CJI बोले- परीक्षा में नंबर-रैंक सफलता तय नहीं करते:  इसके लिए मेहनत और समर्पण जरूरी; छोटे कस्बों के छात्र भी ऊंचे पदों पर पहुंचे

CJI बोले- परीक्षा में नंबर-रैंक सफलता तय नहीं करते: इसके लिए मेहनत और समर्पण जरूरी; छोटे कस्बों के छात्र भी ऊंचे पदों पर पहुंचे


पणजी17 मिनट पहले

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CJI शनिवार को गोवा के वीएम सालगांवकर लॉ कॉलेज के स्वर्ण जयंती समापन समारोह में बोल रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश (CJI) बीआर गवई ने शनिवार को कहा कि परीक्षा में अंक और रैंक यह तय नहीं करते कि छात्र कितना सफल होगा। उसको सफलता मेहनत, लगन और समर्पण से मिलती है। CJI गोवा के वीएम सालगांवकर लॉ कॉलेज के स्वर्ण जयंती समापन समारोह में बोल रहे थे।

उन्होंने अपने छात्र जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि वे कॉलेज में कम जाते थे, उनके दोस्त उपस्थिति लगाते थे। लेकिन फिर भी पुराने प्रश्नपत्र पढ़कर मेरिट लिस्ट में तीसरे स्थान पर आए। CJI ने कहा,

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मेरे बैच का टॉपर क्रिमिनल लॉयर बना, दूसरे नंबर पर आने वाला साथी हाईकोर्ट जज बना और मैं खुद भारत का मुख्य न्यायाधीश बना हूं। ये उदाहरण है कि रैंक से सफलता नहीं मिलती।

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जस्टिस गवई ने कहा कि देश में कानूनी शिक्षा को मजबूत करना जरूरी है और यह सुधार केवल नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) तक सीमित नहीं रहना चाहिए। CLAT और NLU पर ध्यान ज्यादा जाता है, लेकिन ये भारत की कानूनी शिक्षा का सिर्फ छोटा हिस्सा हैं।

जस्टिस गवई बोले- सफल वकील आदिवासी छात्रों को सपोर्ट करें

CJI गवई ने स्कॉलरशिप की अहमियत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैसे विदेशी विश्वविद्यालयों में स्कॉलरशिप के माध्यम से आदिवासी छात्र पढ़ाई कर पाते हैं, वैसे ही भारत में भी सफल वकीलों को समाज से मिले सहयोग को लौटाते हुए नए छात्रों की मदद करनी चाहिए। उनका कहना था कि इस तरह से युवा वकील आगे चलकर न्याय प्रणाली को और सशक्त बना पाएंगे।

CJI बोले- हाईकोर्ट के जजों को मूट कोर्ट में बैठकर सीखना चाहिए

CJI गवई ने कहा- आजकल मैं मूट कोर्ट में अध्यक्षता नहीं करता, लेकिन जब मैं वकील था और बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट में जज बना, तब अक्सर मूट कोर्ट का हिस्सा बनता था। कई बार छात्रों की दलीलें सुनने के बाद मुझे लगता था कि हाईकोर्ट के वकीलों को भी इन मूट कोर्ट में बैठकर सीखना चाहिए कि कोर्ट में किस तरह से तर्क प्रस्तुत किए जाते हैं।

12 जूनः CJI बोले-अधिकारों की रक्षा के लिए अदालतों की सक्रियता जरूरी

CJI बीआर गवई ने 12 जून को कहा था कि संविधान और नागरिकों के अधिकारों को बनाए रखने के लिए न्यायिक सक्रियता जरूरी है। यह बनी रहेगी, लेकिन इसे न्यायिक आतंकवाद में नहीं बदला जा सकता।

CJI ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के तीनों अंगों विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को उनकी सीमाएं दी गई हैं। तीनों को कानून के अनुसार काम करना होगा। जब संसद कानून या नियम से परे जाती है, तो न्यायपालिका हस्तक्षेप कर सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

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जस्टिस गवई का राजनीति में एंट्री से इनकार: बोले- रिटायरमेंट के बाद कोई पद नहीं लूंगा

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी.आर. गवई ने रिटायर होने के बाद पॉलिटिक्स में एंट्री लेने से इनकार किया था। उन्होंने कहा- CJI के पद पर रहने के बाद व्यक्ति को कोई जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए। 11 मई को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने ये बात कही थी। पूरी खबर पढ़ें…

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