धनबाद के केंदुआडीह के राजपुत मोहल्ले में 3 दिसंबर को गैस रिसाव हुआ। गैस रिसाव का प्रभाव ऐसा हुआ कि देखते ही देखते 28 साल की महिला प्रियंका देवी की उसी दिन मौत हो गई। घटना के दूसरे दिन एक और महिला की मौत हो गई।
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वहीं जय पंडित (2), अर्चना कुमारी (16), मेघा कुमारी (14), सोनाली शर्मा, पिंकी शर्मा, संगीता शर्मा और मो. कासिम समेत कई लोग गंभीर हो गए। अब इस घटना को 13 दिन हो चुके हैं। इन 13 दिन के बाद भी इस परेशानी का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
जांच के क्रम में पता चला कि रिसने वाली गैस कार्बन मोनोआक्साइड है। बंद पड़ी भूमिगत केंदुआडीह कोलियरी के 13 और 14 नंबर सिम से यह रिसाव अब भी जारी है। कार्बन मोनोआक्साइड की मात्रा 300 से 700 पीपीएम तक रिकॉर्ड की गई है, जो खतरनाक है।
तकनीशियन गलियों में घूमकर पीपीएम की माप ले रहे हैं, लेकिन गैस की मात्रा कभी कम तो कभी अचानक बढ़ती दिख रही है।
इस गैस रिसाव के दायरे में लालो गोस्वामी, राजेश कुमार शर्मा, नजमा खातून, शंकर पंडित, विजय पंडित, नजमा खातून, अंकित पंडित, जयराम सिंह, लोहा सिंह, कासिम खान, बौधू पंडित, जीतन पंडित, रवि पंडित सहित लगभग 40 घर प्रभावित बताए गए हैं। गैस का प्रभाव अब आसपास के इलाके में भी हो रहा है।
जमीन में आया दरार, रिसने लगी कार्बन मोनोआक्साइड
घटना के बाद बीसीसीएल प्रबंधन एक्टिव हुआ। दूसरे दिन से जांच शुरू की। जांच में पता चला कि करीब 15 वर्षों से बंद पड़ी कोलियरी में गैस जमा थी, जो जमीन क्रैक कर बाहर निकल रही है। लगभग 400 फीट दायरे में गैस का प्रभाव देखा गया है। दरअसल यह गैस भूमिगत केंदुआडीह कोलियरी के 13 और 14 नंबर सिम से हो रही है।
कार्बन मोनोआक्साइड के प्रभाव की वजह से लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और सिर भारी होने की शिकायत हो रही है। शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन एक्टिव हुआ। उपायुक्त ने अधिकारियों के साथ प्रभावित जगहों का दौरा किया, मेडिकल टीमों को 24 घंटे की निगरानी पर रखा और आसपास के अस्पतालों को तत्काल तैयारी बढ़ाने का निर्देश दिया है।
गलियों में घूमकर मापा जा रहा गैस की स्थिति
इधर बीसीसीएल की तकनीकी टीम भी लगातार मीटर लगाकर गैस के स्तर की जांच कर रही है। तकनीशियन गलियों में घूमकर पीपीएम की माप ले रहे हैं, लेकिन गैस की मात्रा कभी कम तो कभी अचानक बढ़ती दिख रही है। बीते 13 दिनों में जांच के बाद जो बातें सामने आई हैं, उसके मुताबिक कार्बन मोनोऑक्साइड के रिसाव से वातावरण खतरनाक तरीके से दूषित हो गया है।

मेडिकल टीमों को 24 घंटे की निगरानी पर रखा और आसपास के अस्पतालों को तत्काल तैयारी बढ़ाने का निर्देश दिया है।
50 पीपीएम तक गैस की मात्रा को सामान्य माना जाता है, लेकिन ओल्ड जीएम बंगला समेत रिसाव वाली जगहों पर यह 800 पीपीएम तक पहुंच गया। बंगला के पास मिट्टी से भराई की गई। तब भी वहां गैस का दबाव करीब 200 पीपीएम था। जहरीली गैस से इंसानों के साथ-साथ जानवरों की जान भी आफत में पड़ गई है।
केंदुआ चिल्ड्रन पार्क के पास झाड़ियों में कुत्ते के 4 पिल्ले भी गुरुवार की सुबह मरे मिले। जानकारी के अनुसार जिस राजपूत बस्ती से गैस का रिसाव शुरू हुआ वह करीब 45 वर्षों से अग्नि व भू-धंसान से प्रभावित है। 500 घरों में करीब तीन हजार लोग रहते हैं। इलाके में छोटे-मोटे 40 से ज्यादा हादसे हो चुके हैं।
पीएमओ ने लिया, पहुंची केंद्रीय जांच टीम
स्थानीय स्तर पर जांच जारी है। वहीं यह मामला पीएमओ तक पहुंचा। जहां से टीम जांच को पहुंची। कोल इंडिया के चेयरमैन सनोज कुमार झा के नेतृत्व में टीम पहुंची। उन्होंने तकनीकी टीमों के साथ विस्तृत निरीक्षण किया। जांच के बाद उन्होंने इसे अत्यंत गंभीर स्थिति बताते हुए कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए अस्थायी स्थानांतरण आवश्यक है। चेयरमैन ने बीसीसीएल को निर्देश दिया कि पूरे क्षेत्र की तकनीकी मैपिंग, गैस के स्रोत की पहचान और कंट्रोलिंग मेकनिज्म को तेज किया जाए।
इसके बाद रांची से सीएमपीडीआई की हाई-टेक टीम पहुंची। ड्रोन सर्वे, बोरहोल लोकेशन, गैस फ्लो टेस्ट और संभावित लीक पॉइंट को खोजने का काम किया जा रहा है। पर तमाम प्रयासों के बाद भी 12 दिनों के बाद भी गैस रिसाव पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आया है।

