पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  कुछ ऐसा करें कि सपने अशांति का कारण न बनें

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: कुछ ऐसा करें कि सपने अशांति का कारण न बनें


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  • Pt. Vijayshankar Mehta’s Column Do Something So That Dreams Do Not Become A Cause Of Unrest

5 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता

नींद भी निराली होती है। कम आए तो बीमारी, ज्यादा आए तो भी बीमारी। नींद का संबंध सपनों से भी है। नींद के सपने बीमारी के लक्षण हैं। जागते हुए सपने देखना संकल्प का प्रतीक है। वैज्ञानिक कहते हैं जब हम सपने देखते हैं तो हमारी आंखों की पुतलियां इधर-उधर घूमती हैं। इसे आरईएम यानी रैपिड आई मूवमेंट कहते हैं।

कुछ वैज्ञानिक ऐसा भी बताते हैं कि पुतलियां यदि भीतर ही भीतर घूमें तो सपने आते हैं या सपनों में ऐसा होता है। अब चूंकि अधपकी नींद सपनों की संतानें हैं और नई-नई बीमारियों को जन्म देने वाली हैं, इसलिए दिन में एक प्रयोग किया जा सकता है। कमर सीधी रखें, आंखें बंद करें, अपनी पुतलियों को भीतर ही भीतर अपने मस्तिष्क में देखें- जैसे छतरी खोलकर भीतर से झांका जा रहा है। उसे सहस्रार चक्र कहते हैं, जहां देखना है। अगर दिन में दो-तीन बार इसका अभ्यास करें तो पुतलियां घूमेंगी नहीं, सपने नहीं आएंगे। या सपनों में पुतलियां नहीं घूमेंगी तो सपने अशांति का कारण नहीं बनेंगे।

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