170 दिन बाद चैतन्य जेल से रिहा…जमकर हुई आतिशबाजी:  भूपेश बोले-ED-EOW का दुरुपयोग उजागर हुआ, चैतन्य बोले-कोर्ट का धन्यवाद, बदले की भावना से कार्रवाई हुई – Chhattisgarh News

170 दिन बाद चैतन्य जेल से रिहा…जमकर हुई आतिशबाजी: भूपेश बोले-ED-EOW का दुरुपयोग उजागर हुआ, चैतन्य बोले-कोर्ट का धन्यवाद, बदले की भावना से कार्रवाई हुई – Chhattisgarh News


चैतन्य बघेल रायपुर सेंट्रल जेल से करीब 170 दिन बाद रिहा हो गए हैं। चैतन्य ने कहा कि बदले की भावना से कार्रवाई हुई।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल शनिवार को रायपुर सेंट्रल जेल से करीब 170 दिन बाद रिहा हो गए। दैनिक भास्कर से चैतन्य बघेल ने कहा कि बदले की कार्रवाई की गई है। राजनीति द्वेष में कार्रवाई क

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वहीं दैनिक भास्कर से बातचीत में भूपेश बघेल ने कहा कि यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह से ED, IT और EOW का दुरुपयोग किया गया, वह आज उजागर हो गया है। केंद्र और राज्य सरकार की जांच एजेंसियों का राजनीतिक उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया।

बघेल ने कहा कि उनके बेटे की गिरफ्तारी एक साजिश के तहत की गई थी। उसे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। चैतन्य की रिहाई उसके बेटे के जन्मदिन के दिन हुई, जबकि ED ने चैतन्य के जन्मदिन पर गिरफ्तारी कर खुशी में खलल डालने की कोशिश की थी। आज का दिन उनके लिए बेहद खुशी का है।

चैतन्य की रिहाई से जुड़ी ये तस्वीरें देखिए…

चैतन्य बघेल रायपुर सेंट्रल जेल से करीब 170 दिन बाद रिहा हो गए।

रायपुर सेंट्रल जेल के बाहर कार से भूपेश बघेल अपने बेटे चैतन्य को रिसीव करने खुद कार चलाकर पहुंचे।

रायपुर सेंट्रल जेल के बाहर कार से भूपेश बघेल अपने बेटे चैतन्य को रिसीव करने खुद कार चलाकर पहुंचे।

रायपुर सेंट्रल जेल के बाहर चैतन्य की रिहाई पर कांग्रेसी ढोल-नगाड़े बजवाकर डांस कर रहे हैं।

रायपुर सेंट्रल जेल के बाहर चैतन्य की रिहाई पर कांग्रेसी ढोल-नगाड़े बजवाकर डांस कर रहे हैं।

भूपेश बघेल बोले- सत्य की जीत हुई

बेटे चैतन्य को जमानत मिलने पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि सत्य की जीत हुई है। सत्य परेशान हो सकता है। पराजित नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह से ED, IT और EOW का दुरुपयोग किया गया, वह आज उजागर हो गया है। समर्थकों ने पटाखे फोड़कर खुशी जताई।

वहीं चैतन्य के वकील फैजल रिजवी ने बताया कि जबरन सबूत बनाकर चैतन्य की गिरफ्तारी की गई। उन्हें EOW में 2 लाख और ED में 1 लाख के मुचलके पर जमानत मिली है। चैतन्य बघेल की संलिप्तता और लाभ का कोई प्रमाण नहीं है कि घोटाले के पैसे से उन्हें मुनाफा हुआ हो। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी है।

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में हुई थी गिरफ्तारी

दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और छत्तीसगढ़ एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB/EOW) की ओर से दर्ज केसों में मिली है। ED ने चैतन्य को पिछले साल जुलाई में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया था, जबकि भ्रष्टाचार के मामले में सितंबर में ACB ने उन्हें तब गिरफ्तार किया जब वे पहले से ही जेल में थे।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। ED का आरोप है कि चैतन्य बघेल इस पूरे शराब सिंडिकेट के संरक्षक थे। उन्होंने करीब 1,000 करोड़ रुपए का लेन-देन व्यक्तिगत रूप से संभाला।

इसके अलावा ACB का दावा है कि चैतन्य बघेल को हिस्से के तौर पर 200 से 250 करोड़ रुपए मिले और इस पूरे घोटाले की कुल रकम 3,200 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है।

हाईकोर्ट ने DGP को लगाई फटकार

शराब घोटाला केस में हाईकोर्ट ने सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल को अरेस्ट नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को भागने का मौका दिया, जिसके खिलाफ पहले से ही परमानेंट वारंट जारी था। पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के बजाय केवल उसका बयान दर्ज किया और उसे जाने दिया, जिसके बाद वह फरार हो गया।

कोर्ट ने इसे “कानून का गंभीर उल्लंघन” (Grave violation of law) माना है। साथ ही राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को आदेश दिया है कि वह व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देखें। उन्हें यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि राज्य के सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।

‘चुनिंदा कार्रवाई’ की नीति अपनाई

हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल के बयान पर भरोसा तो किया, लेकिन जब वही आरोपी पुलिस के सामने था और उसके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट भी मौजूद था, तब पुलिस ने उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया? उसे खुलेआम घूमने की अनुमति देना यह दर्शाता है कि जांच पारदर्शी नहीं है। कानून का ऐसा ‘चुनिंदा इस्तेमाल’ न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है।

अब जानिए चैतन्य बघेल तक कैसे पहुंची ED ?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के वकील सौरभ पाण्डेय ने बताया था कि शराब घोटाले का जो इन्वेस्टिगेशन चल रहा था उसमें एविडेंस मिले हैं, जिसमें चैतन्य बघेल ने बहुत सारे पैसे को लेयरिंग की है। 1000 करोड़ का लेनदेन किया है। पप्पू बंसल ने अपने बयान में खुलासा किया है।