मामला पीएमओ तक पहुंचा। जिसके बाद केंद्रीय कोयला मंत्रालय की टीम जांच को पहुंची।
हेल्थ कैंप कर रहा काम पर ग्रामीणों में है नाराजगी
घटना के बाद से स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस का असर उनके स्वास्थ्य पर सीधे पड़ रहा है। गांव की रहने वाली गुलाब देवी बताती की रोज किसी न किसी को सिरदर्द, उल्टी, चक्कर आने की समस्या हो रही है। हर घर में लोग बीमार पड़ रहे हैं। जब तक गैस पूरी तरह बंद नहीं होगी, हम किसी भी जगह शिफ्ट नहीं होंगे। जिस जगह भेजने की बात हो रही है, वहां जंगल है। न रोजगार है, न कोई सुविधा।
ग्रामीण मोहम्मद साजिद आरोप लगाते हैं कि बीसीसीएल गैस का हवाला देकर लोगों को डराने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि हमारी पहली और आखिरी मांग गैस बंद करने की है। 12-13 दिन में कोई ठोस काम दिखाई नहीं दे रहा। शिफ्ट करने के लिए बेलगड़िया में जो कॉलोनी बनाई गई है, वहां का कमरा इतना छोटा है कि एक जानवर भी नहीं रह सकता। वहां न कनेक्टिविटी है, न रोजगार। अधिकारी एक रात वहां रहकर दिखा दें, फिर हम भी शिफ्ट हो जाएंगे।
वहीं सोनू रवानी भी प्रशासन और बीसीसीएल के इरादों पर सवाल उठाते हैं। उनके मुताबिक यह सिर्फ विस्थापन की तैयारी है। नीचे कोयला है और बड़ा प्रोजेक्ट बनना है, इसलिए हमें हटाना चाहते हैं। लेकिन जहां भेजा जा रहा है, वह जगह रहने लायक नहीं है। पहले गैस को रोकें, फिर बात करें।

पीड़ित परिवारों को बेलगड़िया टाउनशिप, करमाटांड़ अथवा अन्य चिह्नित स्थानों पर पुनर्वासित करना ही अंतिम विकल्प है।
गैस रिसाव बंद करना संभव नहीं, पुनर्वास ही एकमात्र विकल्प
जिला प्रशासन, बीसीसीएल प्रबंधन, एनडीआरएफ की जांच और एक्सपर्ट की एकराय है। विशेषज्ञोंके मुताबिक पुरानी भूमिगत गैसरिसाव पर पूर्ण नियंत्रण संभव नहीं है। पीड़ित परिवारों को बेलगड़िया टाउनशिप, करमाटांड़ अथवा अन्य चिह्नित स्थानों पर पुनर्वासित करना ही अंतिम विकल्प है। शिफ्टिंग के लिए स्थानीय लोगों को मानसिक तौर पर तैयार होना पड़ेगा। लोगों के हक के लिए जिला प्रशासन तैयार है। प्रशासन की इच्छा है कि लोग बेलगड़िया में शिफ्ट हों।
शिफ्ट होने पर मालिकाना हक व 99 वर्ष की लीज
डीसी आदित्य रंजन ने कहा कि बेलगड़िया को प्राइम सिटी बनाया जाएगा। 10 एकड़ में एक फैक्ट्री बन रही है। इससे रोजगार के अवसर मिलेंगे। आवासों के मेंटेनेंस पर 80 करोड़ रु. खर्च की योजना है। मार्केट काम्प्लेक्स, स्कूल और कॉलेज बनाए जा रहे हैं।
यातायात की सुविधा के लिए फोरलेन सड़क बनाई जाएगी। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट व पार्क की सुविधा मिलेगी। वहीं शिफ्ट होने वालों को ढाई लाख रुपए, नई स्कीम के तहत 99 साल की लीज एग्रीमेंट के साथ मालिकाना हक दिया जाएगा।



