुका है और कानूनी लड़ाई के कारण उसका निर्माण नहीं हो पाया। जिसके बाद शहरी प्रधान संजय तलवाड़ ने टिब्बा रोड पर अपने दफ्तर में ही पार्टी का दफ्तर शिफ्ट कर दिया। मंगलवार को दफ्तर में एक बैठक हुई जिसमें लुधियाना शहरी हलकों के अलावा गिल हलके के हलका इंचार्ज यानि पूर्व विधायक शामिल हुए।
- लुधियाना पूर्वी: संजय तलवाड़ पूर्व विधायक, जिला प्रधान
- लुधियाना उत्तरी: राकेश पांडे, पूर्व मंत्री
- लुधियाना केंद्रीय: सुरिंदर डावर, पूर्व विधायक
- लुधियाना साउथ: बलविंदर सिंह बैंस, पूर्व विधायक (पिछला चुनाव लोक इंसाफ पार्टी के निशान पर लड़ा)
- लुधियाना आत्म नगर: बलविंदर सिंह बैंस, पूर्व विधायक (सिमरजीत सिंह बैंस के प्रतिनिधि के तौर पर)
- लुधियाना पश्चिमी: पवन दीवान, पूर्व जिला प्रधान
- गिल: कुलदीप सिंह वैद, पूर्व विधायक
जहां आशु गुट के हलका इंचार्ज, उन्हें भी नहीं बुलाया हलका लुधियाना पश्चिमी में भारत भूषण आशु लगातार चार चुनाव लड़ चुके हैं। हाल ही में उपचुनाव भी आशु ने ही लड़ा था। इस हलके में कांग्रेस के इंचार्ज भारत भूषण आशु ही हैं। हलका साउथ में आशु गुट के ईश्वरजोत सिंह चीमा ने चुनाव लड़ा था और चुनाव के बाद भी वो बतौर हलका इंचार्ज काम कर रहे हैं।
आत्मनगर में आशु गुट के कमलजीत सिंह कड़वल ने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन उसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी। उपचुनाव के दौरान वो फिर से पार्टी में शामिल हुए लेकिन राजा वड़िंग ने साफ कह दिया था कि उन्होंने कड़वल को पार्टी में शामिल ही नहीं किया। लुधियाना वेस्ट से आशु की जगह पवन दीवान के अलावा लुधियाना साउथ से बलविंदर बैंस और आत्मनगर से सिमरजीत सिंह बैंस को तलवाड़ ने मीटिंग में बुलाया।

आशु से मिलने के लिए संजय तलवाड़ को बॉस से हरी झंडी का इंतजार संजय तलवाड़ की भारत भूषण आशु से व्यक्तिगत तौर पर कोई गिला शिकवा नहीं है, लेकिन प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु में 36 का आंकड़ा हे। आशु ने राजा वड़िंग के साथ बतौर कार्यकारी अध्यक्ष काम करने से भी मना कर दिया था और अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था।
ऐसे में संजय तलवाड़ बिना अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से हरी झंडी मिले आशु को मिलने का दुस्साहस नहीं कर सकते। तलवाड़ को भी इंतजार है कि राजा वड़िंग लुधियाना आएं और उसके बाद ही वो भारत भूषण आशु से मिलने का प्रोग्राम बनाया जा सके।
FIR के बाद लुधियाना नहीं आए वड़िंग तरनतारन उपचुनाव में राज वड़िंग ने पूर्व केंद्रीय मंत्री बूटा सिंह पर अभद्र टिप्पणी कर दी थी। इसके बाद उनके खिलाफ कपूरथला में एससी एक्ट के तहत पर्चा दर्ज हो गया। उसके बाद राजा वड़िंग लुधियाना नहीं आए। इसके अलावा पंजाब SC कमीशन ने भी पुलिस को राजा वड़िंग की गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं।

