ड्रम से टुकड़े निकालते पुलिस कर्मचारी। इनसेट में आरोपी पति शमशेर शेरा, पत्नी कुलदीप कौर और मृतक वरिंदरपाल की फोटो।
पंजाब के लुधियाना में 8 साल पुराने दोस्त शमशेर उर्फ शेरा ने मुंबई से आए दोस्त वरिंदरपाल की हत्या कर दी। फिर लकड़ी काटने वाली आरी से उसके शरीर के 6 टुकड़े किए। सिर-धड़ से अलग कर दिया। इसके बाद लाश के टुकड़े सफेद ड्रम और बाल्टी में डालकर खाली प्लाट में फें
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हालांकि जब युवक घर नहीं पहुंचा तो परिवार पुलिस तक पहुंच गया। पुलिस गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज कर तलाश कर ही रही थी कि लाश मिल गई। पुलिस ने तुरंत आसपास के CCTV खंगाले तो बाइक पर सफेद ड्रम में लाश के टुकड़े लेकर जाता दोस्त और उसकी पत्नी कुलदीप कौर नजर आ गए। इसके बाद वह फरार हो पाते, पुलिस ने उन्हें आधे रास्ते से ही दबोच लिया। इसके बाद पूरे हत्याकांड से पर्दा उठ गया।
सालों पुरानी दोस्ती अचानक कत्ल तक कैसे पहुंची, कत्ल के बाद सबूत मिटाने के लिए क्या-क्या किया, हत्या के मुख्य आरोपी के बेटों और पत्नी ने मर्डर में क्या रोल निभाया? जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट…
वरिंदरपाल की हत्या और लाश खुर्द-बुर्द करने के आरोप में पकड़े गए शमशेर उर्फ शेरा और उसकी पत्नी कुलदीप कौर को ले जाती पुलिस।
सबसे पहले जानिए, दोनों की दोस्ती की कहानी
- 15 साल से वरिंदरपाल की गली में रहता था शेरा: मृतक वरिंदरपाल के चचेरे भाई जसविंदर सिंह ने बताया- शमशेर उर्फ शेरा 15 साल से वरिंदरपाल की गली में किराए के मकान में रहता था। बीच में 2 साल वो कहीं और चला गया था लेकिन फिर से उसी गली में आ गया। शेरा लकड़ी का काम करता था तो छोटे मोटे काम के लिए उसे सभी बुलाते थे। वहीं से वरिंदर और शेरा की जान पहचान हुई।
- वरिंदरपाल ने फैक्ट्री लगाई तो शेरा को बुला लिया: जसविंदर सिंह ने बताया- वरिंदरपाल ने करीब 8 साल पहले कंप्यूटर निटिंग की मशीनें लेकर अपनी फैक्ट्री शुरू की। फैक्ट्री में लकड़ी का करना था तो वरिंदर ने शेरा को बुला दिया। फैक्ट्री में शेरा समय-समय पर काम करने आता-जाता रहता था। वहीं से दोनों की नजदीकियां बढ़ी और दोस्त बन गए। इस दौरान दोनों काफी समय एक साथ बिताते थे। दोनों के बीच दोस्ती गहरी हो गई।
- शेरा की रुपए देकर मदद करता रहता था वरिंदरपाल: जसविंदर सिंह ने बताया- शेरा एक छोटे से कमरे में अपने दो बच्चों और पत्नी के साथ रहता था। वो करीब 15 साल से उसी कमरे में रहता है। वरिंदरपाल का काम ठीक ठाक चलने लगा था तो शेरा उसके पास जाकर अपनी गरीबी की चर्चा करने लगा। वरिंदरपाल उसे पैसे देता रहता था। कभी वह आटे के लिए तो कभी बच्चों की फीस वगैरह के नाम पर पैसे मांगता रहता था।
- घाटा हुआ तो वरिंदरपाल ने फैक्ट्री बंद की: जसविंदर ने बताया- वरिंदरपाल ने कंप्यूटर निटिंग मशीन का कोर्स किया था। वह निटिंग मशीन ऑपरेट करने के साथ-साथ उन्हें रिपेयर भी कर देता था। वह कंप्यूटर निटिंग मशीनों का मास्टर था। उसकी अपनी फैक्ट्री में भी कंप्यूटर निटिंग की मशीनें ही लगी थी। 2 साल पहले वरिंदरपाल को घाटा होने लगा तो उसने फैक्ट्री बंद कर दी। सारी मशीनें भी बेच दीं।
- शेरा ने वरिंदर को नशा करना सिखाया, परिवार ने नेपाल भेजा: जसबीर ने बताया- शेरा ने बाद में वरिंदर को नशा करना सिखा दिया। वरिंदर नशे के दलदल में पूरी तरह से फंसता उससे पहले परिवार को पता चल गया और उन्होंने उसे नशे से दूर कर दिया। उन्होंने उसे नेपाल भेज दिया। नेपाल में उसका भाई कंप्यूटर निटिंग का काम करता था। वरिंदरपाल ने करीब डेढ़ साल वहां पर काम किया लेकिन सेटिंग नहीं बैठी।
