समुद्री यात्राएं अब बदल रही हैं। कभी जुआघर, आलीशान खान-पान और नाच-गाने के लिए मशहूर यह सेक्टर ‘वेलनेस टूरिज्म’ की ओर मुड़ चुका है। 2026 के रुझान बताते हैं कि अब यात्रियों को सिर्फ छुट्टियां नहीं, बल्कि मानसिक शांति और शरीर को ऊर्जावान बनाने का अनुभव बेचा जा रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है ओरिएंट एक्सप्रेस और सौंदर्य जगत के बड़े नाम गुर्लेन की ‘ओशन रीबर्थ’ स्कीम। अक्टूबर 2026 में पुर्तगाल से बारबाडोस तक चलने वाली यह 14 दिनों की समुद्री यात्रा दुनिया के सबसे बड़े पाल वाले जहाज ओरिएंट एक्सप्रेस कोरिंथियन पर शुरू होगी। इस विशेष अनुभव के लिए शुरुआती किराया 67 लाख रुपए तय किया गया है। कंपनी के अनुसार, यह केवल एक आलीशान जहाज की यात्रा नहीं है, बल्कि ‘पूर्ण स्वास्थ्य यात्रा’ है। इसमें हर यात्री की सेहत की जांच कर उनके लिए खान-पान, शारीरिक गतिविधियों और उपचार की व्यक्तिगत स्कीम तैयार की जाएगी। गुर्लेन ने आधिकारिक बयान में कहा, ‘इस यात्रा का उद्देश्य यात्रियों को स्वास्थ्य का गहरा अनुभव देना है। बीमारियों से बचाव और मानसिक मजबूती को यात्रा का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।’ जहाज पर ध्यान, योगासन और सांस संबंधी वर्कशॉप के साथ-साथ उच्च तकनीक वाले उपचार भी मिलेंगे। गुर्लेन का दावा है कि उनका विशेष उपकरण पहली बार 7 उन्नत सौंदर्य तकनीकों को एक साथ पेश करता है, जो त्वचा और स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। इस यात्रा में मार्गदर्शन के लिए कई विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। इनमें प्रख्यात सौंदर्य विशेषज्ञ अमेली डेमांजे, श्वसन क्रिया विशेषज्ञ आर्थर गुएरिन और आहार एवं पोषण विशेषज्ञ डेबोरा पासुती होंगे। 5,380 वर्ग फुट का गुर्लेन केंद्र इस यात्रा का मुख्य आकर्षण है, जहां भाप स्नान, विश्राम कक्ष और खुले आसमान के नीचे तैरने के लिए खास पूल जैसी सुविधाएं हैं। संपन्न यात्री अब दिखावे वाली सुविधाओं के बजाय ‘परिवर्तनकारी अनुभव’ चाहते हैं, जहां लग्जरी के साथ बेहतर स्वास्थ्य का मेल हो। सालाना 14% की रफ्तार से बढ़ रहा लग्जरी क्रूज बाजार, 2035 में 273 अरब डॉलर का होगा यह बदलाव सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है। वर्जिन वॉयेज और एक्सप्लोरा जर्नीज जैसी बड़ी कंपनियां भी अब मानसिक शांति और ध्वनि उपचार जैसे कार्यक्रमों पर जोर दे रही हैं। बिजनेस रिसर्च इनसाइट की रिपोर्ट के अनुसार यह लग्जरी क्रूज बाजार 13.9% की सालाना रफ्तार से बढ़ रहा है। 2026 में 9.9 अरब डॉलर (करीब 94.7 हजार करोड़ रुपए) और 2035 तक 31 अरब डॉलर के पार जा सकता है। स्वास्थ्य पर्यटन बाजार के 2026 तक 273 अरब डॉलर (करीब 26 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंचने का अनुमान है।
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