एन. रघुरामन का कॉलम:  दादी-नानी मां से अपनी एआई स्किल्स को निखारना सीखें!

एन. रघुरामन का कॉलम: दादी-नानी मां से अपनी एआई स्किल्स को निखारना सीखें!




यह 1968 की एक रविवार की शाम थी। उन्होंने गली के छोर से उन्हें चलकर आते देखा। उनकी आंखों ने भांप लिया कि वे अपनी सामान्य अवस्था में नहीं थे। उनके एआई यानी एक्चुअल इंटेलिजेंस ने फौरन उन घटनाओं को परखना शुरू कर दिया, जो उनके दफ्तर में घट सकती थीं। उस दिन उनके बॉस की छुट्टी थी, इसलिए किसी प्रशासनिक खटपट की संभावना नहीं थी। रविवार की शामों को यातायात भी आमतौर पर कम रहता है, इसलिए उन्हें घर लौटने में देरी भी नहीं हुई होगी। बाहर मौसम ठंडा था तो गर्मी से परेशान होने का सवाल भी नहीं था। तो फिर उनकी वैसी चाल-ढाल का क्या कारण हो सकता था? उनकी आंखों ने अपने आंतरिक एआई का इस्तेमाल किया और हमारे समय के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तरह “डीप डाइव’ किया। उन्होंने देखा कि उसकी नई सफेद शर्ट- जो आमतौर पर कड़क और सलीके से रहती थी- दाईं ओर से कुछ ढीली लटक रही थी। ऊपर से दूसरा बटन गायब था; इसी कारण उनका दाहिना हाथ बार-बार छाती के पास उस खाली जगह को ढकने की कोशिश कर रहा था। उनके “मेमोरी कार्ड’ ने एक पुरानी घटना को याद किया, जब उनकी शर्ट उनकी मेज की दराज के नीचे निकली एक कील में उलझकर फट गई थी। उनकी आंखें चमक उठीं। जैसे-जैसे वे घर के पास आते जा रहे थे, उन्होंने समस्या पहचान ली और उसका समाधान भी उनके पास पहले से मौजूद था। हां, उनका एक बटन टूट गया था। वे परेशान थे, क्योंकि वे उस शाम को वही शर्ट पहनकर उनके साथ कहीं बाहर जाना चाहते थे। उनके घर पहुंचते ही उन्होंने उनके हाथ से बैग लेते हुए पहला वाक्य ये कहा कि “चिंता मत करो, आपके कॉफी पीने से पहले ही मैं बटन लगा दूंगी। शुक्र है कि शर्ट को कुछ नहीं हुआ! क्या तीन हफ्ते बाद भी प्यून ने उस कील को ठीक नहीं किया है? कल जब वह आपका टिफिन लेने आएगा तो मैं उसे याद दिला दूंगी।’ उन्होंने ये तमाम बातें बिना कोई सवाल पूछे कह दी थीं। उनका मूड पल भर में बदल गया। उनके एआई ने बिना कुछ कहे ही हर समस्या का समाधान दे दिया था। मैं अपने माता-पिता के बीच घटित इस दृश्य को कभी भूल नहीं पाया। लेकिन आज जब मैं उस सबके मायने समझता हूं तो मुझे उसमें हमारी आज की दुनिया के लिए एक गहरी अनुरूपता और एक समाधान दिखाई देता है। क्या आप भी “एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) डिसरप्शन’ के कारण हर दिन करियर पैनिक बटन दबा रहे हैं? क्या आप एआई अपस्केलिंग की प्रक्रिया में हैं? तो ऊपर दी गई कहानी से यह सीख लीजिए- एआई के ऑनलाइन कोर्स कसरत के नियमों जैसे होते हैं। गलत कोर्स चुन लिया, तो वह आपको उतनी ही बुरी तरह निराश करेगा, जितना कोई नाकाम फिटनेस रेज़ल्यूशन। आपको एआई के बारे में क्या सीखने की जरूरत है, इसे समझने का एक तरीका “ग्रैंडमदर एआई’ से पूछना है। वे ही असली मास्टरक्लास प्रदान करती हैं। वे अपने आचरण से दिखाती हैं कि एआई का सर्टिफिकेट भर हासिल कर लेना कंपनियों की नजर में आपको उसका विशेषज्ञ नहीं बना देता, ठीक वैसे ही जैसे थोड़े वर्कआउट से आप बॉक्सिंग चैम्पियन जैसे नहीं दिखते लग जाते। खुद रिक्रूटर भी तय नहीं कर पाते कि ऑनलाइन कोर्सों से मिलने वाले प्रमाण-पत्रों को कितना महत्व दिया जाए। इसीलिए जरूरी है कि आप अपनी वैल्यू को स्पष्ट रूप से सामने रखें, जैसे मां ने पिता के सामने किया था- इस बात के प्रमाण के साथ कि आपकी एआई क्षमताएं आपके प्रदर्शन को कैसे बेहतर बनाती हैं। उनके पास “एक्चुअल इंटेलिजेंस’ से तैयार किया गया “वर्क-पोर्टफोलियो’ था। एआई की ट्रेनिंग और कोर्स कोई 5-सितारा प्रमाण-पत्र नहीं होते, जो आपको तुरंत नई नौकरी दिला दें या पदोन्नति करा दें। लेकिन ये आपके नैरेटिव का हिस्सा जरूर बन सकते हैं। अपनी चर्चाओं को इस तरह से गढ़ें कि लगे आप लगातार सीखने वाले व्यक्ति हैं, न कि उभरती तकनीक से घबराने वाले- जिसे हमारी दादियों-नानियों की पीढ़ी महज उभरती हुई समस्याएं कहा करती थी। फंडा यह है कि हमारी दादियों-नानियों की एक्चुअल इंटेलिजेंस के बिना आज की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कोई अर्थ नहीं है, क्योंकि अंततः एक अच्छा नैरेटिव आपके आने वाले कल के उस रास्ते को सरल ही बनाता है, जिस पर चलकर आपको एआई में अपना करियर बनाना है।



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