बूटा सिंह को लेकर वड़िंग ने आपत्तिजनक बयान दिया था।
तरनतारन में जमानत जब्त पर आशु ने दी थी नसीहत तरनतारन चुनाव हारने के बाद भारत भूषण आशु ने पार्टी नेताओं और अन्य लोगों को सलाह दी थी कि इस हार के लिए कार्यकर्ताओं को दोषी न ठहराया जाए। इस हार का मूल्यांकन ईमानदारी के साथ करने की जरूरत है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा था कि कार्यकर्ताओं ने चुनाव में पूरी मेहनत की है।

आशु कांग्रेस में बड़ा हिंदू चेहरा, हाईकमान से सीधी बात भारत भूषण आशु पंजाब कांग्रेस में बड़े हिंदू चेहरे के तौर पर हैं। कांग्रेस सरकार में वो मंत्री रहे और उसके बाद पार्टी ने उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाया। यही नहीं दिल्ली हाईकमान से उनकी सीधी बातचीत है। राहुल गांधी से उनकी भी काफी नजदीकियां मानी जाती हैं। उपचुनाव में राजा वड़िंग के सहमत न होने के बाद भी पार्टी ने उन्हें टिकट दे दी थी।
अब पढ़िए कैसे शुरू हुआ आशु-वड़िंग विवाद…
- विजिलेंस केस में जेल गए थे आशु: राजा वड़िंग पंजाब कांग्रेस में प्रधान आशु कार्यकारी प्रधान थे। सरकार ने विजिलेंस केस में आशु को जेल भेजा था। इसके बाद आशु बाहर आए। कुछ दिनों बाद हुए लोकसभा चुनाव में रवनीत सिंह बिट्टू के पार्टी छोड़ने के बाद आशु ने लुधियाना से टिकट की दावेदारी जताई लेकिन राजा वड़िंग लुधियाना से अपनी टिकट करवाकर ले आए। उसके बाद आशु उनसे नाराज चल रहे थे। आशु लोकसभा चुनाव के दौरान भी कई बैठकों में अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके थे। एक बैठक में तो आशु बीच में गुस्सा होकर चले गए। वहां से आशु और वड़िंग की दूरियां बढ़नी शुरू हो गई।
- बैंस को पार्टी में शामिल करने से आशु नाराज: लोकसभा चुनाव के दौरान राजा वड़िंग ने बैंस ब्रदर्स की लोक इंसाफ पार्टी का विलय कांग्रेस में करवाया और दोनों भाइयों को पार्टी में शामिल करवाया। बैंस को पार्टी में शामिल करने से भी आशु नाराज थे। लुधियाना पश्चिमी के उपचुनाव में जब पार्टी ने आशु को उम्मीदवार बनाया तो राजा वड़िंग पहले इस बात से नाराज थे। बाद में वो आशु के घर उन्हें बधाई देने गए तो आशु उन्हें नहीं मिले। बाद में आशु ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अगर वो बताकर आते तो जरूर मिलते और चाय-पानी पिलाते। उसके बाद राजा वड़िंग ने भी आशु से दूरियां बना ली।]
- कड़वल को पार्टी में शामिल करवाने पर दोनों आमने-सामने: कड़वल को पार्टी में शामिल करवाने को लेकर भी आशु और वड़िंग आमने-सामने हुए। उपचुनाव के दौरान आशु की अगवाई में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कमलजीत सिंह कड़वल को कांग्रेस में शामिल किया, जिस पर वड़िंग ने कह दिया कि उन्होंने कड़वल को पार्टी की सदस्यता नहीं दी। दरअसल कड़वल और बैंस की आपस में नहीं बनती, दोनों आत्म नगर हलके से हैं। इसके बाद विधानसभा चुनाव हारने के बाद आशु ने पंजाब के कार्यकारी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। फिर राजा वड़िंग से पूरी तरह दूरियां बना ली। उन्होंने उसके बाद वड़िंग के साथ कोई भी सार्वजनिक मंच सांझा नहीं किया।