आम मुद्दे

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  सुख को शांति से जोड़ने की कला ही अध्यात्म है

Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column: Spirituality Is Connecting Happiness With Peace 6 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता भाग्य का सबसे हठीला ढंग यही है कि वह समय पर बदल ही जाता है। अच्छे-अच्छे लोगों के जीवन

एन. रघुरामन का कॉलम:  ‘एफडीपी’ अपनाने से बच्चों की सफलता पक्की है

परीक्षाएं हों या गर्मियों की छुट्टियां, स्कूल के दिन हों या वीकेंड, चाहे बाहर बारिश हो रही हो या अचानक बिजली चली जाए, लेकिन शाम 7.30 बजे हमारा डिनर टाइम तय था। हम उस फैमिली गैदरिंग में न आने का

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  श्रोता बनने की बारी आए तो अच्छे श्रोता बनिए

अच्छा सुनने के लिए अच्छा होना ही पड़ेगा। पक्षीराज गरुड़ ने जब काकभुशुंडि जी से निवेदन किया कि कथा सुनाइए तो तुलसीदास जी ने गरुड़ जी की वाणी का वर्णन किया है- सुनत गरुड़ कै गिरा बिनीता, सरल सुप्रेम सुखद

एन. रघुरामन का कॉलम:  डेटिंग की अर्थव्यवस्था ‘सोल्जर पेमेंट’ से ‘ब्यूटी टैक्स’ तक बढ़ चुकी है

Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column The Dating Economy Has Evolved From ‘soldier Payments’ To ‘beauty Tax’ 6 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु डेट का बिल किसे चुकाना चाहिए, इस पर बहस उतनी ही पुरानी है जितनी

एन. रघुरामन का कॉलम:  जो रोमांस देखे जा सकने वाले जेस्चर्स पर निर्भर नहीं होता उसकी उम्र लम्बी होती है

मुंबई में पवई झील के प्रोमेनेड की कुछ शामें आमतौर पर शांति से भरी होती हैं। लेकिन उस शाम वो जगह निष्ठा की एक गहरी मिसाल की गवाह बनी। सत्तर से अस्सी वर्ष की आयु के कुछ सेवानिवृत्त व्यक्ति अपनी

चेतन भगत का कॉलम:  जिंदगी का स्वाद किसी भी तरह के नशे से बेहतर है!

एक सकारात्मक तथ्य सुनें : दुनिया अब पहले की तुलना में शराब का कम सेवन कर रही है। शराब उन चीजों में मानी जाती है, जिस पर अगर कड़ी पाबंदियां, नियंत्रण और टैक्स न लगाए जाएं, तो मनुष्य उस पर

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  चरित्र अंतिम प्राथमिकता बना इसलिए लोग देह पर टिक गए

Hindi News Opinion Vijay Shankar Mehta Column: Character Priority Lost, People Focused On Body 6 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता दुनिया में तीन ही समस्याएं हैं। पहली, पैसा होना या न होना। दूसरी, पुरुष के जीवन में स्त्री

मेघना पंत का कॉलम:  जन्म देने वाली महिलाओं को कैसे देखें-​बिना उनसे नजरें फेरे?

“कब प्रेग्नेंट होओगी तुम? एज का तो ध्यान है ना? करियर तो तुम्हारा ठीक ही चल रहा है, फिर फैमिली कब बनाओगी? इतनी पतली हो, बच्चा कैसे होगा?’ समाज को प्रेग्नेंसी पसंद है। या बेहतर हो अगर कहें, समाज को

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  बच्चों को समझाया जाए कि वास्तविकता से कटें नहीं

दुनिया के सारे ही चिराग रोशनी देने के साथ-साथ धुआं भी उठाते हैं। प्रकाश पाना चाहते हैं तो धुएं की तैयारी भी रखिए। केवल सूर्य का प्रकाश ऐसा है, जिसमें धुआं नहीं होता। और उसमें जो तपिश है, वो भी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  कथा सुनने से चुनौतियों से निपटने की शक्ति मिलती है

Hindi News Opinion Pandit Vijay Shankar Mehta Column: Katha Gives Power To Face Challenges 6 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता इन दिनों कथाओं में बहुत भीड़ रहने लगी है। लेकिन सबसे बड़ा प्रभाव कथा का क्या होता है-

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