गौमूत्र, नीम-सीताफल पत्ते से बनाया ‘फसल अमृत’:  डॉ. अखिल जैन ने बनाया फसलों की बीमारी रोकने फॉर्मूला, 12 राज्यों के 5 लाख किसानों को दे चुके ट्रेनिंग – Chhattisgarh News

गौमूत्र, नीम-सीताफल पत्ते से बनाया ‘फसल अमृत’: डॉ. अखिल जैन ने बनाया फसलों की बीमारी रोकने फॉर्मूला, 12 राज्यों के 5 लाख किसानों को दे चुके ट्रेनिंग – Chhattisgarh News




जब बात किसानों की उन्नति, रसायन-मुक्त खेती और गौ आधारित प्राकृतिक कृषि की आती है, तो खैरागढ़ स्थित मनोहर गौशाला और डॉ. अखिल जैन (पदम डाकलिया) का नाम सामने आता है। अखिल जैन केवल एक गौसेवक नहीं, बल्कि कर्मठ किसान सेवक, शोध प्रेरक और प्रशिक्षक हैं, जिन्होंने अपने कार्यों से देशभर के किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया है। डॉ. जैन ने अब तक छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश सहित 12 राज्यों के 5 लाख से अधिक किसानों को रसायन मुक्त खेती का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा गांव-गांव में किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए उनकी नियुक्ति की गई है। इसके बाद से वे लगातार लोगों को रसायनमुक्त खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। यह प्रशिक्षण ‘फसल अमृत’ नामक एक सूर्य के प्रकाश आधारित प्राकृतिक कृषि फार्मूला तैयार करने और उपयोग करने को लेकर है। यह फॉर्मूला गोमूत्र, गोबर एवं प्राकृतिक तत्वों पर आधारित है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की लागत भी कम करता है। किसानों के बीच इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिससे रासायनिक खेती पर निर्भरता घटी है। मनोहर गौशाला में निर्मित ‘फसल अमृत’ जैविक खेती का एक प्रभावी माध्यम है। इसे तैयार करने के लिए 10 लीटर गौमूत्र, 1 किलो नीम पत्ता और आधा किलो सीताफल पत्ता को मिलाकर इस मिश्रण को 30 दिनों तक धूप में रखा जाता है। प्राकृतिक रूप से तैयार यह घोल फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। जड़ों को मजबूत करता है और मिट्टी की जैविक शक्ति को पुनर्जीवित करता है। वहीं, ‘मनोहर ऑर्गेनिक गोल्ड’ खाद मिट्टी के लिए संजीवनी के समान है। इसे बनाने के लिए 40% किचन वेस्ट, 40% गोबर, 10% गौमूत्र, 5% नीम पत्ता और 5% सीताफल पत्ता को मिलाकर इस मिश्रण को 40 दिनों तक धूप में पकाया जाता है। यह खाद मिट्टी की संरचना सुधारती है, जैविक कार्बन बढ़ाती है और फसलों को दीर्घकालिक पोषण प्रदान करती है। जैन के प्रयास केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं हैं। उनके मार्गदर्शन में फसल अमृत पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों द्वारा रिसर्च और फील्ड ट्रायल किए जा रहे हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। विश्वविद्यालय में धान और कई प्रकार की सब्जियों में शाेध किया गया है। यह शोध कार्य निरंतर जारी है और आने वाले समय में किसानों के लिए और अधिक उपयोगी सिद्ध होने की उम्मीद है। डॉ. जैन अब तक 5 लाख लीटर से अधिक फसल अमृत और ढाई लाख क्विंटल से अधिक मनोहर ऑर्गेनिक गोल्ड खाद का निशुल्क वितरण किसानों को कर चुके हैं। किसानों के लिए किए गए इस कार्य के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर ने डॉ. जैन को ‘उन्नत कृषक सम्मान’ से सम्मानित किया है। उनके कार्यों को शासन स्तर पर भी उच्च मान्यता मिली है। छत्तीसगढ़ शासन ने उन्हें उपराष्ट्रपति के कर-कमलों से ‘राज्य अलंकरण-यति यतनलाल सम्मान’ प्रदान किया है। इसके अतिरिक्त भारत सरकार के एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया द्वारा वर्ष 2024 में विज्ञान भवन नई दिल्ली में उन्हें ‘प्राणी मित्र अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पशु कल्याण और गौसंरक्षण के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों की राष्ट्रीय स्वीकृति है। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए अमेरिकन पीईसी यूनिवर्सिटी द्वारा उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई है। —————— (इन प्रगतिशील किसान से और जानें- 9826174371)



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