बाड़मेर के जालीपा कपूरड़ी लिग्नाईट परियोजना से प्रभावित किसान बुधवार को जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। अवाप्त जमीन में सरकारी स्कूलों को अन्य स्कूलों में मर्ज नहीं किया जाए। जहां पर आबादी बसाएंगे वहां पर शिफ्ट करने की मांग की। किसानों का आरोप है कि हमारे पूर्वजों ने पढ़ाई के लिए जमीन दान में देकर स्कूल बनवाई थी। कंपनी अन्य स्कूलों में मर्ज करने के लिए सरकार को कह रही है। हमारी मांग है कि जहां पर आबादी बसाएं वहीं पर स्कूलों को शिफ्ट की जाए। आरोप है कि हर कंपनी के आगे प्रशासन मौन है। चाहे बीजेपी की सरकार हो या फिर कांग्रेस की सरकार हो। अब भी तीन साल हो गए। लेकिन हमारी किसी ने कोई सुध नहीं ली। हमने एडीएम को ज्ञापन दिया। उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि कंपनी को बुलाकर लोगों की मांग के अनुसार निर्णय करेंगे। बुधवार को जालीपा कपूरड़ी लिग्नाईट परियोजना से प्रभावित किसान कलेक्ट्रेट में एडीएम से मिलकर ज्ञापन दिया। अपनी मांगों को उनके सामने रखा। वीरमनगर निवासी जालाराम बेनीवाल ने बताया- जालीपा कपूरड़ी माइंस परियोजना से प्रभावित गांव चकधोलका, वीरमनगर, लाखेटाली में सरकारी स्कूलें है। कंपनी सरकार को इन स्कूलों को मर्ज करने का कह रहे है। उससे पहले उन स्कूलों को क्यूं छेड़ते हो। स्कूलों को तोड़ने पहुंचे कंपनी के ठेकेदार किसानों का आरोप है कि कंपनी ने इन स्कूलों को तोड़ने के लिए लोगों को टेंडर दे दिया है। कंपनी तो सामने आती नहीं है और स्थानीय लोगों को तोड़ने का टेंडर दे देती है। चार स्कूल जिसमें सबसे बड़ी स्कूल चक धोलका में जो सीनियर सेकेंडरी है। मालाणी डूडियों की ढाणी, माधल की ढणी, बेनीवालों की ढाणी में प्राइमरी स्कूलें है। इसको लोगों की मांग के अनुरूप आबादी के पास बनाई जाए। न कि अन्य स्कूलों में मर्ज किया जाए। चारो स्कूलों में 1 हजार बच्चे प्रभावित हो रहे है। 15 साल बाद भी स्कूलों को लेकर कोई प्लान नहीं किसानों का आरोप है कि जेएसडब्लू कंपनी ने 2011 में अंतिम अवार्ड जारी किया, लेकिन 15 साल बाद भी स्कूलों को लेकर कोई प्लानिंग नहीं है। कंपनी स्कूलों को अन्य स्कूलों में मर्ज करवाना चाहती है।
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