पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  घर की तरह ऑफिस, कैम्पस, बाजार में भी खुली सोच रखें

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: घर की तरह ऑफिस, कैम्पस, बाजार में भी खुली सोच रखें


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6 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता

राज्य-व्यवस्था को सही दिशा और ऊंची गति देने के लिए अलग-अलग राजाओं ने खूब प्रयोग किए हैं। अगर हम केवल राम और कृष्ण की बात करें तो अयोध्या और द्वारका के प्रयोग हमें आज भी बड़ी प्रेरणा देंगे। हमारे देश को अगर दुनिया पर छाना है तो हमें जातिवाद की उलझनों से बाहर निकलना पड़ेगा।

राजनीति की तो आदत ही है छेड़छाड़ करते हुए कुछ मुद्दे उछालो, मनुष्य उनमें उलझ जाए और राजनीति सत्ता का खेल खेलती रहे। लेकिन हमारे शास्त्रों ने हमको सिखाया है कि सबसे पहले हम मनुष्य हैं। जैसे भारत के घरों में धीरे-धीरे पति-पत्नी के जेंडर रोल अब समानता और मित्रता में बदल रहे हैं, ऐसे ही ऑफिस, बाजार, कैम्पस में भी खुली मानसिकता रखनी होगी।

खुली मानसिकता का अर्थ स्वच्छंदता नहीं, राजनीति नहीं, बल्कि सबके प्रति स्वीकार्यता और सबका समावेश है। कोई छोटा-बड़ा नहीं होता, बड़ी-छोटी तो नीयत होती है। सब समान हैं। योग्यता को अवसर प्रदान करना ईश्वर की कार्यशैली है। राजनीति उससे तो छेड़छाड़ न करे।

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