शराब के घोटालों के पैसों को चैनलाइज्ड करके चैतन्य बघेल तक पहुंचाया जाता था। लिकर स्कैम का पैसा अनवर ढेबर के जरिए दीपेंद्र चावड़ा फिर वह पैसा केके श्रीवास्तव और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल औ उसके बाद चैतन्य बघेल के पास यह पैसा पहुंचता था।

सौरभ पाण्डेय ने बताया था कि शराब घोटाले में जिन लोगों का इन्वॉल्वमेंट है उन लोगों के आपस में कनेक्शन है। अनवर ढेबर से मोबाइल चैट और रिकॉर्डिंग मिली है। चैतन्य बघेल तक पैसा पहुंचाया गया है।

पूर्व सीएम के बेटे इसलिए हुई गिरफ्तारी- चैतन्य के वकील

बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी ने बताया था कि पप्पू बंसल के बयान को आधार मानते हुए चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी की गई है जो सही नहीं है। पप्पू बंसल के खिलाफ नॉन बेलेबल वारंट है और वह बाहर घूम रहे हैं। किसके दबाव में उन्होंने इस तरह का बयान दिया है यह आप समझ सकते हैं।

रिजवी ने कहा था कि 2022 से शराब घोटाले मामले में जांच चल रही है, और आज चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी तक एक भी समन चैतन्य बघेल को नहीं दिया गया है। मार्च में जब उनके घर में रेड की गई थी तब उनके सभी डिजिटल डिवाइस जब्त कर लिए थे। जो डॉक्यूमेंट एजेंसी ने मांगी थी, उन्हें सभी डॉक्यूमेंट को चैतन्य के जरिए दिया गया है।

वकील ने कहा था कि ED की जांच में चैतन्य बघेल ने लगातार सपोर्ट किया है, जांच में भी शामिल हुए हैं लेकिन एक बार भी उनका बयान नहीं लिया गया। सीधे उनकी अरेस्टिंग की गई है। कानून को ताक पर रखकर चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया गया है, उनका अपराध सिर्फ यही है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे हैं।

जानिए क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला ?

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज है।

ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।

A, B और C कैटेगरी में बांटकर किया गया घोटाला

A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन

2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद के सालों में 100 रुपए कमीशन लिया जाता था। कमीशन को देने में डिस्टलरी संचालकों को नुकसान ना हो, इसलिए नए टेंडर में शराब की कीमतों को बढ़ाया गया। साथ ही फर्म में सामान खरीदी करने के लिए ओवर बिलिंग करने की राहत दी गई।

B: नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों से बिकवाना

  • डिस्टलरी मालिक से ज्यादा शराब बनवाई। नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री करवाई गई। नकली होलोग्राम मिलने में आसानी हो, इसलिए एपी त्रिपाठी के माध्यम से होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता को तैयार किया गया। होलोग्राम के साथ ही शराब की खाली बोतल की जरूरत थी। खाली बोतल डिस्टलरी पहुंचाने की जिम्मेदारी अरविंद सिंह और उसके भतीजे अमित सिंह को दी गई।
  • खाली बोतल पहुंचाने के अलावा अरविंद सिंह और अमित सिंह को नकली होलोग्राम वाली शराब के परिवहन की जिम्मेदारी भी मिली। सिंडिकेट में दुकान में काम करने वाले और आबकारी अधिकारियों को शामिल करने की जिम्मेदारी एपी त्रिपाठी को सिंडिकेट के कोर ग्रुप के सदस्यों ने दी।
  • शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिलों को चुना गया। शराब खपाने का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में ना चढ़ाने की नसीहत दुकान संचालकों को दी गई। डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब बिना शुल्क अदा किए दुकानों तक पहुंचाई गई। इसकी एमआरपी सिंडिकेट के सदस्यों ने शुरुआत में प्रति पेटी 2880 रुपए रखी थी। इनकी खपत शुरू हुई, तो सिंडिकेट के सदस्यों ने इसकी कीमत 3840 रुपए कर दी।
  • डिस्टलरी मालिकों को शराब सप्लाई करने पर शुरुआत में प्रति पेटी 560 रुपए दिया जाता था, जो बाद में 600 रुपए कर दिया गया था। ACB को जांच के दौरान साक्ष्य मिला है कि सिंडिकेट के सदस्यों ने दुकान कर्मचारियों और आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 40 लाख पेटी से अधिकारी शराब बेची है।

C: डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को कम/ज्यादा कर अवैध धन उगाही करना

  • देशी शराब को CSMCL के दुकानों से बिक्री करने के लिए डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को सिंडिकेट ने 8 जोन में बांटा। इन 8 जोन में हर डिस्टलरी का जोन निर्धारित होता था। 2019 में सिंडिकेट की ओर से टेंडर में नए सप्लाई जोन का निर्धारण प्रतिवर्ष कमीशन के आधार पर किया जाने लगा।
  • एपी त्रिपाठी ने सिंडिकेट को शराब बिक्री का जोन अनुसार विश्लेषण मुहैया कराया था, ताकि क्षेत्र को कम-ज्यादा करके पैसा वसूल किया जा सके। इस प्रक्रिया को करके सिंडिकेट डिस्टलरी से कमीशन लेने लगा।
  • EOW के अधिकारियों को जांच के दौरान साक्ष्य मिले हैं कि तीन वित्तीय वर्ष में देशी शराब की सप्लाई के लिए डिस्टलरीज ने 52 करोड़ रुपए पार्ट C के तौर पर सिंडिकेट को दिया है।



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