लकड़ी से बनने वाले क्राफ्ट, फर्नीचर, प्लाइवुड, लैमिनेटेड विनियर लंबर (एलवीएल) से जुड़े वुड विनियर उद्योगों की स्थापना में अब वन विभाग रोड़ा नहीं बनेगा।
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वन विभाग की ओर से जिला स्तर पर डीएफओ इन उद्योगों को एनओसी जारी करेंगे। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत वन विभाग के एसीएस अशोक बर्णवाल ने इस संबंध में प्रदेश के सभी डीएफओ कार्यालयों को निर्देश जारी किए हैं।
जिला स्तर पर डीएफओ उद्योगों को एनओसी जारी करेंगे
राज्य शासन की ओर से वन बल प्रमुख विजय कुमार अंबाड़े को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत वुड विनियर उद्योगों को एनओसी जारी करने के व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए थे। लेकिन, जब वन बल प्रमुख ने इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया तो एसीएस ने अपने स्तर से सीधे डीएफओ को निर्देश जारी कर दिए हैं।
एसीएस की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि मप्र काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम, 1984 के तहत ऐसे उद्योग या प्रसंस्करण संयंत्र, जो स्थानीय प्रजातियों की लकड़ी के गोल लट्ठों का प्रयोग नहीं करते हैं और आरा-मशीनों का इस्तेमाल नहीं करते हैं। उनके लिए वन विभाग से लाइसेंस लेने में छूट प्रदान की जा सकती है। क्योंकि, ऐसे उद्योगों के लिए लाइसेंस लेना जरूरी नहीं माना गया है।



