भागीरथपुरा दूषित जल मामले को लेकर एक माह बीत चुका है, लेकिन अब भी बोरिंगों में आ रहा पानी पीने योग्य नहीं है। लाइन डालने के खोदी गई मिट्टी में से ड्रेनेज की बदबू आ रही है। क्षेत्र की करीब 500 मीटर लंबी मेन लाइन का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन अब भी मात्र 30 फीसदी क्षेत्र में ही नलों से पानी सप्लाय किया जा रहा है। साथ ही पानी को पीने में उपयोग नहीं करने के लिए अनाउंसमेंट किया जा रहा है। क्षेत्र में अब भी टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। बुधवार को निगम की टीम ने जांच के लिए पानी के सैंपल लिए। पार्षद कमल वाघेला ने बताया कि क्षेत्र में पहले ही 60 फीसदी पुरानी पाइपलाइन बदली जा चुकी है, जबकि शेष 40 फीसदी लाइनों को बदलने का काम जारी है, जो 7-8 दिन में पूरा हो जाएगा। हर दिन टीम पानी की जांच कर रही
क्षेत्र में फिलहाल मेन चौराहा से शिव रफेल तक की गली में काम चल रहा है। यहां पानी और ड्रेनेज की लाइन डाली जा चुकी है। चैंबर्स के लिए निकाली जा रही मिट्टी में भी सीपेज की गंध आ रही है। शिव रफेल से आगे की गलियों में सड़क की चौड़ाई कम है, इससे दिक्कत आ रही है। जेसीबी भी अंदर नहीं जा पाती है। क्षेत्र में निगम टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति कर रहा है। कुछ दिन पहले ही केवल एक-तिहाई क्षेत्र में नलों के माध्यम से पानी की सप्लाई शुरू की गई है, जबकि शेष इलाके में अब भी टैंकरों से पानी दिया जा रहा है। रोज निगम की टीम क्षेत्र में पानी की जांच भी कर रही है। भागीरथपुरा दूषित जल मामला एक नजर में नई टंकी बनाई, लेकिन हौज में भर गया गंदा पानी
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- भागीरथपुरा: बोरिंग ही नहीं मिट्टी से भी ड्रेनेज की बदबू, 30% इलाके में ही नलों से सप्लाय शुरू – Indore News
भागीरथपुरा: बोरिंग ही नहीं मिट्टी से भी ड्रेनेज की बदबू, 30% इलाके में ही नलों से सप्लाय शुरू – Indore News
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