- ऑफर मिला तो नेपाल से मुंबई आ गया: जसविंदर ने बताया- इसी बीच उसे मुंबई से ऑफर मिल गया तो वह नेपाल से मुंबई चला गया। करीब छह महीने से वो मुंबई में काम कर रहा था। मुंबई में कंप्यूटर निटिंग मशीन के पार्ट्स महंगे मिलते हैं, इसलिए वह पार्ट्स लेने लुधियाना आया था। उसने एक दो दिन रहकर पार्ट्स लेकर वापस मुंबई जाना था।
- मुंबई जाकर भी शेरा के संपर्क में रहा वरिंदरपाल: जसविंदर सिंह ने बताया कि वरिंदर शेरा के संपर्क में था। जब वह नेपाल गया और उसके बाद मुंबई गया तो भी दोनों की बातचीत होती रहती थी। उन्होंने बताया कि शेरा ने उन्हें पहले बताया था कि वरिंदर ने अब नशा छोड़ दिया है। वरिंदरपाल शेरा को समय समय पर पैसे देता था। उसने शेरा से पैसे लेने थे। यह पता न तो परिवार को है और ही किसी और को कि उसने कितने पैसे लेने थे। उन्होंने बताया कि यह सही है कि उसने शेरा से पैसे लेने थे।

बाल्टी में पड़ा दविंदर का कटा सिर।
कत्ल कर लाश के टुकड़े ड्रम में पैक कर फेंकने की पूरी कहानी
- वरिंदर ने फोन किया, शेरा उसे रेलवे स्टेशन से ले गया: लुधियाना पुलिस के ADCP समीर वर्मा ने कहा- शेरा और वरिंदरपाल एक-दूसरे के टच में थे। दविंदर जब 5 जनवरी को मुंबई से रेलवे स्टेशन आया तो उसने फोन करके शमशेर को बुलाया। शमशेर ने उसे रेलवे स्टेशन से पिक किया। इसके बाद वह दविंदर को उसके घर लेकर गया, जहां उसने सामान रखा और दोनों शमशेर के घर चले गए।
- नशे में दोनों का झगड़ा हुआ, शेरा ने वरिंदर को मार डाला: वहां इन्होंने नशा किया। इसी दौरान दोनों का झगड़ा हो गया। शेरा ने दविंदर से काफी मारपीट की। दविंदर बेहोश हो गया। इसके बाद शेरा ने दविंदर की बॉडी चेक की तो उसकी मौत हो चुकी थी। शमशेर ने अपनी पत्नी कुलदीप कौर से कहा कि मेरा इससे झगड़ा हो गया था। इसलिए मैंने इसको मार दिया। अगर लाश यहां मिली तो हम सभी फंस जाएंगे। इसलिए इसके शव को काट कर डिस्पोज कर देते है। इससे किसी को कुछ पता नहीं चलेगा।
- कारपेंटर शमशेर ने आरी से लाश के 6 टुकड़े किए: शमशेर कारपेंटर का काम करता है, जिस कारण उसके पास घर में आरी थी। उसी आरी से शमशेर ने करीब ढाई घंटे लगाकर दविंदर की लाश को 6 टुकड़ों में काट दिया। दविंदर का सिर उसने बाल्टी में डाल दिया। इसके बाद पत्नी कुलदीप की मदद से दविंदर की लाश के बचे टुकड़ों को बोरे और बाल्टी में डाला। फिर दोनों पति-पत्नी ने आधी रात को शव के टुकड़ों को फेंकने के लिए चले गए।
- सिर रखी बाल्टी छूटी तो दोबारा लौटे: इसमें दिलचस्प बात ये भी थी कि शेरा ने वरिंदर की लाश के टुकड़े ठूंस-ठूंसकर ड्रम में भरे। जब उसमें जगह नहीं बची तो सिर बाल्टी में रख दिया। इसके बाद दोनों ड्रम लेकर बाइक पर निकल गए लेकिन सिर वाली बाल्टी घर पर ही भूल गए। जब वे ड्रम वाले टुकड़े फेंकने लगे तो पता चला कि सिर रखी बाल्टी तो घर में ही भूल आए। इसके बाद वह दोबारा लौटे और फिर बाकी टुकड़ों से एक किमी दूर उलटी दिशा में सिर फेंक दिया।
- लाश फूंकने की कोशिश की, घर से सबूत मिटाए: शेरा को डर था कि यहां लाश मिलने पर उसकी पहचान हो जाएगी और फिर पुलिस की जांच में वह पकड़ा जाएगा। इसलिए उन्होंने दविंदर के शरीर के टुकड़ों को खाली प्लॉट में फेंका। फिर ऊपर से तेल डाल दिया। फिर कुछ और कपड़े डालकर उसे जलाने की कोशिश की। हालांकि शव पूरी तरह से नहीं चला। इसके बाद वह घर लौटे। पुलिस ने जब हत्यारे के घर रेड की तो सबूत काफी हद तक मिटा दिए गए थे। घर में किसी तरह का सामान बिखरा हुआ नहीं था।

