साइबर ठग चीनी एप से रख रहे पुलिस पर नजर:  हर एक्शन का मिल जाता है अलर्ट, 9 महीने में 300 करोड़ से ज्यादा ठगे – Rajasthan News

साइबर ठग चीनी एप से रख रहे पुलिस पर नजर: हर एक्शन का मिल जाता है अलर्ट, 9 महीने में 300 करोड़ से ज्यादा ठगे – Rajasthan News


साइबर ठग चीन में बने एक एप से पुलिस को चकमा दे रहे हैं। इस एप के जरिए ठगों को पहले ही अलर्ट मिल जाता है कि पुलिस कौन सा खाता फ्रीज करवाने वाली है। यही कारण है कि राजस्थानियों से 9 महीने में 3 अरब 38 करोड़ रुपए की ठगी हो चुकी है। अभी तक पुलिस महज 2 कर

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यह चौंकाने वाला खुलासा भिवाड़ी पुलिस के हत्थे चढ़े 122 करोड़ की साइबर ठगी के मास्टरमाइंड अंकित शर्मा ने किया है। अंकित बैंक खाते किराए पर लेकर चीन में बैठे ठगों को उपलब्ध करवाता था। उसने पूछताछ में बताया कि ठगी का पैसा जिन खातों में डाला जाता था, वो सभी उस सॉफ्टवेयर से लिंक कर दिए जाते थे। किस खाते में कितने रुपए जमा हो रहे हैं, कितने निकाले गए हैं, इसे लाइव देख सकते हैं।

शिकायत होने के बाद साइबर पुलिस उन खातों को फ्रीज करवाने की कोशिश करती थी तो उस सॉफ्टवेयर (एप) के जरिए पहले ही पता चल जाता था।

भास्कर ने गिरोह के ठगी के पैटर्न की पड़ताल की। पढ़िए संडे बिग स्टोरी में पढ़िए- कैसे साइबर ठग पुलिस से भी 2 कदम आगे चल रहे हैं।

चीन-दुबई से जुड़े तार, राजस्थान में एजेंट पुलिस सूत्रों की मानें तो साइबर फ्रॉड का पूरा संचालन बड़े स्तर पर विदेशी जमीन पर हो रहा है। ज्यादातर गिरोह का चीन, दुबई और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से चल रहे हैं। विदेशों में बैठे ठग भारत में अपने एजेंट तैयार करते हैं। फिर उनको फिक्स कमीशन का लालच देते हैं। ये ठग कौन हैं, इसका कभी पता नहीं चल पाता, क्योंकि ये लोग भारतीय एजेंटों से कभी फोन पर बात नहीं करते। केवल टेलीग्राम और वॉट्सएप से चैट के जरिए ही कॉन्टैक्ट में रहते हैं। हाल ही में भिवाड़ी से पकड़े गए एजेंट ने भी पुलिस पूछताछ में माना है कि वो जिस कंपनी के लिए खाते किराए पर जुटाने का काम कर रहा था उसका संचालन चीन से किया जा रहा था।

LIVE एप के जरिए रखते हैं हर अकाउंट की खबर पड़ताल में सामने आया कि गिरोह का एक इन-हाउस ‘लाइव-एप’ है, जो म्यूल खातों (ठगी का पैसा ट्रांसफर करने में इस्तेमाल होने वाले बैंक खाते) को रियल-टाइम पर ट्रैक करता है। यह गैंग को बताता है कि किस खाते में कितनी रकम अभी आई, किस खाते को पुलिस ने फ्रीज कर दिया है और किस खाते में अभी पैसे निकाले जा सकते हैं।

यही स्क्रीन-लेवल कंट्रोल गिरोह को दो कदम आगे रखता है- मान लीजिए किसी के साथ साइबर ठगी हुई है, अगर वह तुरंत ही इसकी शिकायत करता है तो जल्द से जल्द खाते को फ्रीज करवाकर ठगी की रकम को रिकवर करने की संभावना होती है। लेकिन साइबर ठग अपने एप के जरिए पुलिस से भी दो कदम आगे चल रहे हैं।

ठग जिन भी खातों को किराए पर लेते हैं, उसके मोबाइल नंबर और मेल आईडी का एक्सेस भी ले लेते हैं। यही कारण है कि जब भी पुलिस कार्रवाई के दौरान किसी खाते को फ्रीज करती है, उसपर एक मेल जाता है। ये ठग उस मेल पर भी नजर रखते हैं।

जैसे ही कोई खाता फ्रीज होता है या बैन कैटेगरी में आता है, रकम तुरंत दूसरे खाते में शिफ्ट कर दी जाती है। कई बार तो बैंक द्वारा खाते फ्रीज करने के बावजूद पैसा गायब हो चुका होता है। इसी लाइव एप का एक्सेस भारत में बैठे एजेंट को भी दिया जाता है। उसमें एजेंट ये देख पाते हैं कि उनके दिए गए खाते से कितना पैसा ट्रांसफर हो चुका है और कमीशन कितना बन रहा है।

जल्दी पैसा ट्रांसफर के लिए महंगे रेट पर खरीदते अमेरिकी डॉलर साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक, ठगी के बाद जब भी पैसा किसी खाते में जाता है तो ठगों की कोशिश उसे जल्द से जल्द इंटरनेशनल करेंसी में कन्वर्ट करने की रहती है। किसी बैंक खाते में फ्रॉड की रकम आती, गिरोह उसे फ्रीज होने से पहले ही डॉलर या किसी अन्य करेंसी में बदल लेता। इसके लिए गिरोह महंगे दाम पर भी क्रिप्टो या अमेरिकी डॉलर खरीद लेते हैं। उदाहरण के तौर पर ऐसा भी देखा गया कि जो USDT 93 रुपए में बिकती है, गिरोह 100 रुपए तक चुका कर खरीद लेने को तैयार रहता है, क्योंकि इनका मकसद जल्द से जल्द पैसा ठिकाने लगाने का रहता है।

