जिला परिषद ब्लॉक समिति चुनाव: नतीजों में देरी और भारी वोट रिजेक्शन पर BJP ने उठाया मुद्दा, चुनावी पारदर्शिता पर सवाल – Chandigarh News



पंजाब में जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों के नतीजों में हो रही अभूतपूर्व देरी और बड़ी संख्या में वोटों के खारिज होने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पंजाब ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा का कहना है कि मतगणना शुरू होने के 33 घंटे बाद भी महज करीब

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भाजपा पंजाब के प्रदेश प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियावाल ने कहा कि यह देरी इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध चुनावों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) क्यों जरूरी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बैलेट पेपर से कराए गए चुनावों में मतगणना में अनावश्यक देरी होती है, बड़ी संख्या में वैध वोट खारिज होते हैं और हेरफेर की आशंका बनी रहती है।

बलियावाल ने कहा कि बैलेट पेपर प्रणाली में फर्जी बैलेट छपाई और वोटों से छेड़छाड़ जैसी शिकायतें सामने आती रहती हैं। इस बार भी लाखों वोटों के रिजेक्ट होने की खबरें सामने आई हैं और नतीजों की घोषणा में कई-कई दिन लग रहे हैं। इससे आम जनता का लोकतांत्रिक प्रक्रिया से भरोसा कमजोर हुआ है।

कांग्रेस के आरोपों का भी हवाला भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि खुद पंजाब कांग्रेस के कई नेताओं ने भी आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर वोटों में हेरफेर और फर्जी बैलेट छपाई के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में कांग्रेस हाईकमान की चुप्पी समझ से परे है। बलियावाल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सवाल किया कि वे अपनी गठबंधन सहयोगी आम आदमी पार्टी से यह नहीं पूछ रहे कि पंजाब में मतगणना प्रक्रिया इतनी अव्यवस्थित क्यों है।

‘चुनावी प्रक्रिया की साख पर सवाल’ बलियावाल ने कहा, “जब चुनाव नतीजों में लगातार देरी हो रही हो और बड़े पैमाने पर वोट खारिज किए जा रहे हों, तो पूरी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और साख पर सवाल उठना स्वाभाविक है। मतदाताओं को पारदर्शिता, तेजी और भरोसा चाहिए, न कि भ्रम और राजनीतिक खेल।”

EVM लागू करने की मांग भाजपा ने दोहराया कि जो लोग अव्यवस्था और हेरफेर के जरिए राजनीति करना चाहते हैं, वे EVM से डरते हैं। EVM से मतदान में वोट रिजेक्ट होने की गुंजाइश नहीं रहती, मतगणना तेज होती है और पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होती है। पार्टी ने चुनावी सुधारों की मांग करते हुए कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने और मतदाताओं का भरोसा बहाल करने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।



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