शव कब्जे में लेती पुलिस।
पुलिस कत्ल के आरोपियों तक कैसे पहुंची
- लापता होने की शिकायत आई, लाश मिल गई: ADCP समीर वर्मा ने बताया कि 6 जनवरी को परिवार ने दविंदर के लापता होने की शिकायत दी थी। पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज किया और टीमें उसकी तलाश में फील्ड में उतरी। 8 जनवरी सुबह जब हम दविंदरपाल की तलाश कर रहे थे तो उनका परिवार भी उसे खोज रहा था। तभी भट्टियां गांव के एक खाली प्लाट में शरीर के कुछ टुकड़े मिले। करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर व्यक्ति का सिर भी बाल्टी में मिला। हमने तुरंत हत्या का पर्चा दर्ज कर लिया।
- CCTV खंगाले तो लाश वाला ड्रम ले जाते दिखे: ADCP ने कहा- इसके बाद CCTV फुटेज खंगालने शुरू कर दिए। इस दौरान पुलिस को 7 जनवरी की रात एक बाइक पर वही ड्रम रखकर जाते एक व्यक्ति और औरत नजर आई। जब परिवार को इस वीडियो को दिखाया गया तो उसने बाइक चलाने वाले को दविंदर का दोस्त शेरा बताया था। पीछे उसकी पत्नी कुलदीप कौर बैठी थी। इसके बाद पुलिस ने तुरंत उसके घर रेड की।
- फरार हो रहे थे, मोबाइल स्विच ऑन करते ही फंसे: ADCP के मुताबिक लाश ठिकाने लगाने के बाद शेरा और उसकी पत्नी कुलदीप कौर, दोनों शहर छोड़कर भागने की फिराक में थे। इसके लिए वह लुधियाना दाना मंडी में पहुंच गए थे। पुलिस ने उनकी मोबाइल लोकेशन को सर्विलांस पर लगाया था। दाना मंडी के पास जैसे ही मोबाइल ऑन किया वहां से पकड़े गए।
- सिर दूर फेंका ताकि पहचान न हो: पुलिस पूछताछ में शेरा ने हत्या की बात कबूल कर ली। उसने कहा कि जिस रास्ते वह पहले ड्रम लेकर गए, वहां से दोबारा बाल्टी फेंकते वक्त नहीं गए। सिर को दूर फेंका ताकि पहचान न हो सके। शव को भी इसीलिए जला रहे थे कि उसकी शिनाख्त नहीं होगी। कुछ पॉलीथिन व कूड़ा डालकर आग भी लगाई लेकिन शव नहीं जला।
- पत्नी का हत्या में रोल नहीं, शव खुर्द-बुर्द में साथ दिया: ADCP समीर वर्मा ने कहा कि जिस वक्त हत्या हुई, पत्नी उस समय घर पर नहीं थी। वह कहीं काम करने के लिए गई थी। बच्चे छत पर खेल रहे थे। जब पत्नी काम से घर लौटी तो पति शेरा ने उसे सब कुछ बताया। पत्नी शव काे खुर्द-बुर्द करने में शामिल है। फिलहाल और किसी की इसमें इन्वॉल्वमेंट सामने नहीं आई है।

ADCP समीर वर्मा ने हत्याकांड को लेकर दैनिक भास्कर रिपोर्टर से बात की।
परिवार को पुलिस के दावों पर एतराज वरिंदरपाल का परिवार पुलिस की मर्डर की थ्योरी से संतुष्ट नहीं है। उसके चचेरे भाई जसविंदर सिंह ने कहा कि शेरा 10 गुणा 10 के कमरे में रहता है। 2 से ढाई घंटे उसे शव काटने में लगे। पुलिस गलत कह रही है कि पत्नी काम पर गई थी। पत्नी भी उस वक्त घर में थी और उसके बच्चे भी। इतनी सर्दी में कौन से बच्चे पूरा दिन छत पर रहते हैं।
लाश ठिकाने ले जाते वक्त भी शेरा के दोनों बेटे उसके साथ थे। हमारे पास इसके सबूत हैं। इस संबंध में पुलिस अधिकारियों को भी बता दिया है। जसविंदर सिंह ने कहा कि अगर पुलिस ने बच्चों को भी हत्या में शामिल नहीं किया तो परिजन चक्का जाम करेंगे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पुलिस अधिकारियों को भी बता दिया है कि बच्चे भी हत्या में पूरी तरह से शामिल थे। पुलिस इस तरह की थ्योरी बनाकर केस को कमजोर कर रही है।



