मूंग दाल के शहर में किसानों पर दोहरी मार:  पहले बारिश ने फसल को किया खराब अब व्यापारियों की मनमर्जी से नहीं मिल रहे मूंग के भाव – Nagaur News

मूंग दाल के शहर में किसानों पर दोहरी मार: पहले बारिश ने फसल को किया खराब अब व्यापारियों की मनमर्जी से नहीं मिल रहे मूंग के भाव – Nagaur News


MSP पर सरकारी खरीद नहीं खुलने से नागौर के किसानों को भरी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पहले बारिश की वजह से खराब हुई फसलें और अब सरकारी अनदेखी की वजह से किसानों को मंडी में व्यापारियों द्वारा लगाई जा रही मनमर्जी की बोली पर ही अपनी उपज बेचनी पड़ रही

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मंडी में अव्यवस्थाओं का आलम

नागौर कृषि मंडी में खरीफ की फसलों की लगातार आवक की वजह से अब अव्यवस्थाओं का आलम है। प्लेटफॉर्म कम पड़ने की वजह से किसानों को अपनी उपज खुले में सड़क पर डालनी पड़ रही है । दूसरी तरफ सरकारी खरीद नहीं होने से व्यापारियों द्वारा लगाई जा रही खुली बोली में किसानों को अपनी उपज ओने पौने भावों में बेचनी पड़ रही है जिसकी वजह से किसानों को लागत भी नहीं मिल पा रही है। सरकार द्वारा मूंग की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768₹ तय की गई है लेकिन फिलहाल नागौर मंडी में न्यूनतम कीमत 3000₹ प्रति क्विंटल से अधिकतम 8000₹ प्रति क्विंटल है।

जगह नहीं होने से खुले में उपज

बारिश ने बिगाड़ा मूंग का रंग

इस बार नागौर के किसानों को बारिश ने दोहरी मार दी पहले ज्यादा बारिश के कारण फसलें खराब हो गई और बाद में जो बची खुची फसलें थीं वो तैयार होने के बाद बारिश होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। फसल तैयार होने के बाद बारिश होने से चमकदार मूंग के लिए पहचान रखने वाले नागौर के मूंग के दाने काले पड़ गए जिसकी वजह से अब मंडी में किसानों को इसका खामियाजा कम दरों में बेचकर भुगतना पड़ रहा है।

अपनी चमक के लिए पहचान रखता है नागौर का मूंग इस बार काले दाने से चमक फीकी

अपनी चमक के लिए पहचान रखता है नागौर का मूंग इस बार काले दाने से चमक फीकी

किसान क्या कहते हैं

किसानों का कहना है कि जिस उपज का भाव 10000₹ प्रति क्विंटल मिलना चाहिए था वो मजबूरी में हमें 3-4 हजार प्रति क्विंटल में बेचनी पड़ रही है। जबकि 6 से 7 हजार प्रति क्विंटल तो किसानों के लागत ही आ रही है। ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान सहना पड़ रहा है। किसान मंडी में भी अव्यवस्थाओं की बात कर रहे हैं समय पर बोली और तुलाई नहीं होने की वजह से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मूंग दाल का शहर

आपको बता दें कि नागौर जिला प्रदेश में सबसे बड़ा मूंग उत्पादक जिला है और पूरे राजस्थान का तकरीबन 43% प्रतिशत मूंग नागौर जिले में होता है और नागौर के मूंग की पहचान चमकदार मूंग के रूप में पूरे भारत में हैं। नागौर जिला भारत के सबसे ज्यादा मूंग उत्पादन वाले जिलों में शामिल है। यह मूंग के उत्पादन और गुणवत्ता के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। मेड़ता, रियां, डेगाना, मारवाड़ मूंडवा, जायल और परबतसर तहसीलें यहां के प्रमुख क्षेत्र हैं।

4 लाख हेक्टेयर में बुवाई

नागौर में इस बार मूंग की खेती लगभग 4 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में हुई है। हालांकि, खराब मौसम और अत्यधिक बारिश के कारण अधिकांश फसल खराब हो गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ। कृषि विभाग के अनुसार, जिले में 2,62,314 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र की मूंग फसल में 33% से 75% तक नुकसान हुआ है।

MSP पर खरीद नहीं

कृषि मंडी सचिव रघुनाथराम ने दैनिक भास्कर को बताया कि इस बार फसल खराबे की वजह से मूंग में ज्यादा वैरायटी हो गई है जो मूंग 7 से 8 हजार प्रति क्विंटल बिक रहा था उसकी 3500 से 8000 के बीच बोली लग रही है। वहीं सरकार द्वारा 1 नवंबर से खरीद की जानी थी बाद में 10 नवंबर का बोला गया लेकिन प्रशासनिक कारणों से सरकारी खरीद अभी शुरू नहीं हो पाई है।



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