इसके लिए गैंग OTC/एक्सचेंज-आधारित एप, जैसे- कॉइन एप, शोपे एप, एपटॉप एप आदि का इस्तेमाल करती है। इन एप पर डॉलर या बाकी करेंसी एक्सचेंज तेजी से होता है। जब तक बैंक को पुलिस अलर्ट करती है, गोल्डन ऑवर से पहले ही ठग पूरा पैसा अपने कन्वर्ट कर चुके होते हैं। बाद में इन पैसों को ठग क्रिप्टो करेंसी में बदल लेते हैं।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरोह बड़े पैमाने पर क्रिप्टो-लॉन्ड्रिंग कराकर करोड़ों रुपए विदेश भेज रहे हैं। किराए पर खातों के बदले हर ट्रांजेक्शन पर 3% तक की कमीशन देने का वादा करके उन्हें नेटवर्क का हिस्सा बनाते हैं।

ऐसे खुला मामला? भिवाड़ी पुलिस ने 122 करोड़ से अधिक की ठगी में शामिल गैंग का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपी अंकित शर्मा पुत्र महेंद्र शर्मा को गिरफ्तार किया है। साइबर पोर्टल 1908 शिकायत के बाद इसके तीन साथियों को पुलिस ने 21 सितंबर को गिरफ्तार किया था। इनसे पूछताछ के बाद मास्टरमाइंड अंकित को भिवाड़ी पुलिस पकड़कर लाई है। अंकित यूपी के बागपत का रहने वाला है। वर्तमान में वह दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में रह रहा था। अंकित ने ग्रेजुएशन किया है। पहले वह छोटी-मोटी नौकरियां करता था। बीते 6 से 7 वर्षों से वह साइबर फ्रॉड में सक्रिय है। इसे ही अपना मुख्य पेशा बना चुका है।

पुलिस जांच में सामने आया कि अंकित लंबे समय से कमीशन पर लोगों और फर्जी फर्मों के बैंक खाते, एटीएम और चेक बुक साइबर ठगों को बेचता था। इन खातों के जरिए देशभर में ऑनलाइन ठगी से निकाली गई रकम घुमाई जाती थी। पुलिस ने आरोपी से 38 चेकबुक, 20 एटीएम कार्ड, 9 मोबाइल फोन, 8 क्यूआर कोड, स्वाइप मशीन और 2.5 लाख कैश जब्त किए हैं।

राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर आरोपी के खातों से जुड़ी 183 शिकायतें मिलीं, जिनमें 122 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की पुष्टि हुई है। इससे पहले भिवाड़ी पुलिस इसी नेटवर्क से जुड़े राशिद (28) और अजमत (39) नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनके खातों पर 61 करोड़ की ठगी दर्ज है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और फर्जी खातों के जरिए ठगी में शामिल साइबर नेटवर्क की कड़ी खंगाल रही है।

21 सितंबर को पुलिस ने अंकित के लिए काम करने वाले साइबर ठगों वकील अहमद मेव, पारोली, राशिद मेव और अजमत अली मेव को गिरफ्तार किया था।

21 सितंबर को पुलिस ने अंकित के लिए काम करने वाले साइबर ठगों वकील अहमद मेव, पारोली, राशिद मेव और अजमत अली मेव को गिरफ्तार किया था।

राजस्थान में डेली हो रहे है 406 लोग साइबर ठगी के शिकार राजस्थान में साइबर अपराध के मामले कम होने की बजाय बढ़ते जा रहे हैं। इस वर्ष साइबर अपराध के जनवरी से लेकर सितंबर तक मामलों में 31.52 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। अगस्त 2025 में ही 12 हजार 612 शिकायतें 1930 हेल्पलाइन पर दर्ज करवाई गईं। औसतन हर दिन 406 से अधिक शिकार हो रहे हैं।

1 जनवरी से 30 सितंबर 2025 के बीच 1 लाख 2 हजार 190 शिकायतें दर्ज हुईं। कुल 3.30 अरब रुपए से अधिक की ठगी को अंजाम दिया गया, जिसमें से 2 करोड़ 22 लाख रुपए की राशि रिफंड करवाई गई है।

राज्य पुलिस ने हालांकि ठगों पर नकेल कसने के लिए 95 हजार से अधिक मोबाइल सिम ब्लॉक करवाए हैं। इसके बावजूद साइबर गिरोहों के पास संसाधन और नेटवर्क बहुत बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं।

कौन से एप से ठग नजर रख रहे, जांच चल रही भिवाड़ी एसपी प्रशांत किरण ने बताया कि हाल ही में पकड़े गए आरोपी अंकित शर्मा से पूछताछ में कई बड़े खुलासे हुए हैं। जांच के दायरे में अब कई और लोग आए हैं, जो न सिर्फ राजस्थान बल्कि अन्य राज्यों में भी सक्रिय हैं। इस पूरे नेटवर्क के तार विदेशों तक जुड़े हुए हैं। पुलिस उस सर्वर का भी पता लगा रही है, जिसके जरिए यह फर्जी कंपनी और एप संचालित किए जा रहे थे। पूछताछ में आरोपी अंकित ने इस नेटवर्क का चीन से कनेक्शन होने की बात भी कबूल की है।



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